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क्या बोले विधायक महोदय जलाभिषेक के बारे भी…

भगवान श्री पशुपतिनाथ के श्रावण में गर्भगृह में जलाभिषेक के संबंध में श्री सिसौदिया ने कहा कि सोमनाथ से लेकर औंकारेश्वर, महाकाल उज्जैन आदि शिव मंदिरों में लिंग होते हुए भी गर्भगृह में जाकर पुजारी के अतिरिक्त अन्य किसी को जलाभिषेक की अनुमति नहीं है और इसका कोई बुरा भी नहीं मानता और न किसी ने विरोध ही किया है। शिव मंदिरों के अलावा गोरधननाथ, द्वारकानाथ, जगन्नाथ, बद्रीनाथ जैसे वैष्णव मंदिरों के गर्भगृह में जाकर पूजा करने का विधान केवल पुजारी को ही होता है तो ऐसी स्थिति में यदि भगवान पशुपतिनाथ जो कि मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठापित है और क्षण की समस्या आने पर प्रबंध समिति द्वारा सर्वानुमति से बाहर से जलाभिषेक की जो व्यवस्था की है और सबने सहर्ष स्वीकार किया है। जगद्गुरू शंकराचार्य दिव्यानंदजी तक ने इसे सही ठहराया है तो फिर इसका विरोध क्यों होना चाहिये? मंचासीन सभी संतों ने भी श्री सिसौदिया का समर्थन करते हुए कहा कि जहां केवल शिवलिंग हो सब जलाभिषेक कर सकते है परन्तु मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठित होने पर मूर्ति को स्पर्श करने, पूजा-अभिषेक का अधिकार केवल नियुक्त पुजारी को ही होता है।

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