Breaking News

क्या 10 साल बाद फिर प्रबंधन, पशुपतिनाथ मूर्ति क्षरण रोकने मे कामयाब होगा?

मंदसौर। विश्वप्रसिद्घ भगवान अष्टमुखी पशुपतिनाथ की मूर्ति का क्षरण बढ़ रहा है। प्रतिमा में दरार भी ऊपर से नीचे की ओर बढ़ रही है। साथ ही नीचे के मुख भी क्षरण होने से खराब हो रहे हैं। आखिरकार अब 10 साल बाद एक बार फिर मूर्ति का क्षरण रोकने की कवायद शुरू होगी। कलेक्टर श्रीवास्तव ने क्षरण रोकने के लिए 25 अक्टूबर को पशुपतिनाथ सभागृह में वृद्घ बैठक बुलाई है। इसमें जनप्रतिनिधि, आरती मंडल, सामाजिक संगठनों के सदस्य, संतों सहित शहर की जनता को बुलावे दिए जा रहे हैं। बैठक में प्रतिमा क्षरण रोकने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लेकर कड़ाई से पालन करवाने की बात भी जिम्मेदारों द्वारा कही जा रही है।

भगवान पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति का क्षरण रोकने के लिए समय-समय पर समिति की बैठक में विचार कर कई निर्णय भी लिए गए। मंदिर में चल रही राजनीति के कारण आज तक निर्णय धरातल पर अमल में नहीं लाए जा सके हैं। अब कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने प्रतिमा क्षरण को गंभीर मामला बताते हुए क्षरण रोकने की कवायद प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर ने क्षरण रोकने के लिए 25 अक्टूबर को शाम 6 बजे मंदिर सभागृह में बैठक आयोजित की है। इसके लिए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव पंफलेट पर संदेश पत्र के साथ लोगों को बैठक के लिए आमंत्रित भी कर रहे हैं। संदेश पत्र में कलेक्टर ने भी माना है कि क्षरण को लेकर पूर्व में कई निर्णय तो लिए, लेकिन दुर्भाग्य से उनका पालन नहीं हुआ है।

कलेक्टर ने यह भी कहा संदेश पत्र में

स्वामी प्रत्यक्षानंद के सान्निध्य में वर्ष 1961 में मंदिर निर्माण और प्रतिमा की स्थापना हुई। स्थापना के बाद से श्रद्घालु जल चढ़ाने के अलावा दूध, दही, शकर, घी आदि पंचामृत से भगवान का निरंतर अभिषेक करते हैं। अभिषेक में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की रासायनिक क्रिया से क्षरण की प्रक्रिया में तेजी आई हैं। मंदिर के सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग से देखा जा सकता है कि कई श्रद्घालु तो रैलिंग पर चढ़कर प्रतिमा पर पूरा वजन डालकर उक्त कार्य कर रहे हैं। भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी मूर्ति में भगवान शिव की विभिन्न भाव-भंगिमाएं और अवस्थाएं अंकित की गई हैं। यह प्रतिमा अगर घिसती है या क्षरित होती है तो प्रतिमा का मूल स्वरूप ही नष्ट हो जाएगा।

इनका ये कहना है 

भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति हार्ड फिलिशियस सैंड स्टोन (बालू काश्म) से बनी है। पत्थर में कलर वैरिएशन के कारण धारियां बनी हुई हैं। सफेद धारिया क्वार्ड और केलसाइड से मिलकर बनी है। जब इस पर पानी गिरता है तो वह क्षरित होती है। पानी जितना ज्यादा एसिडिक होगा, मूर्ति का क्षरण उतना ज्यादा होगा। इसके लिए करीब डेढ़ साल पहले प्रबंध समिति की बैठक में मूर्ति पर ग्लास कोटिंग करवाने का निर्णय लिया था। ग्लास कोटिंग (पॉलिश) से कुछ समय के लिए प्रतिमा के क्षरण को रोका जा सकता है। पानी और दही का उपयोग कम होने पर कोटिंग लंबे समय तक क्षरण को रोक सकती है। जल्द ही मूर्ति के लिए उपाय नहीं किए गए तो मामला गंभीर हो सकता है। -डॉ. विनिता कुलश्रेष्ठ, भूगर्भ विशेषज्ञ।

पशुपतिनाथ की मूर्ति का क्षरण गंभीर विषय है। आने वाली पीढ़ी पशुपतिनाथ महादेव की पूजा कर सके, इसके लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है। दुर्भाग्य से पूर्व में लिए गए निर्णयों पर अमल नहीं हो पाया है। अब लोगों को शामिल कर क्षरण रोकने के उपाय किए जाएंगे। इसके लिए 25 अक्टूबर को मंदिर हॉल में बैठक होगी। इसमें सभी भक्त शामिल होकर सुझाव दे सकते हैं। बैठक में जो भी निर्णय लिए जाएंगे, उनका सख्ती से पालन कराएंगे। -ओपी श्रीवास्तव, कलेक्टर एवं अध्यक्ष श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति।

बैठक में इन बिंदुओं पर हो सकती है चर्चा

– गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध

– जलाभिषेक पर प्रतिबंध

– अभिषेक और पूजा के लिए केवल पुजारियों को अधिकृत किया जा सकता है।

– विशेष आयोजनों पर अभिषेक की मिल सकती है छूट।

– प्रतिमा को क्षरण से बचाने के लिए वज्र लेप करवाने पर होगी चर्चा।

– धर्मप्रेमियों से लिए जाएंगे सुझाव।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts