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कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह सस्पेंड – कार्यकाल मे विकास और विवाद से रहा चोली दामन का साथ

भोपाल। किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के मामले में मप्र शासन ने तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह को प्राथमिक तौर पर दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया है। शिवराज सिंह सरकार की ओर से यह एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। सरकार ने माना है कि स्वतंत्र कुमार सिंह हालात को समझने एवं कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने में नाकाम रहे। किसानों ने उनके साथ भी मारपीट कर कपड़े फाड़ दिए थे। आईएएस स्वतंत्र कुमार ने अपने खिलाफ संभावित कार्रवाई से बचने के लिए विशेष पूजा भी कराई थी।
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आईएएस अफसरों की तबादला सूची के बाद आज शाम जारी हुआ यह तीसरा आदेश है। बता दें कि पिछले दिनों मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 5 किसानों की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि एक किसान इलाज के दौरान मारा गया। किसान नेताओं ने इस फायरिंग में 8 किसानों के मारे जाने का दावा किया है। इसी फायरिंग के कारण मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। इससे पहले तक आम जनता में शिवराज सिंह सरकार की छवि एक किसान प्रिय सरकार की थी। फायरिंग के बाद कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने यह बयान भी दिया था कि उन्होंने फायरिंग के आदेश नहीं दिए। शासन ने स्वतंत्र कुमार सिंह को तबादला आदेश जारी करने से पहले ही मंदसौर से वापस बुला लिया था और शिवपुरी कलेक्टर को मंदसौर भेज दिया था।
कार्रवाई से बचने विशेष पूजा कराई थी
मंदसौर से हटाए गए कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह आईएएस को लग रहा था कि उनकी राशि में अंगारक दोष है। इस दोष को दूर करने के लिए उन्होंने उज्जैन के अंगारेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना भी करवाई। बताया जाता है कि इस विशेष पूजन से असफलताएं, सफलता में बदल जातीं हैं। इस पूजा के बाद भी वो मनचाहा फल प्राप्त नहीं कर पाए।

 

विकास ओर विवाद से रहा चोली दामन का साथ

जिले में करीब दो साल पहले दमोह से स्थानातंरित होकर स्वतंत्र कुमार सिंह मंदसौर कलेक्टर बने। इस अवधि में शहर में विकास कार्यों में गति पकड़ी तो अनियमितिता एवं भ्रष्टाचार के आरोप से वे बचे नहीं। दूधाखेड़ी माता मंदिर एवं भगवान पशुपतिनाथ मंदिर विकास में निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री इस्तेमाल एवं निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर कलेक्टर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन पर ठेकेदारों से सांठगांठ के आरोप भी लगाए गए। सिंह का आक्रोशित लोगों ने पुतला तक जलाया। खास तौर पर दूधाखेड़ी माता मंदिर के जिर्णोंद्धार के चलते माता प्रतिमाओं के लिए बनाया गया चबुतरे के ढह जाने के बाद हजारों लोग आक्रोशित हुए। मामला लाठीचार्ज तक पहुंचा। इसके अलावा युवराज क्लब में शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाने को लेकर भी कलेक्टर पर सवालिया निशान लगाए गए। उन्होंने क्लब के अध्यक्ष होने के नाते ना तो नगर पालिका से निर्माण की अनुमति ली और ना ही नक्शा पास कराया। बरसों से अधूरे पड़े संजय गांधी स्टेडियम का निर्माण कार्यसिंह ने तेजी से करवाया। उन्होंने बेटमिंटन व टेबल टेनिस के लिए सुसज्जित हॉल बनवाए। वहीं स्केटिंग के लिए इधर-उधर भटक रहे खिलाडिय़ों के लिए रिकार्ड समय में स्केटिंग ग्राउंड बनवाया। उन्होंने क्रिकेट स्टेडियम को सुसज्जित करवाया। यहां दिन रात मैच हो सके ऐसी व्यवस्था भी करवाई। राज्य स्तरीय बेटमिंटन की प्रतियोगिताएं दो बार आयोजित करवाई। वहीं टेबल टेनिस की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता उन्होंने करवाई। पर यहां स्टेडियम में घास लगाने एवं पैवेलियन निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी उन पर लगे।वही राजस्व मामलों मेंं भी सिंह की कार्यप्रणाली पर लोगों ने अंगुलिया उठाई। किसान आंदोलन के दौरान उनकी लचर कार्यप्रणाली उनके गले की फांस बनी। गोलीचालन की घटना के बाद बरखेड़ा पंथ गांव में कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट भी की।

Farmer Violence : मंदसौर के पूर्व कलेक्टर, एसपी, सीएसपी निलंबित

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर जिले में पुलिस गोलीबारी में किसानों की मौत की घटना लिए राज्य सरकार ने पूर्व जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी और नगर पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा थोटा को जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित कर दिया है।

राज्य शासन की ओर से बुाधवार देर शाम जारी आदेश में तीनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। तीनों अधिकारियों को मंदसौर में हिंसा और पुलिस गोलीबारी के बाद वहां से हटा दिया गया था।

ज्ञात हो कि किसानों ने कर्जमाफी और उपज के उचित मूल्य की मांग को लेकर राज्य में एक से 10 जून तक आंदोलन किया था। इस दौरान छह जून को मंदसौर में किसानों पर हुई पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हुई थी, जबकि बाद में एक किसान की पुलिस पिटाई से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी। मंदसौर में तो कर्फ्यू लगाना पड़ा था।

कथित तौर पर मंदसौर प्रशासन की ओर से राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह को सही जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके चलते सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। गृहमंत्री ने पहले कहा था कि किसानों की मौत पुलिस गोलीबारी से नहीं हुई थी, लेकिन तीन दिनों बाद उन्होंने कहा कि किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई।

 

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