Breaking News

क्या किसानों को जान से मार देना ही आखरी विकल्प था ?

Story Highlights

  • सरकार के चाल, चरित्र और चेहरे को गांव-गांव में उजागर करेगा अफीम काश्तकार संघ

मन्दसौर। अन्नदाताओं को झूठे केस में फंसाने का काम प्रशासन ने किया। युवाओं को बेवजह घर से निकालकर पीटा और बिना किसी लिखापढ़ी के नाम मात्र के कागज पर हस्ताक्षर करवाकर लावारिश की तरह छोड़ दिया, उन पुलिसकर्मियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। रिछालालमुहां, गुर्जरबर्डिया, दलौदा रेल, आकोदड़ा, राकोदा, दलौदा सगरा, सेमलिया हीरा, नंदावता, बनी, गरोड़ा, पटेला, लालाखेड़ा के अनेक युवाओं को के साथ बुरी तरह मारपीट की गई, आज भी इन युवाओं में भय व्याप्त है। क्या इस देश में अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष करना पाप है, क्या गांधीवादी तरीके से बाहर से समर्थन देना पाप था ? क्या किसानों को गुंडे-बदमाश समझकर जान से मार देना ही आखरी विकल्प था। हिंसक लोगों को चिन्हित कर दण्ड देना जायज है परन्तु निर्दोष लोगों को बेवजह पीटना कहा का न्याय है ? अफीम काश्तकार संगठन इस प्रकार प्रशासन की कार्यवाही की घोर निंदा करता है।
उक्त आरोप लगाते हुए अफीम काश्तकार संगठन के संयोजक अमृतराम पाटीदार, युवा संगठन प्रभारी योगेन्द्र जोशी, उपाध्यक्ष रामेश्वर आर्य, महासचिव खूबचंद शर्मा, सचिव तुलसीराम माली एवं अशोक जैन बासखड़ी ने बताया कि किसानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जावेगा। किसानों से संवाद करने के लिये सांसद, विधायक या अन्य कोई भी जनप्रतिनिधि किसानों तक नहीं पहुंचे। यदि पहुंच जाते और समझाईश व आश्वासनों का दौर चलता तो इतनी बड़ी घटना घटित नहीं होती। जनप्रतिनिधियों का किसानों से कोई सरोकार नहीं है। किसानों के साथ सिर्फ वोटों की राजनीति खेली जाती है। आज विडंबना है कि देश का पेट भरने वाले अन्नदाता अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रहा है और सत्ता में बैठे लोग उन पर गोलियां दाग रहे है और फिर लाशों की बोलिया लगा रहे है जो अन्याय की पराकाष्ठा है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है। शासन के चाल, चरित्र और चेहरे को किसान गांव-गांव में उजागर करेंगे और जनप्रतिनिधियों के समक्ष सवाल उठाये जायेंगे।
अफीम काश्तकार संगठन अफीम काश्तकारों की प्रमुख छः मांगों के साथ-साथ निम्न मांगों का भी पूर्णरूपेण समर्थन करती है जो इस प्रकार है- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशे लागु की जावे, अपनी उपज की लागत मूल्य के आधार पर भाव निर्धारित किया जावे और उन्हें वादे के अनुरूप डेढ़ गुना लाभ से मूल्य दिया जावे, किसानों के कर्जे माफ किये जावे और बेकसुर निर्दोष किसानों के उपर जो झूठे मुकदमे दायर किये है उन्हें बिना शर्त वापस लिये जावे। अन्यथा जल्द ही अफीम काश्तकार संगठन किसानों के साथ गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts