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किसानों ने हाथ में लिया कानून

सीतामऊ निप्र। शनिवार को किसानो के आंदोलन ने उग्र तेवर अपना लिए। किसानो की भीड ने नारे लगाते हुए नगर की कई होटलो में एकत्र दुध को झपट कर सडक पर बहा दिया जिससे विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई मगर पुलिस प्रशासन निष्क्रिय बना रहा कही पर भी उनकी स्थिति दिखाई नही दी। दुरभाष करने पर पुलिस हरकत में आई तो काफी देर हो चुकी थी इस घटनाक्रम में हजारो रूपये को नुकसान होटल व्यवयाईयो को झेलना पडा।
प्रातः 6 बजे से ही किसानो की भीड एकत्र होने लगी थी दुपहिया वाहनो से किसानो ने नगर के चैतरफा घेराबंदी कर दुध फल सब्जी की आपुर्ति नही होने दी। जहां भी दुध ले जाते देखा सारा दुध सडक पर बहा दिया एवं सब्जीयां भी रोड पर फेक डाली। इसके बाद भीड ने होटलो को निशाना बना कर नारे बाजी करते हुए होटलो की तलाशी लेकर जहां भी खुला या पेकिंग दुध दिखाई दिया उसे सडक पर बहा दिया। जिससे कई जगह विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। भीड ने कृषि उपज मण्डी परिसर का भी घेराव किया। भीड देखकर कोई भी ग्रामीण सब्जी लेकर नही आया। मण्डी परिसर में घोर सन्नाटा छाया हुआ था जबकी यहां आम दिनो में हजारो रूपये की सब्जीया निलाम होती है। किसानो के आक्रोश के चलते नागरिक दुध सब्जी फल के लिए तरस गए इधर-उधर भटकते रहे। होटलो मंें भी उन्हे चाय नसीब नही हो पाई। अंचल के तितरोद, लदुना, खेजडिया, बसई सहित ग्रामीण अंचलो में हडताल का व्यापक असर दिखाई दिया। ग्रामीण सब्जी दुध सब्जी के लिए मोहताज रहे। गांव से भी नुकसानी के समाचार मिले है मुस्लिम समुदाय के रमजान माह के चलते समाजजनो को फल,सब्जी व दुध के लिए भटकना पडा लेकिन हडताल के चलते कही पर भी इनका ये सारे सामान नसीब नही हुए।
प्रशासन के प्रति पनपा जनाक्रोश
होटन व्यवसायियो में किसानो द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर प्रशासन की कथित उदासिनता के प्रति जनाक्रोश देखा गया। राजु पुनवानी सहित कई व्यवसायियो ने बताया कि किसानो की मांगो का समर्थन करते है लेकिन इस प्रकार का नुकशान असहनीय है अपने अपने संसाधनो से दुध एकत्र कर रहे है उनसे तो दुध नही लिया फिर इस प्रकार की हरकत न्यायाचित नही हो सकती है इस मामले में पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता आश्चर्य व क्षोभ का विषय है। किसान मनमानी करते रहे मगर कही भी पुलिस नही दिखाई दी।

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