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गुरूपूर्णिमा का महत्व पौराणीक है, समूचे अंचल में मनाया गया गुरू पूर्णिमा महोत्सव 

क्षेत्र के धर्मगुरू भीमाशंकर जी का लिया हजारों शिष्यों ने आशीर्वाद

मंदसौर। गुरूपूर्णीमा पूरे में जिले में मनाई गई। गुरूपूर्णिमा से चातुमार्सिक त्यौहार शुरू भी हो गए है। जिला मुख्यालय पर गुरू पूर्णिमा का भव्य कार्यक्रम भीमाशंकर शास्त्री के भक्तों द्वारा विगत् 10 से अधिक वर्षो से करवाया जा रहा है। इस बार भी गुरू पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र के धर्मगुरू धारियाखेड़ी वाले भीमाशंकर जी शास्त्री पाद पक्षालन और प्रवचन कार्यक्रम शुक्रवार को कृषि उपज मंडी परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशेष रूप से सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, हरदीपसिंह डंग, जिला पंचायज अध्यक्ष प्रियंका गोस्वामी, बैंक अध्यक्ष मदनलाल राठौर, पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा, कांग्रेस उपाध्यक्ष महेन्द्र गुर्जर, युवा कांग्रेस अध्यक्ष सोमिल नाहटा, भाजपा जिला मंत्री विनय दुबेला आदि उपस्थित थे।

हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं को शास्त्री जी ने गुरू पूर्णिमा का महत्च बताया और कहा कि जीवन में सदैव साफ मनोवृत्ति के बने कपटी व षडयंत्रकारी नहीं बने। दीन दुखियों का भला करें भगवान स्वयं की आपका भला कर देगा। इस अवसर पर आयोजक समिति भारत उत्थान अभियान के भुवानसिंह डांगी, सुन्दरलाल गुर्जर, भवानीलाल गुर्जर, श्याम डांगी, कान्हा मिस्त्री, लाला भाई गुर्जर, समरथ गुर्जर, डॉ लक्ष्मणसिंह गुर्जर उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसादी का आयोजन भी हुआ।

आशीर्वाद लेने के लिए उमड़ी भीड़कार्यक्रम के प्रारंभ में मंच पर भीमाशंकर जी विराजमान थे जिसका आशीर्वाद लेने के लिए भक्तगण मंच पर जा रहे थे। देखते ही देखते भीड़ इतनी बढ़ गई कि पूरा मंच भरने लगा। सावधानी बरतते हुए आशीर्वाद कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा।

दशपुर योग शिक्षा संस्थान ने मनाया ‘‘गुरू वंदन’’ समारोह दशपुर योग शिक्षा संस्थान में शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा पर्व पर उत्साह और उमंग के साथ ‘‘गुरू वंदन’’ समारोह रामटेकरी स्थित शिव मंदिर योग केन्द्र पर मनाया। योग साधकों ने योग गुरु सुरेन्द्र जैन का वंदन कर उनका शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मान किया।

इस अवसर पर साधकों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरू वह है जो शिष्य को अच्छे संस्कार, शिक्षा के साथ-साथ स्वस्थ रहने के गुर सिखाये। सुरेन्द्र जैन ने निस्वार्थ भाव से नगर में योग की शिक्षा देकर ‘‘योग गुरू’’ की उपाधी प्राप्त की। हमें उनसे प्रेरणा लेना चाहिए। इस दौरान साधकों ने योग से हुए फायदे एवं अपने अनुभवों को भी सांझा किया।

इस अवसर पर योग शिक्षक ओम गर्ग, जिनेन्द्र उकावत, राजकुमार अग्रवाल, विक्की बारभाया, बीना गर्ग, मनोज खत्री का भी वरिष्ठ साधकों द्वारा बहुमान किया गया। ऊँ की ध्वनि के साथ समारेाह का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जी.डी. मित्तल, धर्मचन्द्र जैन, दिनेश पारख, रमेश खत्री, प्रीति जैन, प्रमेन्द्र चौरडि़या सहित बड़ी संख्या में साधक उपस्थित थे। अंत में आभार जितेश फरक्या ने व्यक्त किया।

शिशु मंदिर में गुरूपूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया  सरस्वती विद्या मंदिर उ.मा.वि. केशव नगर में गुरूपूर्णिमा महोत्सव बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. राजेन्द्रसिंह शिक्षण समिति के उपाध्यक्ष चेनराम जैन, व कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के सदस्य गोविन्द वैश्यम्पायन की उपस्थिति में बडे हषोल्लास के साथ मनाया गया। अतिथि परिचय प्रधानाचार्य मुकेश पाठक एवं स्वागत विद्यालय की वरिष्ठ दीदी श्रीमती आरती निसालकर, श्रीमती बीना शर्मा व सुश्री चेतना द्विवेदी ने किया।

कक्षा द्वितीय के भैया बहिनों ने नृत्य, कक्षा षष्ठ से अष्टम के भैया/बहिनों ने नाटक के माध्यम से गुरू-शिष्य की परम्परा को महत्व बखान किया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरू पूर्णिमा सर्म्पण का उत्सव है केवल राशि का सर्म्पण व धन का सर्म्पण नहीं, राष्ट्र के प्रति सर्म्पण का भाव जागृत होना इस उत्सव का महत्व है। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के आचार्य जयंत राठौर ने किया आभार विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य वरदीचंद श्रीमाल ने माना।

महादेव मंडल ने की गुरूपजा स्थानीय जीवागंज स्थित जगदीश मंदिर में महादेव मंडल द्वारा अपने गुरू सदाशिव बापू की चरणपादुकाओं का पूजन कर गुरू पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। पादुका पूजन के पूर्व सभी भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक किया तत्पश्चात् पादुका का पूजन कर गुरू सदाशिव बापू से आत्मकल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गुरूभक्त उपस्थित थे।

गायत्री शक्ति पीठ में मनी गुरू पूर्णिमा प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था धन निरपेक्ष ऋषियों के हाथ में होने से भारत में शिक्षा न तो शासक वर्ग के हाथ में थी और न ही धनी अथवा राजनीतिक लोगों के हाथ में थी, यही कारण था कि हजारों वर्षों तक संस्कृति का लोप नहीं हुआ। उस युग में आचार्यगण ही शिक्षा के केन्द्र थे।

उपर्युक्त उद्गार अपने उद्बोधन में जैन शिक्षा महाविद्यालय मंदसौर के पूर्व प्राचार्य रामगोपाल शर्मा ‘‘बाल’’ ने गायत्री शक्तिपीठ रीछालालमुहां पर गुरू पूर्णिमा उत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कहे। उन्होंने गुरू परम्परा की व्याख्या करते हुये बताया कि यह वैदिक काल से निरन्तर चली आ रही है। महर्षि वेदव्यास के जन्म के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसलिये समस्त शास्त्र प्रणेता व्यास को सर्वज्ञ मानकर व्यासोच्छिष्ट जगत्सर्वम्’ कहा जाता है। उस युग में शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान गुरूजन ही देते थे।

नाहरगढ में हुआ गुरू पूर्णिमा पर भण्डारे का आयोजन भागवताचार्य पण्डित सुनील शर्मा के निर्देशन वैदाचार्य बालव्यास पण्डित मनीष शर्मा के मुखार्विनद से आयोजित भागवत समापन तथा गुरु पूर्णिमा पर भण्डारे का आयोजन अंचल व नगर के जनसहयोग से हुआ।

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