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खुद को महाराज बताने वाला रामलक्ष्मण सिंह जिलाबदर

खुद को रतलाम रियासत का महाराज बताने वाला सीतामऊ के पतलासी निवासी रामलक्ष्मणसिंह को मारपीट व छेड़छाड़ के मामलों के चलते जिलाबदर कर दिया है। आदेश कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह ने सीतामऊ पुलिस के प्रतिवेदन पर 6 अप्रैल को जारी किया। एक दशक से अधिक समय से विवादों में घिरे रामलक्ष्मणसिंह पिता शिवराजसिंह राठौर पहले रतलाम के महाराजा बनने को लेकर तथा इसके बाद पतलासी के समीप स्थापित सोलर प्लांट की जमीन को लेकर चर्चा में रहे। सीतामऊ टीआई गोपाल सूर्यवंशी ने बताया रामलक्ष्मणसिंह पर जिलाबदर की कार्रवाई की है। उस पर 1 छेड़छाड़ व 7 मारपीट के केस दर्ज हैं।

मंदिर में पूजा की ली अनुमति, फिर करा लिया राजतिलक
नटनागर शोध संस्थान सीतामऊ के निदेशक डॉ. मनोहरसिंह राणावत ने बताया रामलक्ष्मणसिंह खुद को रतलाम का राजा बताता है। वह सीतामऊ के पास पतलासी का रहने वाला है और राठौर है। रतलाम के अंतिम राजा लोकेंद्रसिंह थे जिनका 1991 में निधन हो गया तथा 1997 में उनकी प|ी का निधन हो गया। लोकेंद्रसिंह की कोई संतान नहीं थी और ना ही उन्होंने किसी को गोद लिया था। 2002 या 2003 में रामलक्ष्मणसिंह ने किले में स्थित मंदिर की पूजा के लिए तत्कालीन कलेक्टर से अनुमति ली थी। इसके बाद सीतामऊ से कुछ लोगों को ले जाकर राजतिलक करवा लिया। रामलक्ष्मण पर उदयपुर में भी एक छेड़छाड़ का केस दर्ज है।

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