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क्या यही कर रही है नगरपालिका !

अशोक संचेती की कलाम से ; “एक शिक्षक ने छात्र से पूछ कि क्या आप वाक्य में प्रयोग करना जानते हो, छात्र ने कहा जी हां सर जानता हूं, सर ने कहा ..” किए कराए पर पानी फेर देना इसका वाक्यों में प्रयोग कीजिए….”
छात्र ने बड़ा विचित्र जवाब दिया.. वाक्य का अर्थ.. जो कुछ किया उसे नष्ट कर देना… और वाक्य में प्रयोग…. छात्रं ने कहा.. मैं सवेरे सवेरे संडास गया… वहां मैंने जो कुछ भी किया… फ्लैश चलाकर बहा दिया… यानी किए कराए पर पानी फेर दिया…
मंदसोर की नगरपालिका भी उसी पैटर्न पर कार्य कर रही है, नगर पालिका अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में 10 बार सड़कें बनाती है और 10 बार ही उसे खोद देती है…. यानी किए कराए पर पानी फेर देती है…..
यही कारण है की मंदसौर की नगर पालिका नगर में पर्याप्त विकास नहीं कर पाती है…. महाराणा प्रताप बस स्टैंड से पशुपतिनाथ को जोड़ने वाली सड़क और पुल के बीच एक मकान व्यवधान बन रहा है 3 वर्ष बीत गए नगर पालिका वह व्यवधान दूर नहीं कर पाई… इस बीच वस्तुओं के दाम दोगुना हो गए और विकास अभी भी अवरुद्ध है उसे पूरा करने के लिए अब दुगने पर से खर्च करना होंगे जो जनता के द्वारा दिए गए टैक्स से नगरपालिका ने अर्जित किए हैं….
नगर पालिका को एक अध्ययन इंदौर भेजना चाहिए वहां किस गति से विकास हो रहा है उसका दिन किया जाना चाहिए वहां विकास का कार्य निरंतर चलता है और किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव वहां का नगर निगम सहन नहीं करता… वहां की जनता भी विकास में बराबरी की सहभागी बनती है, मैं अभी इंदौर गया था मैंने वहां देखा… एरोड्रम रोड पर सैकड़ों मकान बुलडोजर द्वारा तोड़ दिए गए…. मैंने मेरे सहयात्री से पूछा यह सब क्या हो रहा है? तो मेरे सहयात्री ने बताया कि यह रोड को चौड़ा करने के लिए सब कुछ किया जा रहा है… 30 फीट के रोड को 120 फीट में तब्दील कर देना कोई आसान काम नहीं है लेकिन वहां की नगर निगम ने यह सब कुछ कर दिखाया और आश्चर्य की बात यह कि कोई जनविरोध नहीं कोई राजनीतिक दबाव नहीं और कार्य में कोई पक्षपात नहीं विकास के नाम पर वहां सारे राजनीतिक दल एक हैं फिर यह मंदसौर में कैसे संभव नहीं यह एक यक्ष प्रश्न है जो नगर की जनता नगर पालिका अध्यक्ष से पूछना चाहती है…
मुझे आश्चर्य तब हुआ जब मैंने इंदौर में देखा कि रात को 2:00 बजे सड़कों को मशीन के द्वारा धोया जा रहा है दूसरी मशीन सड़कों पर पोछा लगा रही है… मैंने अपने सहयात्री से पूछा कि क्या यहां नियमित रूप से सड़क पर पहुंचे लगाए जाते हैं और सड़कों की धुलाई होती है तो उसका उत्तर हां मैं था……
“जब कार्य करने का जज्बा एक जुनून बन जाता है तब वह नगर विकास के नाम पर खुशहाल दिखलाई पड़ता है..” तब वह नगर स्वर्ण पदक प्राप्त करने का हकदार बनता है….
मुझे तो यहां यहां के एक पार्षद प्रतिनिधि की हिम्मत की दाद देना पड़ेगी, कि वह भाजपा का पार्षद होते हुए भी कहता है ,की स्वच्छता अभियान मोदी जी का है मोदी जी से कहो वही सफाई करेंगे.. जब रूलिंग पार्टी के पार्षद प्रतिनिधि इस प्रकार की बकवास बात करते है, तो बड़ा आश्चर्य होता है कैसे जेल लेते हैं नगर पालिका अध्यक्ष ऐसे ही पार्षदों को और ऐसे पार्षद प्रतिनिधियों को….

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