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खाद्य और अखाद्य बर्फ में नहीं पड़ रहा फर्क मालूम 

सक्रिय खाद्य विभाग ने नहीं कि बर्फ को लेकर कार्यवाही

मंदसौर। इन दिनों देखने में आ रहा हैं कि जिले का खाद्य एवं औषधि विभाग खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश जमरा के नेतृत्व में लगातार कार्यवाही कर आम जन को अच्छे से अच्छा खाद्य पदार्थ मिले इसका प्रयास कर रहा है। लेकिन इस बार गर्मी का मौसम प्रारंभ होने के दो माह के बाद भी विभाग द्वारा बर्फ फैक्ट्रीयों पर कोई कार्यवाही या निरीक्षण नहीं किया गया है। गर्मी के मौसम में बर्फ की खपत बढ़ जाती है। वहीं बर्फ का उपयोग दो तरहों से किया जाता है। एक तो किसी खाद्य वस्तु को ठण्डा करने में और दूसरा बर्फ खाने में। विसंगति यह हैं कि खाद्य एवं अखाद्य बर्फ में अंतर कैसे मालूम हो इसके लिए इस बार कोई प्रयास विभाग द्वारा नहीं किए गए है। कई दुकानदार या फैक्ट्री संचालक अखाद्य बर्फ को ही खाद्य बताकर ग्राहकों को बेच देते है जिसका खाने के स्वास्थ्य पर दूषित प्रभाव पड़ता है।

यह है मानक

अखाद्य बर्फ तो किसी भी पानी से बनाया जा सकता है क्योंकि इसका उपयोग खाने के लिए नहीं किया जाता है। वहीं खाद्य बर्फ बनाने के लिए कई नियम बनाए गए है। खाद्य बर्फ का निर्माण आरओ के पानी से ही किया जाना चाहिए। लेकिन नगर में कम ही निर्माणकर्ता मानकों पर खरे उतर रहे है।
पीछले वर्ष किया था अलग – अलग रंगखाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पिछले वर्ष इस मामले में कार्यवाही करते हुए खाद्य बर्फ का रंग सफेद और अखाद्य बर्फ कर रंग नीला रखने के निर्दश अधिकारियों द्वारा दिए गए थे। जिसका पालन भी फैक्ट्री संचालकों द्वारा किया गया था। लेकिन इस बार इस वर्ष ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्लेखनीय हैं कि विगत दिनों नीमच में खाद्य विभाग द्वारा इस मामले में कार्यवाही की गई थी। वहां पर भी खाद्य बर्फ सफेद और अखाद्य बर्फ नीले रंग में मिल रहा है। जिससे उपभोक्ता को खाद्य एवं अखाद्य बर्फ में अंतर मालूम पड़ जाता है।

मंदसौर में भी होगी कार्यवाही बर्फ को लेकर हमने मल्हारगढ़ में कार्यवाही कर चुके है। जल्द ही मंदसौर नगर में भी बर्फ बनाने वाली संस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा और यदि अनियमितता पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। – कमलेश जमरा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, मंदसौर

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