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कायस्थ समाज ने महादेवी वर्मा की पूण्यतिथि पर उनको किया याद

भगवान श्री चित्रगुप्त मंदिर पर दी गई पद्मविभूषण महादेवी वर्मा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई कार्यक्रम का संचालन आशीष गोड़ एडवोकेट ने किया
वक्ताओं में दीपेश जी श्रीवास्तव ने अपना उद्बोधन दिया कायस्थ समाज अध्यक्ष रविश राय गौड़ ने उनके जीवनपर प्रकाश डालतेहुए कहा आपको आधुनिक युग की मीरा भी कहा जाता है। भक्ति काल में जो स्थान कृष्ण भक्त मीरा को प्राप्त है, आधुनिक काल में वह स्थान महादेवी वर्मा को मिला है। मीरा का प्रियतम सगुण, साकार गिरधर गोपाल है जिसके प्रति वे समर्पित रही, तो दूसरी ओर महादेवी के प्रियतम असीम निर्गुण निराकार (ब्रह्म) हैं और उसके प्रति वे समर्पित हैं। महादेवी अपने आप में एक जीवन गाथा हैं। महादेवी का प्रसिद्ध गीत, ‘मैं नीर भरी दुःख की बदली’ इस बात का परिचायक है कि उनका यह जीवन दर्शन है जो मीराबाई जैसा ही है।

अपने बचपन के संस्मरण “मेरे बचपन के दिन” में महादेवी ने लिखा है कि जब बेटियाँ बोझ मानी जाती थीं, उनका सौभाग्य था कि उनका एक आजाद ख्याल परिवार में जन्म हुआ। उनके दादाजी उन्हें विदुषी बनाना चाहते थे। उनकी माँ संस्कृत और हिन्दी की ज्ञाता थीं और धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। माँ ने ही महादेवी को कविता लिखने, और साहित्य में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया। निराला, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पन्त के साथ साथ महादेवी वर्मा को छायावाद का एक स्तम्भ माना जाता है। कविताओं के साथ साथ उनके गद्य को भी समीक्षकों की सराहना मिली। वह चित्रकला में भी निपुण थीं।

आपको मिले ये पुरस्कार

1934 – सेकसरिया पुरस्कार

1942 – द्विवेदी पदक

1943 – मंगला प्रसाद पुरस्कार

1943 – भारत भारती पुरस्कार

1956 – पद्म भूषण

1979 – साहित्य अकादमी फेलोशिप

1982 – ज्ञानपीठ पुरस्कार

1988 – पद्म विभूषण

महादेवी जी वर्मा का निधन11 सितम्बर 1987 को तीर्थराज प्रयाग में हुआ था आपकी पावन पूण्य तिथि पर कायस्थ समाज की ओर से कोटि कोटि विनम्र भावभीनी श्रद्धांजलि इस अवसर पर विक्रम भटनागर राजेश कुलश्रेष्ठ शैलेंद्र माथुर डॉक्टर सतीश चंद्र गौड़ डॉ श्रवण श्रीवास्तव योगेन्द्र निगम शिव राजेंद्र शास्ता मुकेश गोड़ अमित सक्सेना तरुण निगम कुणाल श्रीवास्तव आदि ने भी श्रद्धांजलि दी आभार अरुण गौड़ ने माना उक्त जानकारी कायस्थ समाज मीडिया प्रभारी पंकज श्रीवास्तव द्वारा दी गई

 

 

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