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कुर्सी का पांचवा पाया…. व्यंग्य

कुछ लोग होते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से प्रकट नहीं होते हैं लेकिन अपनी उपस्थिति का आभास वे कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में वैसे ही कराते रहते है कि कुर्सी का पांचवा पाया . मेरी बात पर आप यकीन करें या ना करें ये आप कि मर्जी पर निर्भर है पर राज की बात तो यही है कि कुर्सी के चार पायों के अतिरिक्त भी एक और पाया होता है जिसे पांचवा पाया कहा जाता है. यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी कि बिना इस पांचवे पाये के चार पाए वाली कुर्सी मयस्सर नहीं होती. जैसे ये पृथ्वी अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण अंतरिक्ष में टिकी हुई है ठीक उसी तरह इस पांचवे पाये के कारण ही राजनीति में कुर्सी स्थाई हो जाती है.

किसी भी सफलता के पीछे किसी न किसी का हाथ होता है लेकिन राजनीति में कुर्सी कि सलामती में पाए की जरूरत होती है . चार पायों वाली कुर्सी  को स्थिर रखने में इस पांचवे पाए का हाथ होता है. जिन लोगों के पास इस पांचवा पाये तक की पहुंच नही होती वे कुर्सी से दूर ही रहते हैं और यदि उन्हें येन  केन प्रकरेण कुर्सी  मिल भी जाये तो उनकी कुर्सी पर सदा डगमगाने और उसके छीन जाने का खतरा बरकरार रहता है. जिनके पहुँच में यह पांचवा पाया होता है उनकी कुर्सी स्थाई हो जाती है ,फिर इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि सरकार  अपने दल कि हो या विरोधी की . अपने दल कि सरकार होने के बाद भी कुर्सी से वे ही विहीन रहते हैं जिनके पास ये पांचवा पाया पाने की कूबत नही होती . .

राजनीति में कुर्सी को पाने के लिए साम दाम दंड भेद की नीति अपनाई तो जाती है लेकिन कुर्सी पाने के बाद चार पायों से  भारी उस पांचवें पाये को पाने का अपना अलग ही गणित है. गणित से याद आया कि दो और दो चार होते हैं यह हम पढ़ते आए हैं लेकिन चार पायों वाली कुर्सी में पांचवा पैर भी होता है . आज तक इस प्रमेय  को सिद्ध करना बड़ा कठिन ही साबित हुआ है. पांचवे पाए के बारे में अनुसंधान भी किया जा सकता है ,और इस पर बहस भी कि यह पांचवा पाया भौतिक है या अभौतिक, सूक्ष्म है या वृहद, अणु व परमाणु .इसकी कद-काठी आकार प्रकार. भार वजन क्या है ?  मता मतांतर के बाद भी इसकी उपयोगिता बरकरार है. .

अनुसंधानकर्ता अपना अनुसंधान इस बात पर भी कर  सकते हैं कि इस पांचवे पाए को कैसे और किस प्रकार और किस रूप में पाया जा सकता है . इस पांचवे उपाय को कला और विज्ञान के अलावा यदि हम चाहे तो राजनीतिक शास्त्र में अध्ययन के लिए शामिल कर सकते हैं किताबी ज्ञान से परे व्यवहारी ज्ञान में इस पांचवे उपाय की उपयोगिता से कोई भी राजनीतिक दल अथवा राजनेता इनकार नहीं कर सकता है आज जब पूरे विश्व में बदलाव की संस्कृति जोरों पर है और पलक झपकते ही संचार माध्यम अपने नए नए माध्यम से दुनिया को एक कान किए हुए हैं उस वक्त इस पांचवे का अभी तक अपरोक्ष रूप में बने रहना संचार क्रांति के लिए एक चुनौती है .

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