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किसानों की कर्ज माफी समस्या का हल है क्या?

जिस तरह से मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसान आंदोनल चल रहा है वह राजनीति से ज्यादा कुछ नही है. मंदसौर वह इलाका है. जहाँ सबसे ज्यादा अफीम की पैदावार होती है. नीमच ओर मंदसौर इसके गढ़ है. इस आंदोलन की जड़ में कही अफीम तो नही है इसकी भी जांच होनी चाहिए.

अफीम उगाने वाले किसान गरीब हो ये कोई सोच भी नही सकता. फिर क्या असली समस्या है. क्या कांग्रेस इसके पीछे है. हमारे देश की राजनीति बहुत ज्यादा दूषित ही चुकी है और किसान के नाम पर राजनीति कोई आज से नही हो रही बल्कि ये तो प्राचीन समय से विद्यमान है.

किसान की असली समस्या उसकी फसल का सही मूल्य न मिल पाना होता है. गांव में किसान फसल उगाता है. उसके लिए कर्ज लेता है. फिर फसल बड़ी होती है. फसल के काटने से पहले ही फसल का सौदा हो जाता है और साहूकार औने पौने दामो में उसकी फसल खरीद लेते है. किसान की मजबूरी होती है. फसल बेचना क्योंकि उसने कर्ज लिया होता है. इसी तरह वो साल दर साल कर्ज के चंगुल में फंसता चला जाता है. किसान का कर्ज माफ कर भी दे सरकार मगर उसके बाद भी वो वापस कर्ज के चक्कर मे पड़ेगा और फिर वही ढाक के तीन पात.

इसका एक ही उपाय है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा मुनाफा बिचोलिये कमाते है इसीलिए बिचोलिये की भूमिका सरकार को निभानी चाहिए. अभी होता यह है कि किसान को उसकी फसल का पूरा मूल्य नही मिलता ओर आम आदमी को फसल कम दर पर नही मिलती दोनों का मरना है फायदा सर्फ बीच वालो का है.

सरकार को चाहिए कि हरेक पंचायत समिति के स्तर पर खरीद केंद्र शुरू करे ताकि किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और आम आदमी को भी वो फसल उचित दामो पर मिले अभी जो अंतर काफी बड़ा है. किसान और आम आदमी के मूल्य में वो भी घट जाएगा. किसान को उसका मुनाफा मिलेगा तो वो कर्ज नही लेगा और उसका जीवन स्तर बढेगा. वही आम आदमी भी खुश होगा क्योंकि अगर किसान ज्यादा पैसा लेगा तो कीमतें बढ़ेगी और कीमतें बढ़ेगी तो आम आदमी दुखी होगा.

इसका सिर्फ यही एक हल है इससे कालाबाजारी भी रुक जाएगी और जो कई बार किसान सड़क पर अपनी फसल फेंक जाते है उचित मूल्य न मिलने के कारण वो भी बंद हो जाएगा. इस उपाय पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए

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