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कवियों ने बांधा समा – हजारों की संख्‍या में रही उपस्थिति

पशुपतिनाथ महादेव मेला में लखनउ के वेदव्रत वाजपेयी कोटा ने जगदीश सोलंकी, अलीगढ के डाॅ विष्णु सक्सेना, ललितपुर उप्र की अनामिका अम्बर, दिल्ली की श्वेता सरगम, धार के जानी बैरागी, गोरखपुर के सौरभ सुमन, देवास के देवकृष्ण व्यास, कांकरोली राज के सम्पत सुरीला, मंदसौर के विनोद गंगरानी व पडोसी देश नेपाल से आये लक्ष्मण नेपाली ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुती दी।
कवि सम्मेलन की शुरूआत अनामिका अम्बर ने माॅ सरस्वती वंदना से की और नयी रचना शब्दो में खनक वाणी में झन्कार दे दे माॅं, सबको दिया है मुझको भी तेरा आशीष दे दे माॅ……
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे सौरभ सुमन गौरखपुर ने हास्य विनोद करते हुए अच्छे दिनो पर टिप्पणी की मनमोहन सिंह संसद में बोलने लगे है इससे अच्छे दिन क्या होगे। उन्होने अपनी बारी आने पर कविताा पाठ करते हुए ये पक्तिंया पडी कर दिये प्रतिबंध नोट 500 1000 के लाईनो में खडे लोग कतार के बुढे जवान सभी लोग लिये खडे नोट आस के धक्के खा रहे बैक और एटीएम में फिर भी देश की खातिर न श्किवे के बोल है न शिकायत है क्यो कि मेरा देश देश बदल रहा है……
सम्पत सुरीला कांकरोली ने स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत अभियान पर ये रचनाये पडी एक चर्चा सुबह शाम हो जाये…स्वच्छ अभियान का संदेश घर घर जाये ………देश मेरा मंदिर सा पावन हो जाये……। इन पंक्तियों को खुब सराहना मिली उन्होने सर्जिकल स्ट्राईक पर ये पंक्तिया पडी दुनिया की नजर मै मोदी आगे निकल गया…स्टागंली उसका जादू सब पर चल गया आंतकियो का केम्प धूं धूं कर जल गया….। उन्होने नारी शक्ति पर ये पंक्तियां पडी भारत की नारी अपनी शक्ति को पहचानती है, मीरा की भांति विश पी कर भी देश, घर, आंगन सभालती है, उन्होने कन्या भ्रुण हत्या पर भी ये पक्तियां पडी मेरे माता पिता ही कसायी किसे से और क्या मै जन्म तो दे रूसवायी, बेटा जन्मे तो दे बधाई मेरे जन्म से ही पहले मेरी बिदाई किसे और क्या कहना……
देवास के सुप्रसिद्ध कवि श्री देवकृष्ण व्यास ने ऐसा नही होना चाहिए काश्मीर घाटी में खाते है ऐसी भारत की लोग उठाते है। गोली मारो ऐसे लोगो को जो भारत माॅ का शिश झुकाते है….। उन्होने देशभक्ति को धर्म से बडा बताते हुए ये पंक्तियां पडी। मरते मरते बोलगे बंदे मातरम दुनिया के सारे काम करेगे बाद में आओ पल तो पल बिताये शहीदो की याद में भगवान के मंदिर चलेगे बाद में सिकी ने दिया भाई किसी ने अपने सुहाग को खुब बुझ गये लेकिन सर न ही झुकने दिया…..आओ पल तो पल बिताये शहीदो की याद में ।
उन्होने बोटी बोटी को भारत का अभिन्न अंग बताने वाली ये पंक्तियां पडी बोटी बोटी कर दो हमारे तन की पर काश्मीर नही देगे खाल खीच लो हमारे तन की पर माॅ का चिर नही देगे। उन्होने आगे ये पंक्तियां पडी खतरे में है सीमाये हमारी घायल काश्मीर घाटी बुला रही चलो निपटे हमला करने वालो से, आंतक मचाने वालो और उन्हे दूध पिलाने वालो से से आओ निपटे अमरनाथ यात्रा में बारूद बिछाने वालो से…….।
उन्होने सुभाषचंद बोस की देशभक्ति पर पक्तियां पडी इतिहास का एक पृष्ठ छोड दो सुभाष के लिये स्याही से नही रक्त से लिखना होगा। झुठ नही जय बताना होगा कल की पीडिया इस पृष्ठ को पडेगी स्वभिमान से…..
लक्ष्मण नेपाली ने हास्य व्यग में कई रचनाए पडी जिसे सभी ने सराहा आपने पत्नी व पुलिस की समानता की तुलना करते हुए कई पक्तियां कही जिसे श्रवण कर श्रोता गुदगदा उठे। आपने साम्प्रदायिक सौहाद पर ये पक्त्यिां कही मै मजहब के ना पर कई जगह दंगा देखता हूॅ लेकिन मै तो गिलास में भरे पानी में भी गंगा देखता हूॅ।
उन्होने माॅ की करूणा, दया एवं वात्सलय भाव पर कई पक्तियां पडी उनकी पक्तियो को श्रवण कर माॅ से वात्सलय रखने वाले सुधी श्रोताओ की आॅखो से आंसू झलक उठे। उन्होने माॅ पर ये पक्तियां कही। माॅ से ज्यादा कोई वफा कर नही सकता कोई धन उसके दूध का कर्ज अदा नही कर सकता ….। उन्होने माॅ की मृत्यु होने पर माॅ के शरीर के अग्नि संस्कार के समय के भावो को अपनी पंक्तियो में कहा कि मुझसे माॅ का शरीर जलाया नही जाता मौ से ज्यादा कोई अनमोल नही माॅ का कोई मोल नही जिस धरती पर माॅ की राख गिरेगी वह जमीन पाक हो जायेगी।
मंदसौर के जाने माने कवि श्री विनोद गंगरानी ने रावण व मंदोदरी पर ये पंक्तियां पडी रावण का सुसराल मंदसौर मन्दोदरी का पीहर मंदसौर बालकवि बैरागी का रचना संसार मंदसौर यशोधर्मन के विजय की धरती मंदसौर…….। उन्होने रावण दहन भी व्यंग किया और कई पंक्तियां पडी जिसे श्रोताओ ने खुब सराहा।
अनामिका अम्बर ने श्रृगांर रस की कई रचनाए उन्होने ये पक्तियां पडी कुछ बात हमारी हो, कुछ बात तुम्हारी हो सुनने व सुनाने की तैयारी हो तू मेरे नाम हो जाए मै तेरे नाम हो जाउ। उन्होने आगे ये पंक्तिया पडी खेलने मत दो नादान लोगो को अपने दिल से खिलौना नही है ये दिल मेरा उन्होने शहीद के बेटे की दिपावली कैसे मनती है उस पर रचनाये पडी चारो और उजाला पर मेरे घर अंघेरी रात थी, दिपावली पर क्यो न आये पापा अबकी बार, क्यो माॅ ने आज बिन्दीया व सिन्दुर नही लगाया, किसी के पापा आज नये कपडे नये शुज और पटाखे लाये पर क्यो न आ ये पापा दिपाावली पर अबकी बार….
कवि सम्मेलन के प्रारंभ में अतिथि के रूप में पधारे विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया, जिला सहकारी केन्द्रीय बैक अध्यक्ष श्री मदनलाल राठौर ने माॅ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर दोनो का स्वागत नपाध्यक्ष श्री प्रहलाद बंधवार, मेला सभापति श्रीमति संध्या अरूण शर्मा, मेला समिति सदस्य गुड्डु गढवाल, श्रीमति राधिक किशोर शास्त्री, श्रीमति विघा पुखराज दशौरा, श्रीमति रंजना सुदीप पाटिल, नपा सभापतिगण मुकेश खमेसरा, विनोद डगवार, पुलकित पटवा, पार्षद निरांत बग्गा, अनिल मालवीय, जितेन्द्र सोपरा, सीएमओ हिमांशु भटट, लेखापाल विजय मांदलिया, मेला लिपिक राजेन्द्र नीमा, भाजपा नेता राकेश भावसार, स्नेहिल शर्मा, मुकुन्द जोशी आदि ने किया।

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