Breaking News

क्या तलाक एक सामाजिक दुर्घटना है?

विवाह बाद तलाक होने पर जिंदगी समाप्त नहीं होती. तलाक लेना घुटन, गालीगलौच, शक, आर्थिक संकट से भरी जिंदगी से ज्यादा अच्छा है, चाहे बच्चे हों या न हों. तलाक एक अंतिम उपाय है पर यह जीवन का अंत नहीं है. तलाकशुदा पुरुष या स्त्री को न तो संदेह की दृष्टि से देखा जाना चाहिए और न ही दया का पात्र बनाना चाहिए. तलाक एक सामाजिक, पारिवारिक दुर्घटना है, एक गंभीर बीमारी है, एक सौदे में घाटा होना है और जीवन की मांग है कि उस के बाद हाथ झाड़ो और फिर नए सिरे से जिंदगी को खोजो.

करिश्मा कपूर ने अभिनेत्री के रूप में खूब नाम कमाया, पैसा भी कमाया होगा और इसलिए जब उन का 2003 में संजय कपूर से विवाह हुआ तो संजय से लोगों को ईर्ष्या हुई होगी कि ऐसी ट्रौफीनुमा पत्नी मिली. पर अफसोस दोनों का विवाह 2 बच्चे होने के बावजूद चल न सका और 6 साल तक अदालती मुकदमों के बाद दोनों का 2016 में तलाक हो गया. अब संजय कपूर फिर विवाह कर रहे हैं. मजेदार बात यह है कि यह संजय की तीसरी शादी होगी और होने वाली पत्नी प्रिया की दूसरी. प्रिया का पहला विवाह अमेरिका के एक अमीर भारतीय होटल मालिक से हुआ था. यानी विवाह और तलाक जीवन को समाप्त नहीं करते. ये जीवन जीने के तरीके हैं और इन को आसानी से ढालना सीखना चाहिए. आज से 75 साल पहले जब तलाक कम होते थे तब भी लड़कियां पति का घर छोड़ कर मायके आ बैठती थीं, चाहे उन्हें तलाक न मिला हो.

1956 के हिंदू विवाह कानून के पहले पति को दूसरा विवाह करने की कानूनी व सामाजिक इजाजत थी पर औरतों को सामाजिक इजाजत बिलकुल न थी. मुसलिम औरतों को तलाक के बाद फिर विवाह करने की सामाजिक आजादी भी थी. तलाक के बाद विवाह कर लेने का अर्थ है कि सिर्फ दोस्ती से काम नहीं चलता और संबंध को कोई कानूनी आवरण तो चाहिए ही ताकि दोनों एकदूसरे के प्रति जिम्मेदार हो सकें. कानूनों की भरमार ऐसी है कि स्त्री व पुरुष यदि चाहें तो भी लंबे समय तक साथ नहीं रह सकते. इसलिए तलाक के बाद विवाह हो तो अच्छा ही है और उसे सामाजिक जबरदस्ती नहीं, व्यक्तिगत पसंद और फैसला समझा जाना चाहिए.

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts