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कोरोना पॉजेटिव मानकर कर दिया अंतिम संस्कार, तीन दिन बाद भी नहीं आई रिपोर्ट

कोरोना के भय से मृतक के रिश्तेदार व परिचित बैठने तक नहीं आए, परिवार से लोग कर रहे छुआछूत, प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे मृतक के परिजन, संदिग्ध पॉजेटिव की मौत होने पर तत्काल सेंपल रिपोर्ट देने की व्यवस्था होना चाहिए

मन्दसौर। कोरोना को लेकर एक के बाद एक प्रशासनिक लापरवाही उजागर हो रही है बावजूद इसके बद-इंतजामियों पर लगाम नहीं कसी जा रही है। 25 अगस्त को सुवासरा के मुजावदिया परिवार में एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने और सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन मंदसौर जिला चिकित्सालय लेकर आए। यहां मरीज को कोरोना पॉजिटिव मानकर इंदौर के लिए रैफर कर दिया गया। रैफर करने से पहले मरीज का सैंपल ले लिया गया था। रास्ते में ही मरीज की मौत हो गई इस पर एंबुलेंस के चालक ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और वापस मंदसौर लेकर आए। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत मृतक को कोरोना पॉजिटिव मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन लापरवाही की हद देखिए की 3 दिन बीत जाने के बाद भी उक्त व्यक्ति के लिए गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है, परिजनों को अब तक पता नहीं है कि उसके परिवार के सदस्य की मौत कोरोना पॉजिटिव होने के कारण हुई या किसी अन्य कारण से। ऐसे मामले जिसमें मरीज में कोरोना के लक्षण दिखाई देते हो और उसकी मौत हो जाए तो उसके सैंपल की रिपोर्ट तत्काल मिल जाए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करना चाहिए। समय पर सैंपल रिपोर्ट मिलने से यह पता चल जाएगा कि व्यक्ति पॉजिटिव था या नेगेटिव, इससे होगा यह की अगर व्यक्ति की मौत कोरोना के कारण नहीं हुई है तो अंतिम संस्कार की रस्म परिवार विधि विधान से कर पाएगा। उस मृतक के रिश्तेदार परिचित सभी अंतिम यात्रा में शामिल हो पाएंगे और उठावने में बैठने भी बिना भय के आ सकेंगे। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से ना तो व्यक्ति के अंतिम संस्कार में उसका परिवार शामिल हो पाता है ना ही कोई रिश्तेदार और परिचित मृतक के परिवार में बैठने जाते हैं क्योंकि उन्हें कोरोना का भय सताता रहता है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ऐसे व्यक्ति जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दिए उनकी मौत होने पर सैंपल रिपोर्ट समय पर नहीं आ रही है जिसका खामियाजा मृतक के परिजनों को एक तरह से सामाजिक बहिष्कार की तरह भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि उस परिवार से न तो कोई पास जाकर बात कर रहा है, ना अपनी संवेदना प्रकट करने जा रहा है,  इस पर जिम्मेदारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। एक तो परिवार में मौत का दुःख उस पर अगर कोरोना पॉजेटिव मानकर रिश्तेदार व परिचित भी ऐसे समय में दूर हो तो उस परिवार का दुख कौन बांटेगा ?

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