Breaking News

कालिदास समारोह से महाकवि कालिदास को समझने, जानने का प्राप्त होगा सुअवसर-कालिदास प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन

चित्र प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के उज्जैन, भोपाल, इन्दौर, बड़वाह, झाबुआ, भिलाई, रतलाम, मंदसौर के अतिरिक्त अन्य प्रांत राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, किशनगढ़, गुजरात के भावगनगर, पौरबंदर, महाराष्ट्र के पूणे, हिमाचल प्रदेश के चम्बा, मैसूर (कर्नाटक) कटक आदि भारत के श्रेष्ठ चित्रकारों के कालिदास के संस्कृत गं्रथ ऋतु संहारम, मेघदूतम, अभिज्ञान शंकुतलम्, सम्पूर्ण मेघदूतम, रघुवंशम, कुमार सम्भवम्, मालविकाग्निमित्रम पर आधारित सुन्दर भावों को चित्रित चित्रों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई।
इस अवसर पर श्री गुरूचरण बग्गा ने प्रदर्शनी अवलोकन पश्चात् अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि महाकवि कालिदास के ग्रंथों पर आधारित इतनी सुन्दर प्रदर्शनी भगवान श्री पशुपतिनाथ के सभाग्रह में मंदसौर में प्रथम बार देखने का अवसर मिला है। यह हमारे लिये परम् सौभाग्य है। आपने कहा अन्य पद्य रचनाकारों को कवि कहा जाता है जबकि कालिदास को कवि नहीं महाकवि की उपमा दी गई है ऐसे महाकवि कालिदास का जन्म स्थल, जैसा कि कहा जाता है मंदसौर के खिलचीपुरा में बताया जाना चाहे किवदन्ती हो सकता है परन्तु उनके ग्रंथों में भगवान श्री पशुपतिनाथ तथा दशपुर नगर का जो उल्लेख हुआ है वह यह सिद्ध करता है कि कालिदास का मंदसौर नगर से निश्चित ही कोई सम्बन्ध रहा है। कालिदास की बचपन की एक ही घटना ने निरक्षर कालिदास को कवि ही नहीं संस्कृत का महाविद्वान कवि बना दिया। ऐसे कालिदास समारोह का निरंतर तीसरे वर्ष में नगर में आयोजित होना दशपुर नगर के लिये गौरव का विषय है। इस समारोह में बाहर के विद्वानों के कालिदास के संबंध में श्रेष्ठ व्याख्यान तथा नाट्य कलाकारों की प्रस्तुतियों से निश्चित ही कालिदास को जानने, समझने का अवसर नगर के प्रबुद्धजनों को प्राप्त होगा।
श्री श्याम चैधरी ने महाकवि कालिदास के ग्रंथों की सस्ंकृत में रचना होने पर कहा कि जनसाधारण को संस्कृत का ज्ञान नहीं होने से, संस्कृत भाषा के ग्रंथों में किस भाव की प्रधानता तथा मुख्य उद्देश्य रहता है। संस्कृत ज्ञान होने पर ही संज्ञान हो सकता है। परन्तु चित्रों के माध्यम से की कालिदास के ग्रंथों के भावों को समझने में सुगमता होती है। आपने संस्कृत का महत्व बताते हुए कहा कि धरती से लेकर अंतरिक्ष तक का सम्पूर्ण ज्ञान विज्ञान संस्कृत भाषा में पूर्व से समाहित है परन्तु यह विडम्बना है कि उसी संस्कृत भाषा जिसे विदेशी अपना रहे है और हम उससे दूर होते जा रहे है। आपने कहा कालिदास समारोह से हमारी देववाणी प्राचीन प्रथम संस्कृत भाषा के प्रति भावना प्रकट होकर संस्कृत शिक्षण के प्रति रूचि जागृत होगी परन्तु ऐसे श्रेष्ठ आयोजन केवल शासकीय माध्यम तक ही सीमित नहीं रहकर सार्वजनिक रूप से उसमें सभी की सहभागिता होना चाहिए।
श्री आनन्द सिन्हा ने मंदसौर नगर में आयोजित चित्र प्रदर्शनी में नगर के प्रबुद्धजनों से मिले अपार सम्मान से अभिभूत होकर कहा कवि कालिदास के संबंध में अकादमी द्वारा प्रदर्शनिया तो अन्य स्थलों पर भी लगाई जाती रही है परन्तु मंदसौर में प्रथम बार जिस प्रकार का रिस्पांस (सम्मान) मिला है वैसा उन्होनंे सोचा भी नहीं था,। आज 19 मार्च को प्रातः 11 बजे लोकप्रिय व्याख्यान कालिदास की कलादृष्टि पर होंगे। वक्ता श्री नर्मदाप्रसाद उपाध्याय इन्दौर, डाॅ. संगम पाण्डे नई दिल्ली, श्री शिवकेश मिश्र नईदिल्ली होंगे। अध्यक्षता प्रो. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठ इंदौर करेंगे। रात्रि 7 बजे से �आषाढ़ का एक दिन� हिन्दी नाटक होगा जिसकी प्रस्तुति निर्देशक श्री अभिषेक के निर्देशन में सूत्रधार संस्था आजमगढ़ उ.प्र. द्वारा की जावेगी।
कालिदास अकादमी उज्जैन तथा स्थानीय आयोजन समिति ने नगरवासियों से आज दिनांक 19 मार्च को प्रातःकालिन व्याख्यान माला तथा रात्रि को आयोजित हिन्दी नाटक में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होने का सानुरोध-आग्रह किया है।
उपस्थित रहे- अकादमी उपनिर्देशक संतोष पण्ड्या, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी, डाॅ. घनश्याम बटवाल, प्रदीप भाटी, राव विजयसिंह, ब्रजेश आर्य, बंशीलाल टांक, जयेश नागर, कांतिलाल पण्ड्या, श्याम कहार, डाॅ. देवेन्द्र पुराणिक, अजीजुल्लाह खान, आनन्द, राधेश्याम सिखवाल, अजय सिखवाल, गोविन्द पुरोहित, धनराज धनगर, अनिल बारोड़, दिनेश बैरागी आदि।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts