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ऐतेहासिक छतरी – सुवासरा

सुवासरा से कुछ किलोमीटर दूर घसोई, खेजडिया भोप के रास्ते एक वीरान पहाड़ी पर एक ऐतेहासिक छतरी बानी हुई है| अगर हम दूर से इसे देखेगे तो ये सामान्य छतरी की तरह दिखाई देगी.. जो मंदसौर जिले मे ओर भी बहूत छतरी  के समान दिखाई देती है| छतरी की कुछ ऐसी विशेषताएं है जो इसे दूसरी छतरी से अलग बनाती है| पास के गांव वाले अपने अपने हिसाब से कहानियां बताते है| इस छतरी के बारे में लेकिन पुरात्व के नज़र से ये कुछ खास है| जब मेने इस छतरी  का अवलोकन किया तो  पाया की ये छतरी ऐतेहासिकदृस्टि से अनुपम है| जो इस छतरी को खास बनाती है| सब से पहले जिन चार पिल्लर पर ये खड़ी है उस में से एक पिल्लर पर प्राचीन भाषा में कुछ लिखा हुआ है| जो शायद  वहाँ से प्राचीन काल  में  निकले वाले राहगीरो के लिए कोई संदेश होगा| ये संदेश जिस भाषा में लिखा हुआ है| भारत की प्राचीन कालीन भाषा है| और  ये भाषा पाली, खरोष्ठी, ब्राह्मीलिपि, प्राकृत में से कोई  सी  भी हो सकती है| प्राचीन काल से आसपास  के स्थानों पर बुद्ध धर्म ओर जेन धर्म  का प्रभाव रहा है|

प्राचीन कालीन सम्राट अशोक महान जब बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे| अशोक महान  प्रचार के लिए  खरोष्ठी, ब्राह्मी लिपि का प्रयोग करते थे| छतरी की ओर एक सब से बड़ी विशेषता है| की इस छातरी पर पैरो के निशान बने हुए है, जो शायद बौद्ध धर्म या जेन धर्म को समर्पित है| छतरी की स्थापत्य भी बहुत सुंदर है, लेकिन समय की मार से पूरी छतरी के  अवशेष इधर उधर पड़े है| निशित रूप से  ये एक ऐतेहासिक छतरी है, जो अपने साथ प्राचीन काल का इतिहास समेटे हुवे है| पुरातत्वविद अगर इस छतरी का ओर अध्ययन करे तो निषितरूप से महत्पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है| ओर मंदसौर जिल्रे  को एक ओर ऐतेहासिक पर्यटक स्थल प्राप्त हो सकता है|

अवलोकनकर्ता
मनोज कुमार देसाई सहायक प्राध्यापक
( इतिहास विभाग)
सविता देवी जायसवाल महाविद्यालय शामगढ़
Mobile no. 9893858270
E-mail  [email protected]

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