Breaking News

क्या आपकी जन्म कुंडली में हैं राजनेता बनने के योग

Hello MDS Android App

प्रिय दर्शकों/मित्रों,राजनीति अगर व्यक्ति को सत्ता-सुख, लोकप्रियता, विशिष्ट सामाजिक पहचान और प्रभावशाली राजनीतिक पद की ओर ले जाती है, तो इसमें सेवा व मानव कल्याण के सर्वश्रेष्ठ भाव भी निहित हैं। इस तरह की असाधारण योग्यता सभी को नहीं मिल पाती है, इस बारे में हर संभव जानकारी व्यक्ति की जन्म कुंडली से लगाई जा सकती है। सीधे तौर पर यह कहें कि किसी भी व्यक्ति में राजयोग उसकी कुंडली में होता है। यानि कि विविध क्षेत्रों में करिअर या कारोबार की तरह ही राजनीति में प्रवेश, सफलता और स्थायित्व के ज्योतिष योग होते हैं। यह सब ग्रहों के विशिष्ट संयोग, योग, दिशा व दशा पर निर्भर करता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की ज्योतिषशास्त्र एक ऐसी विद्या है जो लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को उजागर करने में सक्षम है। कुंडली अध्ययन के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु)के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भी गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।  किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह ‘स्व’ अर्थात स्वयं को सूचित करता है और इस पर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है। जानकारों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के योगों का बड़ा महत्व है। पराशर से लेकर जैमनी तक सभी ने ग्रह योग को ज्योतिष फलदेश का आधार माना है।
वर्तमान में राजनीति केवल समाज सेवा का एक माध्यम न रह कर एक पेशा भी बन चुका है। देश और दुनिया का एक बडा वर्ग सत्तापक्ष या राजनीति से जुडना चाहता है। कुण्डली में कौन सी ग्रहीय स्थिति व्यक्ति को राजनीतिज्ञ बनाती है। जनता की भावनाओं के अनुरूप क्षेत्र में विकास के कार्यांे के साथ-साथ उनमें एकता, भाईचारा, सौहार्द का वातावरण भी निर्मित करते हैं। राजनेता जनता के हृदय में अपना स्थान बनाते हैं तथा उनके हित में विकास कार्य करते हुए शासन में विभिन्न राजपद प्राप्त करते हैं। इसी के कारण आज राजनेता बनना न केवल गौरव व प्रतिष्ठा की बात हो गई है, वरन् इन्हें सम्मानित दृष्टि से भी देखा जा रहा है। कुल मिलाकर आज वैभवशाली, ऐश्वर्य युक्त, शासन में राजपदों से सुशोभित, शासन में प्रतिष्ठित, जिम्मेदारी और जनता के बीच में, जनता केे लोगों द्वारा, हमेशा उच्च सम्मान से जगह-जगह सम्मानित होने के कारण ही राजनेताओं का कद, अब जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला न रह जाकर एक प्रतिष्ठापूर्ण व्यवसाय होता जा रहा है।
जो लोग राजनीति से जुडने की इच्छुक हैं क्या उनकी कुण्डली में कौन-कौन से योग होते हैं जानिए ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री से —
किसी राजनीतिज्ञ की कुण्डली का परीक्षण करने के लिए कुण्डली के कौन-कौन से भाव देखे जाते हैं?
राजनीतिज्ञ बनने या बनाने वाले योगों, ग्रहों या भावों पर चर्चा करने से पहले एक बात स्पष्ट करना चाहूंगा कि राजनीतिज्ञ से हमारा अभिप्राय राजनीति को अच्छी तरह से जानने वालों से है या राजनीति से जुडकर समाज सेवा और देश सेवा करने वालों से है। हो सकता है कि किसी अन्य माध्यम से राजनीतिक लाभ पाने वालों की कुण्डली में ये ग्रहीय स्थितियां उपस्थित न हों। सबसे पहले चर्चा कुण्डली के उन भावों की जो राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं या विचारणीय होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की मुख्यरूप से कुण्डली का छठा, सांतवा, दसवां व ग्यारहवां भाव राजनीति के लिए विचारणीय होते हैं। यद्यपि इनमें से सबसे प्रमुख दशम भाव ही होता है। यदि दशमेश उच्च का हो या दशम भाव में कोई ग्रह उच्च का हो तो सत्ता से जुडना आसान रहता है।
पंडित जी कौन-कौन से ग्रह राजनीतिज्ञ बनाने में अग्रणी माने गए हैं?
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की राजपक्ष, राजसत्ता या राजनीति से जोडने में सूर्य, चन्द्र, मंगल, राहु और शनि मुख्य माने गए हैं लेकिन कुछ मामलों में बृहस्पति की भूमिका भी सामने आती है। क्योंकि वह गुरू है, सही मंत्रणा देता है और मंत्री बनाने में योगदान देता है। लेकिन आधुनिक राजनीति के लिए राहु को सभी ग्रहों की तुलना में अधिक वरीयता देनी चाहिए। आधुनिक सफल राजनेताओं की कुण्डली में राजनीति के भावों यानी कि छठे, सांतवें, दसवें व ग्यारहवें भाव से राहू का सम्बंध देखने को मिल जाता है। सूर्य को राजा तो चन्द्रमा को राजमाता की उपाधि दी गई है अत: यदि दशम भाव में सूर्य उच्च का हो साथ ही राहू का सम्बंध छठे, सांतवें, दसवें व ग्यारहवें भाव से हो तो राजनीति में सफलता मिलती है। वहीं राजमाता चंद्रमा कि लग्न या राशि में जन्में लोगों का सम्बंध राजनीति से सरलता से जुड जाता है।
राजनेता के समर्थक चार ग्रहः –
कुंडली का दसवां घर राजनीति का होता है। यदि किसी की कुंडली के अनुसार दशमेश भाव में उच्च का ग्रह हो तो वह राजनीति में सफल होता है। इसके अतिरिक्त राहू का संबंध छठे, सातवें, दशवें और ग्यारहवें घर से होने पर भी राजनीति में अच्छी सफलता मिलती है। सूर्य, शनि, मंगल और राहू राजनीति के आवश्यक कारक ग्रह हैं। इनमें राहू अगर नीति को प्रदर्शित करता है तो सूर्य साम्राज्य, वर्चश्व, तेज प्रभाव और उपाधि को दर्शाता है। इनके साथ मंगल का मेल उसे लोगों के हितार्थ नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने वाला एवं शनि का साथ लोकहित में दृढ़ता कायम करने वाला होता है। इन दोनों के मेल होने से  व्यक्ति को राजनेता के गुण आ जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की राजनीति में राहू का महत्वपूर्ण स्थान है। इसे सभी ग्रहों में नीतिकारक ग्रह का दर्जा प्राप्त है। राहू के शुभ प्रभाव से ही नीतियों के निर्माण व उन्हें लागू करने की क्षमता व्यक्ति में आती है। राजनीति के घर (दशम भाव) से राहू का संबंध बने तो राजनेता में स्थिति के अनुसार बोलने की योग्यता आती है। सफल राजनेताओं की कुंडली में राहू का संबंध छठे, सातवें, दसवें व ग्यारहवें भाव से देखा गया है। छठे भाव को सेवा का भाव कहते हैं। व्यक्ति में सेवा भाव के लिए इस भाव में दशम या दशमेश का संबंध होना चाहिए।
नौ ग्रहों में सूर्य को राजा माने जाने के कारण यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य प्रभावशाली स्थिति में है, तो वह उच्च पद पर आसीन हो जाता है, लेकिन राहू के प्रभाव का साथ मिलने पर ही उसमें नीतियों के निर्माण की क्षमता और उन्हें लागू कर पाने की योग्यता आती है। इन ग्रहों का प्रभाव नवांश्ज्ञ और दशमाश कुंडली में होने से ऐसी स्थिति बनने के सिलसिले में कोई बाधा नहीं आती है।
राजनेता बनने के योग/अन्य ग्रहीय योगः 
राजनेता बनने और राजनीति को करिअर बनाने के क्रम में सफलता हासिल करने के लिए कुछ दूसरे ग्रहीय योग भी हैं। कुछ मामलों में बृहस्पति की भूमिका अहम् होती है, कारण इससे मिलने वाला सही मार्ग दर्शन और राजनीति का गूढ़ ज्ञान व्यक्ति को मंत्री पद तक दिलवा सकता है। यह कहें कि राजनीति मे सही स्थिति इसी की वजह से मिल पाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की ऐसे राजनेता देश के विकास के महत्वपूर्ण विभाग अर्थव्यवस्था संबंधी वित्त मंत्रालय को संभाल सकते हैं। इसी तरह से जो बुध ग्रह के प्रभाव में होते हैं उन्हें मीडिया संबंधी प्रभार मिल सकता है। अर्थात वे राजनीतिक दल में प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभलते हैं। यानि कि राजनेता बनने में सूर्य, राहू, शनि, मंगल और चंद्रमा प्रमुख हैं तो बुध और बृहस्पति विभाग दिलाने में सहयोगी साबित होते हैं।
जानिए आपके जन्म लग्न अनुसार राजनीती में सफलता के  के योग—
मेष लग्न में प्रथम भाव में सूर्य, दशम में मंगल व शनि व दूसरे भाव में राहू हों तो जनता का हितैषी राजनेता बनेगा।
वृषभ – दशम भाव का राहू राजनीति में प्रवेश दिलाता है। राहू के साथ शुक्र भी हो तो राजनीति में प्रखरता आती है।
मिथुन- शनि नवम में तथा सूर्य, बुध लाभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। राहू सप्तम में तथा सूर्य 4, 7 या 10वें भाव में हो तो प्रखर व्यक्तित्व तथा विरोधियों में धाक जमाने वाला राजनेता बनता है।
कर्क- शनि लग्र में, दशमेश मंगल दूसरे भाव में, राहू छठे भाव में तथा सूर्य बुध पंचम या ग्यारहवें भाव में चंद्रमा से दृष्ट हों तो राजनीति में यश मिलता है।
सिंह- सूर्य,चंद्र, बुध व गुरु धन भाव में हों, मंगल छठे, राहू बारहवें भाव में तथा शनि ग्यारहवें घर में हों तो व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लंबे समय तक शासन में रखता है।
कन्या- दशम भाव में बुध का संबंध सूर्य से हो, राहू, गुरु, शनि लग्र में हों तो व्यक्ति राजनीति में रुचि लेगा।
तुला लग्न-चंद्र, शनि चतुर्थ भाव में हों तो व्यक्ति वाकपटु होता है। सूर्य सप्तम में, गुरु आठवें, शनि नौवें तथा मंगल बुध ग्यारहवें भाव में हों तो राजनीति में अपार सफलता पाता है।
वृश्चिक- लग्रेश मंगल बारहवें भाव में गुरु से दृष्ट, शनि लाभ भाव में, चंद्र-राहू चौथे भाव में, शुक्र सप्तम में तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ शुभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रखर नेता बनता है।
धनु- चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र हों तो जातक तकनीकी सोच के साथ राजनीति करता है। मकर-राहू चौथे भाव में तथा नीचगत बुध उच्चगत शुक्र के साथ तीसरे भाव में हों तो नीचभंग राजयोग से व्यक्ति राजनीति में दक्ष होता है।
कुंभ – लग्र में सूर्य-शुक्र हों तथा दशम में राहू हो तो राहू तथा गुरु की दशा में राजनीति में सफलता मिलती है।
मीन- चंद्र, शनि लग्र में, मंगल ग्यारहवें तथा शुक्र छठे भाव में हों तो शुक्र की दशा में राजनीतिक लाभ तथा श्रेष्ठ धन लाभ होता है।
ये योग उदाहरण मात्र हैं। ऐसे अन्य योग भी संभव हैं।
============================================================
क्या केवल लग्न कुण्डली मात्र से राजनीतिक करिअर का निर्धारण होता है या अन्य वर्ग कुण्डलियां भी इसमें सहायक होती हैं?
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की इस मामलें में लग्न कूण्डली के साथ-साथ कुछ वर्ग कुण्डलियां भी महत्त्व की होती हैं। जैसे कि लग्न कुण्डली में यह देखा जाता है कि दशम भाव अथवा दशम भाव के स्वामी ग्रह का सप्तम से सम्बंध होने पर जातक सफल राजनेता बनता है। क्योंकि सांतवा घर दशम से दशम है इसलिये इसे विशेष रुप से देखा जाता है साथ ही यह भाव राजनैतिक पद दिलाने में सहायक माना गया है। छठवा घर नौकरी या सेवा का घर होता है यदि इस घर का संबंध दशम भाव या दशमेश से होता है तो व्यक्ति जनता की सेवा करते हुए बडा नेता बनता है या नेता बन कर जनता की सेवा करता है। अब यही संकेत वर्ग कुण्डलियां भी दे रहीं हों तो समझों कि व्यक्ति राजनेता जरूर बनेगा। इसमें नवांश और दशमांश नामक वर्ग कुण्डलियां मुख्य रूप से विचारणीय होती हैं। यदि जन्म कुण्डली के राजयोगों के सहायक ग्रहों की स्थिति नवाशं कुण्डली में भी अच्छी हो तो परिणाम की पुष्टि हो जाती है। वहीं दशमाशं कुण्डली को सूक्ष्म अध्ययन के लिये देखा जाता है। यदि लग्न, नवांश और दशमाशं तीनों कुण्डलियों में समान या अच्छे योग हों तो व्यक्ति बडी राजनीतिक उंचाइयां छूता है।
============================================================
कौन-कौन सी ग्रहीय स्थितियां या कारकत्त्व हैं जो राजनीति के क्षेत्र में ले जाते हैं।
(जाने राजनीति मे जाने का योग)…
अन्य ग्रहीय स्थितियों पर चर्चा करने से पहले मैं ज्योतिष की एक खास विधा पर चर्चा करना चाहूंगा। ज्योतिष की एक विधा है जैमिनीपद्धति, उसमें कारकों के आधार पर फलादेश किया जाता है। इन कारकों का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है कि जिस ग्रह की डिग्री सबसे अधिक होती है उसे आत्मकारक कहते हैं। इसके बाद जिसकी डिग्री होती है उसे आमात्य कारक कहते हैं, उसके बाद क्रमश: भ्रातृ, मातृ, पितृ, ज्ञाति और दारा कारक का निर्धारण किया जाता है। हमारे आज के मुद्दे के लिए सबसे जरूरी आमात्य कारक यानी दूसरे नम्बर की डिग्री वाला ग्रह है। यदि सूर्य या राहू आमत्य कारक हों और व्यक्ति की रुचि राजनीति में हो तो यह स्थिति राजनीति के क्षेत्र में सफलता देती है। राहु के आमात्य कारक होने की स्थिति में व्यक्ति नीतियों का निर्माण कर उन्हें लागू करने के योग्य बनता है और स्थिति और परिस्थिति के अनुसार बात करने की योग्यता वाला बनता है। वहीं ग्रहों के राजा सूर्य के आमात्य कारक होने की स्थिति में व्यक्ति को राजनीति या समाज में उच्च पद की प्राप्ति होती है।
===================================================================
क्या कुछ ऐसी खास लग्न या राशियां भी हैं तो राजनेता बनने की संकेतक होती हों? यदि हैं तो उन पर प्रकाश डालें!!
जी बिल्कुल, सबसे पहले में कर्क लग्र की चर्चा करना चाहूंगा। कर्क लग्र में उत्पन्न जातक अधिकांशत: नेतृत्व गुण वाले होते हैं | ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की हमारे देश में शासन करके वाले अधिकांश शासक इसी लग्न या राशि के हुए हैं। इसलिए इस पर थोडा विस्तार से चर्चा करना जरूरी है। कर्कलग्र में प्रथम भाव में गुरु हंस नामक पंचमहापुरुष योग देगा। चतुर्थ भाव में शुक्र मालव्य और शनि शश नामक पंचमहापुरुष योग देगा. सप्तम में शनि शश और मंगल रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा। वहीं दशम में मंगल हो तो भी रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनेगा। यह राजमाता चंद्रमा की राशि है अत: राजघराने में इसका जबरदस्त अधिकार होता है। कर्क लग्न की कुण्डली में दशमेश मंगल दूसरे भाव में हो, शनि लग्न में, राहु छठे भाव में, तथा लग्नेश की दृष्टि के साथ ही सूर्य-बुध पंचम या ग्यारहवें घर में हो तो व्यक्ति बहुत बडा सफल राजनेता बनकर यशस्वी होता है।
भगवान श्रीराम, महात्मा बुद्ध, महाराजा विक्रमादित्य, महाराजा युधिष्ठिर आदि की कर्क लग्न ही मानी गई है। पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, के.आर. नारायणन, श्री इन्द्र कुमार गुजराल, श्रीमती सोनिया गांधी, श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, श्री एच.डी.देवेगौड़ा आदि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जो कर्क लग्न के रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राशि कर्क है।
नेतृ्त्व के लिये सिंह लग्न को भी अच्छा माना गया है। सूर्य, चन्द्र, बुध व गुरु धन भाव में हों व छठे भाव में मंगल, ग्यारहवे घर में शनि, बारहवें घर में राहु व छठे घर में केतु हो तो एसे व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लम्बे समय तक शासन में रखता है। जिसके दौरान उसे लोकप्रियता व वैभव की प्राप्ति होती है। वहीं वृ्श्चिक लग्न की कुण्डली में लग्नेश बारहवे में गुरु से दृ्ष्ट हो शनि लाभ भाव में हो, राहु -चन्द्र चौथे घर में हो, स्वराशि का शुक्र सप्तम में लग्नेश से दृ्ष्ट हो तथा सूर्य ग्यारहवे घर के स्वामी के साथ युति कर शुभ स्थान में हो और साथ ही गुरु की दशम व दूसरे घर पर दृ्ष्टि हो तो व्यक्ति प्रखर व तेज नेता बनता है। सारांश यह कि कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न या चंद्र राशि होने पर राजनीतिक सफलता मिलने की सम्भावनाएं मजबूत होती हैं।
===================================================================
राजयोग की कुंडली कुछ अहम् तथ्यः
कुंडली के अनुसार किसी भी व्यक्ति में निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य हो सकते हैं।
कुंडली के लग्न में सिंह होेने से जहां नेतृत्व क्षमता बढ़ती है, वहीं सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति के धनभाव में होने के साथ-साथ छठे भाव में मंगल, ग्यारहवें में शनि, बारहवें में राहू और छठे में केतु होने से व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है और ऐसा व्यक्ति लंबे समय तक राजनीतिज्ञ की भांति सक्रिय बने रहकर सत्ता-शासन में संलिप्त रहता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की जिस किसी व्यक्ति की कुंडली के अनुसार लग्न वृश्चिक का हो तथा बारहवें में बृहस्पति की दृष्टि से शनि लाभ भाव में बैठा हो, राहु और चंद्रमा चैथे घर में रहे, शुक्र सप्तम में स्वराही बन जाए तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ जा मिले, तो इस तरह की ग्रहीय स्थिति व्यक्ति को तेज प्रभाव वाला नेता बन देता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की कर्क लग्न भी राजनेता के लिए उत्तम माना गया है। जिस किसी की कुंडली के दशमेश मंगल दूसरे भाव में रहे, शनि लग्न में, राहु छठे भाव में तथा लग्नेश की दृष्टि के साथ-साथ सूर्य व बुध पांचवें या ग्यारवें घर में हो, तो उस व्यक्ति को राजनीतिक ख्याति मिलती है।
कर्क लग्न में पैदा होने वाला अधिकतर व्यक्ति नेतृत्व गुणों से संपन्न होता है। भारत मे अधिकतर शासक इस लग्न या राशि के हैं। उनमें मुख्य हैं- पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, इंद्र कुमार गुजराल, श्रीमती सोनिया गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच डी देवेगौड़ा, डा. मनमोहन सिंह आदि।
अधिकतर सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु अन्य ग्रहों की तुलना में श्रेष्ठता लिए होती है। उनके छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में राहु का प्रभाव राजयोग के लिए काफी असरकारी होता है।
ज्योतिष की राजनीतिक गणना के अनुसार सूर्य को अगर राजा तो चंद्रमा को राजमाता कहा गया है। यदि दसवें भाव में सूर्य उच्च का हो और उसके साथ छठे, सातवें, दसवें या ग्यारवें भाव में राहु का संबंध बने तो राजनीतिक सफलता सुनिश्चित है। ठीक उसी तरह चंद्रमा के लग्न या राशि में जन्म लेने वाले का संबंध राजनीति से जाता है।जन्म कुंडली के दसवें घर को राजनीति का घर कहते हैं। सत्ता में भाग लेने के लिए दशमेश और दशम भाव का मजबूत स्थिति में होना आवश्यक है। दशम भाव में उच्च मूल त्रिकोण या स्वराशिस्थ ग्रह के बैठने से व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में बल मिलता है। गुरु नवम भाव में शुभ प्रभाव में स्थित हो और दशम घर व दशमेश का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति राजनीति में सफल होता है। सूर्य राज्य का कारक ग्रह है अत: यदि यह दशम भाव में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो और राहू छठे, दशवें व ग्यारहवें भाव से संबंध बनाए तो राजनीति में सफलता की प्रबल संभावना बनती है। इस योग में वाणी के कारक ग्रह का प्रभाव आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की शनि दशम भाव में हो या दशमेश से संबंध बनाए और इसी दशम भाव में मंगल भी स्थित हो तो व्यक्ति समाज के लोगों के हितों के लिए राजनीति में आता है। शनि और मंगल का संबंध व्यक्ति को राजनेता बनने के गुण प्रदान करेगा और समाज में मान-सम्मान तथा उच्च पद की प्राप्ति होती है।
वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में राजयोग होता है। किसी में यह अल्प समय, यानि दो-तीन या पांच-छह सालों के लिए आता है, तो किसी के लिए यह ताउम्र बना रहता है। इस संदर्भ में भाग्य को दर्शाने वाला नवम् भाव भी काफी महत्वपूर्ण होता है। इसमें बना रहने वाला राजयोग जीवनभर प्रभावी बना रहता है।
कुंडली में नवम् भाव के ग्रह जब कर्म को दर्शाने वाले दसवें भाव के ग्रह के साथ आपस में मिल जाते हैं तब राजयोग बनता है। इन दोनों भावों के ग्रहों का संबंध जितना गहरा होता है, व्यक्ति को उतना अधिक राजयोग का लाभ मिलता है। किसी भी मंत्री, कुशल राजनेता या बड़ा राजनीतिक पद पर पहुंचने वाले को इस योग का स्वाभाविक लाभ मिलता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री का  कहना है कि राजनीतिक बनने के ज्योतिषीय कारण उपरोक्त दर्शाये गये योगों के अतिरिक्त एक सफल राजनेता बनने के लिए वैसे तो समस्त नौ ग्रहों का शक्तिशाली होना अनिवार्य है, किंतु फिर भी सूर्य, मंगल, गुरु और राहु में चार ग्रह मुख्य रूप से राजनीति में सफलता प्रदान करने में सशक्त भूमिका अदा करते हैं साथ ही चंद्रमा का शुभ व पक्ष बली होना भी आवश्यक है। इसमें संदेह नहीं कि सूर्य ग्रह होने के साथ ही साथ मंगल से कुशल नेतृत्व तथा पराक्रम की प्राप्ति होती है। गुरु पारदर्शी, निर्णय क्षमता एवं ज्ञान-शक्ति प्रदान करता है तथा राहु को ज्योतिष में शक्ति, साहस, शौर्य, पराक्रम, छल-कपट और राजनीति का कारक माना गया है। अतएव कुंडली में यदि ये चारों ग्रह शक्तिशाली एवं शुभ स्थिति में होंगे, तो ये एक सशक्त, प्रभावी, कर्मठ, जुझारू तथा प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की बुनियाद पर एक सम्पूर्ण सरल एवं सशक्त राजनेता रूपी भवन का निर्माण करेंगे जिस पर राष्ट्र हमेशा गौरवान्वित रहेगा।
================================================================
राजनेता बनने के योग/राजनीतिक सफलता के उपायः
राजनीति में सफल होने के लिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहों की स्थिति को ठीक करना अर्थात अपने पक्ष में बनाना ही मुख्य उपाय हो सकता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया की इस सिलसिले में नौवें और  दसवें भाव वाले ग्रहों की स्थितियों को सही कर दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदला जाता है। राजनीती में सफलता हेतु माँ बगलामुखी का अनुष्ठान, गणपति अथर्वशीर्ष का अनुष्ठान और राहु का अनुष्ठान आदि तुरंत परिणाम देते हैं | इस हेतु योग्य,विद्वान एवं अनुभवी आचार्य/पंडित से संपर्क करना चाहिए जो आपकी जन्म कुंडली अनुसार निर्णय लेकर आपको चुनाव में टिकिट दिलवा पाएं और चुनाव जितवा पाएं |
 इसके लिए नीचे दिए गए मंत्र का जाप महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मंत्र हैः-
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि में परम सुखं,
धनं देहि, रूपम देहि यशो देहि द्विषो जहि।
इस मंत्र का जाप 21 दिनों तक प्रतिदिन 108 बार प्रातः ईष्टदेव की पूजा के बाद करने से आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा का एहसास होगा। यह मंत्र सुख और ऐश्वर्य बढ़ाने वाला है।
—-राजनीति में सफलता पाने के लिए लाल कपड़े में 21 चूड़ियां, सिंदूर, दो जोड़ी चांदी की बिछिया, पांच उडहुल के फूल, 42 लौंग, 7 कपूर की टिकिया और सुगंध की शीशी बांधकर देवी के चरणों में अर्पित करें। यह मनोवांछित राजनीतिज्ञ के तौर पर लाभ के लिए सटीक उपाय है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *