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कांग्रेस को नपाध्यक्ष की नियुक्ति का 40 वर्षो बाद संयोग से मिला मौका, फिर भी मनोनीत नहीं हो सका अध्यक्ष

मंदसौर। नगर पालिका परिषद में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष बनने का मौका लगभग 40 वर्षो बाद संयोग या एक हादसे के बाद कांग्रेस पार्षदों को मिला था। लेकिन इस पद पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार 50 दिनों बाद भी नपा में अपने दल के किसी भी पार्षद का अध्यक्ष पद के लिए मनोनयन नहीं कर सकी है। इसे कांग्रेस की विडंबना कहेंगे या गुटबाजी परंतु नये अध्यक्ष के अभाव में नपा का कार्य पूरी तरह से ठप्प हो गया है। न भुगतान हो रहे और न ही विकास की फाइलें आगे बढ़ पा रही है।

स्मरण रहें कि नपा परिषद पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है ओर अध्यक्ष पद पर भाजपा के प्रहलाद बंधवार काबिज थे जिनकी 17 जनवरी 19 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब से नपाध्यक्ष पद खाली पड़ा हुआ है, अध्यक्षा की हत्या नये अध्यक्ष की नियुक्ति न होने से अधिकांश पार्षदों ने जैसे नपा से ही नाता तोड़ लिया है। श्री बंधवार की हत्या के बाद कांग्रेस की ओर से पार्षद हनीफ शेख को अध्यक्ष मनोनित करने की मंशा जिला कांगेस ने जाहिर भी कर दी थी। शेख के पक्ष में पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल ने लगभग 8 पार्षदों के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं स्थानीय प्रशासन मंत्री से मुलाकात की थी। जहां से सभी ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया था कि दो चार दिनों में नपा को नए अध्यक्ष मिल जावेंगा। परंतु एक पखवाड़ा बित जाने पर भी प्रदेश की कांग्रेस सरकार नए अध्यक्ष को मनोनित नहीं कर पाई है। वहीं अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की जुझारू पार्षदा शाकेरा युसुफ खेड़ीवाला ने भी दावा पेश कर मामला और पेचीदा बना दिया लेकिन 50 दिन बाद भी नपा को नया अध्यक्ष न मिलना आमजन के समझ में नहीं आ रहा है।

परिषद में कांग्रेस के 17 पार्षद है और वे भी चाहेते है कि प्रदेश सरकार किसी को भी अध्यक्ष मनोनित कर दें तो कम से कम नपा का कार्य आगे बढ़े। कांग्रेस पार्षदों की मंशा के बाद भी प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा अध्यक्ष को नहीं बैठाना किसी को हजम नहीं हो रहा है। वहीं कांग्रेस संगठन की किरकिरी हो रही है। 40 वर्षो बाद एक हादसे के बाद कांग्रेस को कार्य करने का मौका मिला है। लेकिन राज्य शासन किसी कांग्रेस पार्षद को मौका ही नहीं देना चाहता तभी तो नपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति में विलंब हो रहा है।

कहीं हार से नाराज तो नहीं है राज्य सरकार

किसान आंदोलन में देश भर में चर्चित मंदसौर जिले में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली पराजय से नाराज होकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार किसी पार्षद को अध्यक्ष बनाने के मुड में नहीं है। ऐसा आभार आमजन को होने लगा है। ऐसा लगने लगा हैं कि प्रदेश की सरकार भी अपना ध्यान मंदसौर जिले पर दे रही है ऐसा नहीं लगता। प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा से तो पार्षदों से दो टूक कह दिया हैं कि आप मुख्यमंत्री से मिल आए हैं निर्णय तो उन्ही को करना है। ऐसे में कांग्रेस संगठन व पार्षद भी चुप बैठ गए है। नपा में कांग्रेस अध्यक्ष बनने का मौका मिला पर राज्य शासन की इच्छाशक्ति के अभाव में यह सुनहरा अवसर कांग्रेस के हाथों से फिसलता हुआ नजर आ रहा है।

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