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ऐतिहासिक पल का साक्षी बनी पशुपतिनाथ की नगरी इंदौर की सुरभि संघवी बनी स्वागत श्रीजी मसा

आचार्य प्रवर श्री रामलाल जी मसा ने सूर्योदय के पश्चात पूर्ण करवाई दीक्षा की विधि

हुए 108 वर्षीतप तपस्वीयों के पारणे

मंदसौर। मंदसौर नगर को जिस ऐतिहासिक आयोजन का इंतजार था वह बुधवार को संपन्न हो ही गया। नगर में दीक्षा और वर्षीतप के पारणें के भव्य आयोजन को अपनी निश्रा प्रदान करने आये आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलाल जी मसा ने प्रात 6.30 बजे सुर्योदय के पश्चात् इंदौर निवासी मुमुक्षु सुरभि संघवी को दीक्षा ग्रहण करवाई। दीक्षा के बाद सुरभि संघवी साध्वी स्वागत श्रीजी मसा बनी। अब उन्हें स्वागत श्रीजी मसा के नाम से जाना व पहचाना जावेंगा।

ऐतिहासिक कार्यक्रम नगर के कालाखेत मैदान पर बने विशाल पाण्डाल में संपन्न हुआ। प्रातः 5 बजे से ही लोगों को आना पाण्डाल में प्रारंभ हो गया था। सुबह को दीक्षार्थि सुरभि संघवी आई। जिसके पश्चात् आचार्य श्री ने दीक्षा की विधि पूर्ण करवाई। दीक्षा के बाद सुरभि संघवी के केशलोच किए गए। जिसके बाद आचार्य श्री ने उन्हें साध्वी स्वागतश्रीजी मसा नाम दिया।

इस ऐतिकासिक पल के साक्षी देश के विभिन्न अंचलों से आए हजारों श्रावक श्राविकाएॅ बने। हर कोई इस क्षण को देखकर प्रफृल्लित हो रहा था कि एक एमबीए की डिग्री लिए हुए लड़की ने कैसे आध्यात्म की और चल पड़ी। दीक्षा के उपरांत मुमुक्षु बहन के दादाजी बाबूलाल जी, पिता निर्मल संघवी एवं भाई सौरव संघवी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 109 साधु साध्वीयों के पावन सानिध्य में हुए कार्यक्रम में चारो और पवित्रता का महौल था।

दीक्षा के बाद नवीन दीक्षार्थी स्वागत श्रीजी मसा साध्वी मंडल में शामिल हुई और आचार्य प्रवर श्री रामलाल जी मसा के प्रवचन हुए। कार्यक्रम में श्री साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयचंद डागा, राष्ट्रीय महामंत्री धर्मेन्द्र आंचलिया, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमचंद वोरा, मप्र अंचल अध्यक्ष राजमल पंवार, संकल जैन समाज के अध्यक्ष सज्जनलाल जैन, विहार सेवा समिति के संयोजक शौकीन मुणत, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, संघ महा प्रभावक सदस्य चित्रेश मेहता, संघ के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोहरलाल जैन सम्मिलत हुए।

हुए 108 वर्षीतप के तपस्वीयों के पारणे
दीक्षा के आयोजन के बाद बुधवार को प्रातः 10.30 बजे वर्षीतप के तपस्वीयों के पारणे भी हुए। इस विशाल पारणे के आयोजन में देशभर से 108 से अधिक वर्षीतप के तपस्वीयों ने भाग लिया। तपस्वीयों को गन्ने का रस पीलाकर पारणा करवाया गया।

वर्षीतप क्या है
जैन समाज में वर्षीतप एक बड़ा तप व व्रत है। इस तप में वर्षीतप करने वाले को एक वर्ष तक एक दिन उपवास व एक दिन बियासना करना पड़ता है। उपवास में मात्र गर्म जल का उपयोग किया जा सकता है। कई बार वर्षीतप के तपस्वियों को बेले की तपस्या भी करना पडती है। बेले की तपस्या यानी लगातार दो दिन तक उपवास और यह क्रम निरंतर एक वर्ष तक चलता है।

8 अगस्त 2018 को रतलाम में दीक्षा
पुज्य आचार्य भगवन श्री रामलालजी म.सा’ की असीम-असीम अनुकम्पा से ’अक्षय तृतीया’ के पावन पुनीत पर्व के शुभ अवसर पर मुमुक्षु ’पुजा डागा’ सुपुत्री सुरेन्द्र कुमार डागा की दीक्षा आगामी 8 अगस्त 2018 को रतलाम में होगी। इसकी घोषणा भी मंदसौर में की गई।

माना आभार
भव्य आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वालों का श्री साधुमार्गी जैन संघ अध्यक्ष ओमप्रकाश पोरवाल, अरविन्द रूपावत, पुखराज मोगरा, शिखर डूंगरवाल, प्रकाश जैन बडोद वाले, नरेन्द्र चौधरी, पंकज पोरवाल, मनीष पोरवाल, सीमा मोगरा, सविता पटवा, विकास चौधरी आदि ने जैन समाज के विभिन्न मंडलों अन्य सामाजिक संस्थाओं, समाचार पत्रों के संपादकों, पत्रकारों एवं सहयोग करने वालो का आभार मानते हुए साधुवाद दिया। इसके सार्थ डॉ योगेन्द्र कोठारी, डॉ सौरभ जैन, डौ विमला मेहता का भी संघ ने आभार व्यक्त किया जिन्होने पाण्डाल में अपनी चिकित्सीय सेवाएॅ दी।

लगभग 8 राज्यों से आए श्रावक श्राविकाएॅ
मंदसौर में हुए ऐतिहासिक आयोजन के लिए बैंगलौर, चेन्नई, बीकानेर, जयपुर, कोटा, उज्जैन, इंदौर, रतलाम, मुंबई,आगरा,दिल्ली, नागपुर एवं देश के विभिन्न स्थानों से श्रावक श्राविकाएॅ इस भव्य का आयोजन के लिए मंदसौर आए।

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