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कर्ज से परेशान किसान खेत की मिट्टी तक बेचने पर हुआ मजबूर :  सरकार दावे हुए खोखले साबित

सीतामऊ। वर्तमान सरकार द्वारा किसानों के हित में कार्य करने के बड़े बड़े दावे कर रही है। उन दावो तब प्रश्न चिन्ह लग जाता है जब एक गरीब किसान ने बैंक व साहुकारो के कर्ज के कारण अपने खेत की उपजाऊ मिट्टी तक बेच दी।अब किसान यह जमीन खेती योग्य नही बची है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बिलांत्री के गाँव कमालपुरा के किसान हीरालाल पिता सीताराम ने सोसायटी व साहूकारों के कर्ज देने के लिए अपने खेत की सारी मिट्टी बेच दी। किसान हीरालाल ने बताया कि उसके ऊपर सोसायटी व साहूकारों का लगभग 5 लाख से भी अधिक का कर्ज है जिससे उतारने के लिए अपनी जमीन की उपजाऊ मिट्टी का सौदा कर दिया। जिसकी कीमत भी मात्र 70 से 80 रूपये ट्रॉली मिल रही है हमारी फसल ओने पोने दाम में बिकने से हम अपना लागत खर्च भी नही निकाल पाते है, तो कर्ज कहा से उतारेंगे इसलिये मजबूरी में जमीन नही बेचते हुए हमने इसकी मिट्टी का सौदा कर दिया है जिससे हम अपना कर्ज तो नही उतार पाएंगे लेकिन साहूकारों से कुछ हद तक तो राहत मिलेंगी और शायद कर्ज उतारने की कुछ और समय मिल जाएगा। किसान पुत्र रतनलाल पिता हीरालाल ने बताया जमीन की मिट्टी कर्ज के कारण बेचना पड़ी । हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नही था नही तो हमे यह जमीन ही बेचना पड़ती। अब हमारे पास हमारी जमीन का टुकड़ा तो बचा है जिस पर एक फसल हमे मिल पाएगी। और हम परिवार के लोग मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पाल लेंगे।

कहते है कि अपने खेत की मिट्टी को किसान अपने खून से सींचता है लेकिन उसी खून से सींचि गई मिट्टी जो उसके परिवार का पेंट भरती थी उसको कर्ज के कारण बेचने पर मजबूर हो गया। आखिर उसके पीछे कारण यही आया कि सरकार द्वारा किसानों की फसलों के दाम में लागत मूल्य भी निकालना मुश्किल हो गया है फिर किसान को कर्ज चुकाने के लिए कहीं अपने बेटों को गिरवी रखना पड़ता है तो कहि अपनी जमीन की मिट्टी को बेचना पड़ता है।

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