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गांधीसागर बांध में बनती है 115 मेगावाट बिजली

जिले में वर्तमान में हवा से बिजली बनाने वाले 15 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनसे 379.5 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। 2017 में 18 नए प्रोजेक्ट से 1040.4 मेगावाट उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके बाद जिले में हवा से बिजली उत्पादन की क्षमता 1419.9 मेगावाट हो जाएगी। 50किलोवाट बिजली अभी रोज शहर में खप रही है। इस तरह जिले में उत्पादित बिजली से शहर में 38480 दिन बिजली प्रदाय कर सकते हैं। 500किलोवाट बिजली जिले में रोज खप रही है। जिले में 3848 दिन आपूर्ति कर सकते हैं।

इस तरह से बढ़ेगा बिजली का उत्पादन

स्त्रोत वर्तमान 2017 में कुल

हवा 379.5 1040.4 1419.9

सूरज 122 268 390

पानी 115 00 115

(बिजली उत्पादन मेगावाट)

2017में जिले में बिजली उत्पादन की क्षमता 1924.9 मेगावाट हो जाएगी। इसे किलोवाट में कहें तो 19 लाख 24900 यूनिट होती है। जिले में सोलर पावर के वर्तमान में आठ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। क्षमता 122 मेगावाट है। 2017 में 250 मेगावाट के एनटीपीसी प्रोजेक्ट सहित 4 नए प्रोजेक्ट बिजली का उत्पादन शुरू कर देंगे। इससे जिले की क्षमता 390 मेगावाट बिजली उत्पादन की हो जाएगी। साल 1950 में स्थापित गांधीसागर जल विद्युत गृह की क्षमता 115 मेगावाट की है। रेवास-देवड़ा की पहाड़ी पर लगे पवन ऊर्जा के संयंत्र। इनसे वर्तमान में 379.5 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। नए साल में 1040.4 मेगावाट उत्पादन होगा।

मंदसौर जैसा प्रदेश में कोई जिला नहीं
जहां तक मेरी जानकारी है प्रदेश में ऐसा और कोई जिला नहीं है जिसमें तीन तत्वों से बिजली बनाई जाती है। मंदसौर जिले में गांधीसागर बांध होने के कारण पानी से बिजली उत्पादन का अलग से लाभ मिल रहा है। इसके अलावा विंड व सौर ऊर्जा को लेकर भी काफी संभावनाएं हैं। एनटीपीसी भी सौर ऊर्जा का प्लांट सुवासरा में स्थापित कर रहा है। विंड में भी जिले में और कंपनियां आ रही हैं। हिमांशु जोशी, कार्यपालन यंत्री, नवकरणीय ऊर्जा विभाग भोपाल

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