Breaking News

गांधी चौराहा बना खेल मैदान, छात्रों ने खेला फुटबाल मैच

आज उठेंगा प्रभारी मंत्री के सामने मामला

मंदसौर। उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में स्थित खेल मैदान पर बनाए जा रहे। छात्रावास को लेकर नगर में हो रहे विरोध के तहत सोमवार को गांधी चौराहे पर छात्रों और खिलाडि़यों ने फुटबाल का मैच खेलकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन कर यह जताने का प्रयास किया कि वह अपनी हटधर्मिता छोड़ विद्यालय के खेल मैदान को खेलों के निलए सुरक्षित रहने दे व छात्रावास के लिए अन्यत्र स्थान का चयन करें।

खेल परिसर में बनने वाले छात्रावास का विरोध नगर के सभी दलों के साथ विभिन्न खेल संगठन निरंतर कर रहे है। ताकि नगर के मध्य यह एक मात्र खेल मैदान सुरक्षित रह सके। हालांकि वर्तमान में भारी विरोध के चलते छात्रावास के निर्माण का कार्य रूक जरूर गया है। लेकिन प्रशासन का कहना हैं कि विद्यालय परिसर में छात्रावास बनाने का निर्णय शासन का ही है और शासन ही इसमें परिवर्तन कर सकता है।

खेल मैदान को नष्ट कर छात्रावास बनाने का मामले आज प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा के सामने उठेगा ही जो आज मंदसौर प्रवास पर आ रहे है।

नगर की ऐतिहासिक प्राचीन प्रतिष्ठित धरोहर उत्कृष्ट विद्यालय के क्रीड़ा प्रशाल को क्रीड़ा प्रशाल ही रहने देना चाहिए

सामाजिक कार्यकर्ता बंशीलाल टांक ने कहा कि नगर की ऐतिहासिक-धार्मिक-प्राचीन पहचान-प्रतिष्ठा की धरोहर उत्कृष्ट विद्यालय मंदसौर के खेल मैदान को बिना काट-छांट (सीमित-छोटे किये बिना) मूल स्वरूप में पूर्ववत सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस खेल मैदान को सीमित करने से पहले हमें इसके उस ऐतिहासिक आध्यात्मिक महत्व को भी नहीं भुलना चाहिये कि वर्ष 1961 में भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतिष्ठापना से पूर्व और बाद में भी कई वर्षों तक यहां श्रावण मास में प्रतिवर्ष, प्रति सोमवार मेला आयोजित होता रहा है। जिसे बारा पत्थर मेले के नाम से जाना जाता था और तब मेले मेें नगरवासी सम्मिलित होकर आनन्द लेते थे तब इस मैदान को 1947 में आजादी के 14 वर्ष पूर्व 1933 में निर्मित भवन हाईस्कूल के मैदान के नाम से (मूल रूप में आज भी भवन पर अंकित है) जाना जाता था। उस समय एक ही स्कूल था परन्तु वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री उत्कृष्ट उ.मा. विद्यालय के साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल उ.मा.वि. भी यहां स्थित है और इस प्रकार दो शिक्षण संस्थाओं का यही एक मात्र खेल मैदान है। हॉकी, फूटबाल, व्हालीवाल आदि अन्य कई खेलों के लिये यह मैदान विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है जहां से जहां से राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय खिलाडियों ने इस नगर को प्रतिष्ठा दिलाई है। खेल मैदान परिसर के मुख्य द्वार पर जब लाल बहादुर शास्त्री उ.मा.विद्यालय क्रीड़ा प्रशाल स्पष्ट अंकित और मान्य है तो इस क्रीड़ा प्रशाल को क्रीड़ा प्रशाल ही रहने देना चाहिए।

वर्तमान जिला प्रशासन पर निर्माण के संबंध में जो दबाव बनाया गया। पहले यह दबाव म.प्र. शासन पर बनाया जाना चाहिये जहां से होस्टल निर्माण के संबंध में पहले से निर्णय और निर्देश जारी हुए है क्योंकि इसका प्रस्ताव अचानक ही नहीं बना होगा।

टांक ने बताया कि चूंकि यह मामला केवल खेल खिलाड़ियों, खेल प्रेमियो ंसे ही नहीं जन भावना से जुड़ा हुआ है इसलिये जन आक्रोश स्वाभाविक हैं। जहां तक होस्टल निर्माण की अनिवार्यता का प्रश्न है जिस प्रकार आदिम जाति छात्रावास अफीम रोड़ पर स्थित है। रेवास देवड़ा रोड़ पर भी छात्रावास बने हुए है इसी प्रकार यह होस्टल भी अन्यत्र उचित स्थान देकर बनाया जा सकता है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts