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किसान गोलीकांड : हर्जाना और नौकरी मिली, न्याय अब तक नहीं

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मंदसौर। किसान आंदोलन की याद में लग रहे राजनीतिक नारे, नेताओं की आमद, किसानों की समस्याएं बताते सवाल कुछ परिवारों के लिए सिर्फ आंदोलन नहीं है। इन सबने कुछ परिवारों के जख्म हरे कर दिए हैं। मंदसौर से सटे छोटे से गांव बड़वन के धाकड़ परिवार के लिए यह किसान आंदोलन अपनों और अपना सब कुछ खोने की बरसी से ज्यादा कुछ नहीं है।

30 वर्ष से भी कम उम्र के किसान घनश्याम की मौत के सालभर बाद उसकी पत्नी रेखा को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। पत्नी-बच्चों के बैंक खातों में सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं, लेकिन यह सब परिजन के चेहरे पर मुस्कराहट नहीं ला सके। रेखा का दो टूक कहना है ‘हमें न्याय नहीं मिला।” घनश्याम की बेटी हिमांशी 14 माह, जबकि बेटा रुद्र 7 साल का है। रेखा के मुताबिक उन्होंने जो खोया, उसकी भरपाई तो हो ही नहीं सकती। दुख इस बात का है कि दोषी खुले घूम रहे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं आई

घनश्याम के पिता दुर्गाप्रसाद और रेखा के मुताबिक घनश्याम की मौत पुलिस की पिटाई से हुई। अपने गांव में धरना दे रहे घनश्याम समेत कुछ लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। ज्यादातर लोग भाग गए लेकिन खेत में छिपा घनश्याम पुलिस के हाथ लग गया। उसे थाने में जमकर पीटा गया। गंभीर घायल होने पर परिवार को खबर किए बगैर उसे इंदौर के एमवाय अस्पताल मे भर्ती करवा दिया गया। दो दिन बाद उसकी मौत की खबर दी गई। दबाव में पोस्टमार्टम तो हुआ पर आज तक न तो उसकी रिपोर्ट आई, न दोषी पुलिसवालों को सजा मिली।

चौक-चौराहों पर पूजे जा रहे मृत किसान

मंदसौर के गावों में किसान आंदोलन की गर्मी बीते साल छह मौतों से निकले आंसुओं में अब भी महसूस की जा रही है। पुलिस की गोलियों और पिटाई से जान गंवाने वाले छह किसान गावों के चौक-चौराहों पर पूजे जा रहे हैं।

जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर बूढ़ा गांव में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की अगुआई में पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम, मेधा पाटकर से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के तमाम नेता भी मृत किसानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। घरों की दीवारों पर मृत किसानों की याद में बैनर लगे हैं।

पास के गांव चिल्लोद पीपल्या के मुख्य चौक पर किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसान कन्हैयालाल पाटीदार की मूर्ति स्थापित कर दी गई है। इसके पीछे लिखा ‘किसान तू रहेगा मौन, तेरी सुनेगा कौन” अंदर की नाराजगी जाहिर करने के लिए काफी है।

गावों में पहुंची अस्थि कलश यात्रा

आंदोलन की बरसी की पूर्व संध्या पर मंगलवार को तमाम गावों में मृत किसानों के अस्थि कलश की यात्रा पहुंची। दिनभर में करीब 10 गावों में कलशों का पूजन किया गया।

नहीं मिली अनुमति

6 जून को राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने मृत किसानों की याद में श्रद्धांजलि सभा का ऐलान किया है। मंगलवार शाम तक इसे प्रशासन से अनुमति नहीं मिली थी। महासंघ के संभागीय अध्य्ाक्ष ने ऐलान किया है कि अनुमति मिले या न मिले, श्रद्धांजलि सभा होगी।

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