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कालिदास के साहित्य में हिमालय की ऊँचाई व सागर की गहराई है

कालिदास समारेाह में शोध संगोष्ठी व लोकप्रिय व्याख्यान का आयोजन हुआ

मन्दसौर। दो दिवसीय कालिदास समारोह के अन्तर्गत पशुपतिनाथ मंदिर परिसर के प्रशासनिक सभागार में कालिदास साहित्य पर केन्द्रित शोध संगोष्ठी का आयोजन काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. सूर्यप्रकाश व्यास की अध्यक्षता में हुआ। इसी समारोह में मेघदूत के काव्य सौंदर्य पर प्रो. बालकृष्ण शर्मा उज्जैन का लोकप्रिय व्याख्यान भी हुआ। जिसकी अध्यक्षता डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने की।
शोध संगोष्ठी में देश के 12 विद्वानों ने अपने शोध परक आलेख प्रस्तुत किए। प्रो. डॉ. अरूण वर्मा उज्जैन ने कहा कि महाकवि कालिदास सौन्दर्य दर्शन के शीर्षस्थ कवि थे। उन्होनंे मानव जीवन के नैसर्गिक चरित्र को समग्रता के साथ चित्रित किया। डॉ. श्रीमती ज्योतिषमती चौधरी नागदा ने कहा कि महाकवि ने अपने ग्रंथों में नारी सम्मान के आदर्श को प्रस्तुत किया, वे भारतीय संस्कृति के प्रतीक है। कालिदास के पात्रों में भारतीयता हर पहलू मे झलकती है। डॉ. पूजा उपाध्याय ने कहा कि कालिदास ने मानवीय मूल्यों की  पुर्नस्थापना की। उनके प्रत्येक चरित्र से प्रेरणा मिलती है। डॉ. पूरण सहगल मनासा ने अपने शोध आलेख के कालिदास का संबंध भानपुरा के चम्बल किनारे के अंचल से जोड़ते हुए तथ्यात्मक बिन्दू प्रगट किये। डॉ. प्रद्युम्न कुमार भट्ट भानपुरा ने कहा कि कालिदास ने जीवन का कोई भी क्षेत्र अपने साहित्य में  नहीं छोड़ा। उनके साहित्य नमें हिमालय की ऊँचाई व सागर की गहराई है। शा. महाविद्यालय मंदसौर के संस्कृत विभाग के प्राध्यापक प्रो. सूर्यवंशी ने कहा कि महाकवि के साहित्य में चमत्कारिक रूप से सम्पूर्णता दिखती है। डॉ. पवन व्यास जयपुर ने कहा कि कालिदास सूक्ष्मदर्शी सौंदर्य बोध के कवि हैं, उनके साहित्य में चेतना सदैव नीहित रहती है। डॉ. वत्सला झालावाड़ ने कहा कि महाकवि प्रकृति के पुजारी है उनके साहित्य में प्रकृति जड़ नहीं वरन जीवंत दिखती है। आरंभ में कालिदास अकादमी उज्जैन के सहायक निदेशक डॉ. संतोष पण्ड्या ने स्वागत भाषण दिया। अतिथि विद्वानों का स्वागत डॉ. घनश्याम बटवाल, ब्रजेश जोशी, अनिल बारोट, धनराज धनगर, राहुल रूनवाल ने किया। इस शोध संगोष्ठी में महेश मिश्रा, पं. कुबेरकान्त त्रिपाठी, राजेश दुबे, सचिन पारिख, प्रहलाद सोनी, भगवती प्रसाद गेहलोद, विनोद गर्ग आदि अनेक सुधी श्रोता उपस्थित थे।

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