Breaking News

गाय और मॉं को कभी कम मत आंकना – कमल किशोर नागर

मंदसौर। गुरूवार को श्रीमद भागवत कथा में पं. कमलकिशोर नागर ने गाय और मां के महत्व को विस्तार से समझाया साथ ही भारतीय संस्कृति में पाश्चात्य संस्कृति का चलन हावी न होने देने की बात कहीं। पं. श्री नागर ने कहा कि गाय युगो युगांतर से पूज्यनीय है मां कामधेनू एक गाय थी जिसमें 36 कोटीश देवता निवासरत है। आज गाय का स्थान जर्सी गाय ने ले लिया है आज हम जर्सी गाय का दूध पीते है जहां देखो वहां जर्सी गाय ये भारतीयो को हो क्या गया है गाय पाल रहे हो कि सूअर जरा देखो तो सहीं की जर्सी गाय रंभाती है तो माथा ढनक जाता है और देशी गाय जब रंभाती है तो मां मां की ध्वनि गुजांयमान हो जाती है यह महिमा है हमारी गउ माता की हम उसे ही छोड रहे है घर के खुंटे से सूअर को बांध रहे है उसका दूध पी रहे है कहां से सुधार होगा।

मां एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरा ब्राहमाण्ड समाया है, मां के चरणों में स्वर्ग है आज पाश्चात्य संस्कृति और पढाई ने ऐसा मूर्ख बनाया कि मां मम्मी बन गयी। भगवान कृष्ण जब बालरूप में थे तो मां यशोदा से यही कहा था कि मां तू सब कुछ छूडा देना मेरा चंचलपन, नटखटपन सब लेकिन अपना दूध मत छूडाना क्योकि जब कलयुग प्रारंभ हो जाएगा तो मां नहीं मिलेगी मम्मी मिलेगी ओर वह स्तनपान नहीं कराएगी बाटल में भरकर दूध पिलाएगी। आज ममता गयी कहां मां कैसे मम्मी बन गयी अगर अब भी सुधार नहीं हुआ और मां को मम्मी बनाते रहे तो फिरते फिरना स्वर्ग को ढूंढते रहना कि है कहां शास्त्र तो मां के चरणों में ही बता रहे थे ये गडबड हुई कहां इसीलिए मैं कहूंगा कि मां को पूत्र मम्मी न कहे और मां अपनी ममता को ना छोडे तभी इस जीवन को लेना सार्थक होगा।

नंद के लाल बाल गोपाल की पूजा में दोष नहीं लगताः- पं. श्री नागर ने कहा कि बडे देव की पूजा बडी कठिन होती है नियम से होती है लेकिन भगवान बालकृष्ण की पूजा में कोई नियम न भी हो तो वह दोष नहीं लगता क्योकि बच्चे कभी नाराज नहीं होती और ना कोई बडी आशा रखते है थोडी की मान मनोव्वल पर हंस देते है तो बडे द्वारकाधिश को ना विधिविधान से पूज सको को बालगोपाल को दही मिश्री का ही भोग लगा देना वो खुश हो जाएंगे हमारा कल्याण कर देगा कहते हेै भगत के बस में ही है भगवान बस भक्त की भक्ति कितनी प्रगाढ है भक्ति करो तो ऐसी करो और भजन करो तो ऐसा करो कि या तो भगवान हंस दे या रो दे तो ही सार्थक है।

हम सब ईश्वर के बनाएं खिलोने हैः- पं. श्री नागर ने कहा कि हम सब ईश्वर के बनाएं हुए खेल खिलोने के है बच्चा जब खिलोने से खेलता है तो जब तक वो खिलोना तोड ना दे तब तक उसे मजा नहीं आता आनंद नहीं आता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी मामा कंस के द्वारा भेजे गए राक्षसों को खिलोना समझा और उन्हे तोड दिया उन्हे तोडने में मजा आया। ईश्वर ने भी हम जैसे अनगिनत खिलोने बनाएं और जन्म दिया जीवनकाल के इस सफर में अनगिनत नाच नाचते है और अंत में तोड दिए जाते है मृत्यु को प्राप्त हो जाते है बस फर्क यह है कि इसमें खेल खिलाने वाले खिलाडी परमात्मा को कितना आनंद आया क्रोध में टूटे के, आनंद में यह समझना होगा इस जीवन का महत्व समझना होगा।

हस्तीयां याद रखते है अस्थियों को नहींः- पं. श्री नागर ने कहां कि जीवन ऐसा जीयों की नाम हो जाए और कार्य ऐसा करो की काम हो जाए। नही ंतो जैसे आए वैसे चल दिए सिर्फ धन कमाया और नाम नहीं कमाया तो जीवन में एक बाद याद रखना नाम कमाने वाली हस्ती को लोग याद करते है नही ंतो मरने के बाद अस्थियों को कोई याद नहीं करता उन्हे सिर्फ प्रवाहीत कर देते है।

कथा में पं. श्री नागर ने शिव का कृष्ण बालरूप दर्शन, व्यसन, गोवर्धनलीला, मुख में ब्राहमाण्ड दर्शन, पूतना प्रसंग, अभिमान और छोटे रहकर माया से तरने, भारत की संस्कृति को जीवित रखने, अस्त व्यस्त जीवनशैली को सुधारने जैसे कई प्रसंगो की सुंदर व्याख्या कर धर्मालुजनो को जीवन जीने कला सिखायी।

गुरूवार को आयोजित कथा में हजारो की संख्या में धर्मालुजन उपस्थित हुए और कथा रसपान कर धर्मलाभ लिया। कथा आयोजक समिति और गोपालकृष्ण गौशाला के अध्यक्ष अनिल संचेती ने अंचल ओर ग्रामवासी ओर समस्त धर्मप्रेमी बंधू अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts