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गीता भवन में योगदान देने वालों को भुलाया नहीं जा सकता

मन्दसौर। धर्मधाम गीता भवन में 46वीं गीता जयंती समारोह के अंतर्गत समापन दिवस पर गीता भवन के प्रवचनों के आयोजन का संचालन करते हुए गीता भवन ट्रस्ट के सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार पं. अशोक त्रिपाठी ने कहा कि इंदौर के गीता भवन के बाद मंदसौर का धर्मधाम गीता भवन इस अंचल का प्रमुख धर्म एवं आध्यात्म का केन्द्र बनेगा। गीता भवन लगभग पूर्णता की ओर है, गीता भवन के इस स्वरूप को भव्य बनाने में अन्तर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रधान पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरू श्रीश्री 1008 स्वामी श्री रामदयालजी महाराज एवं गीता भवन के अध्यक्ष स्वामी श्री रामनिवासजी महाराज का अभुतपूर्व योगदान है। इसके अलावा गीता भवन की परिकल्पना के नींव के पत्थर उन दिवंगत आत्माओं के योगदान को भी नहीं भूलाया जा सकता जिन्होनंे तन,मन, धन समय न्यौछावर किया।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि हम नहीं भूला सकते भूमिदानदाता दानवीर सेठ स्व. अमरचंद कोठारी, प्रथम अध्यक्ष स्व. सेठ नारायण मंगल, गीता भवन सत्संग हॉल की छत बनने तक अन्न त्याग करने वाले वैष्णव सेनाचार्य स्वामी श्री रामकुमाराचार्य अनुरागी, स्व. मन्नालाल नागदा, स्व. छगनलाल चौगे, स्व. पन्नालाल ठेकेदार, स्व. पवन केवड़ा एड., विनोद डोसी, स्व. जगदीश चौबे आदि की सेवाओं और योगदान को भूलाया नहीं जा सकता।

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