Breaking News

गोपालकृष्ण गोशाला प्रबंध समिति भंग की गई

मंदसौर। प्रदेश की सबसे धनी गोपालकृष्ण गोशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। कुछ साल पहले हुई शिकायतों के मामलों में अब राज्य शासन ने फिर से गोशाला समिति को भंग कर दिया है। कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव के आदेश पर मंगलवार को तहसीलदार ब्रह्मस्वरूप श्रीवास्तव ने गोशाला प्रशासक का पद संभाल लिया है। शासन ने भंग करने के साथ ही फिर से गोशाला में चुनाव करवाने को भी कहा है। इधर गोशाला अध्यक्ष रहे अनिल संचेती ने बताया कि इन आरोपों के आधार पर हमारी एक याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। जल्द ही उस फैसला आ जाएगा।

मंदसौर की गोपालकृष्ण गोशाला की चल-अचल संपत्ति की कीमत अरबों में आंकी जाती है, इसके चलते सत्ताधारी दल के लोग इस पर कब्जे को लेकर कोई न कोई कवायद करते रहते हैं। 2015 में भी गायों की मौत के मामले में गोशाला में काफी बवाल हुआ था और यहां विहिप और अन्य संगठनों ने काफी धमाल मचाई थी। वहीं पुलिस में प्रकरण दर्ज करवाया गया था और गोशाला के तत्कालीन अध्यक्ष अनिल संचेती को जेल भी जाना पड़ा था और शासन ने समिति को भंग कर एसडीएम को प्रभारी बनाया था। हालांकि कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद पुनः अध्यक्ष अनिल संचेती एवं कार्यकारिणी को मिला था, तब से पुनः अध्यक्ष पद पर संचेती हैं। अब फिर आए मंत्रालय के आदेश से गोशाला की राजनीति में एक बार फिर घमासान होने की संभावना है। फिलहाल तहसीलदार ने चार्ज ले लिया है और अनिल संचेती फिर से पूर्व अध्यक्ष बन गए हैं।

लगभग 3 हजार गाये हैं गोशाला में

गोपालकृष्ण गोशाला प्रदेश की सबसे बड़ी गोशालाओं में शुमार है। यहां बस स्टैंड स्थित गोशाला, प्रतापगढ़ रोड स्थित फार्म और नवलखा बीड़ में स्थित गोशाला में लगभग 3 हजार गायें हैं। गोशाला में कई गायें ऐसी भी हैं, जो बीमार अवस्था में रहती है और अकसर 7-8 गायों की मौत एकाध दिन में होती रहती है। 2015 में भी गोशाला प्रबंधन का जिम्मा प्रशासन के पास आने पर गोशाला में प्रतिदिन गायों का ठीक से ख्याल भी रखा गया। हालांकि जब आरोप-प्रत्यारोप लगे थे, तब यह बात भी सामने आई कि गायों को बीमार अवस्था में लोग यहां छोड़ जाते हैं। प्रबंधन उनका पूरा ध्यान रखता है, लेकिन गायों की मौत होना स्वाभाविक रहती है।

वर्ष 2007 और 2010 के चुनावों में रही थी गहमागहमी

गोशाला प्रबंधन के चुनाव वर्ष 2007 में हुए थे। बाद में 2010 में भी चुनाव हुए। इन दोनों वर्षों में भी चुनाव के दौरान संबंधित पेनलों द्वारा अच्छा-खासा प्रचार-प्रसार किया गया। मतदान के समय पेनल भी भाजपा-कांग्रेस के हिसाब से ही बनी थी। तब भी चुनाव गोशाला के थे, लेकिन ऐसा लग रहा था किसी बड़े पद के लिए निर्वाचन हो रहा है। व्यवस्था के लिए पुलिस फोर्स भी अच्छा खासा तैनात किया गया था।

खेतों में मवेशी घुसने पर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत

नवलखा बीड़ स्थित गोशाला में गायों को सुबह शाम विचरण करवाया जाता है। दो हजार से ज्यादा गायें विचरण करती है। इस दौरान गायें समीप स्थित खेतों में जाती है। इसे देखते हुए खेत मालिकों की ओर से सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की गई थी। सोमवार को इस शिकायत को लेकर पशुपालन विभाग के उपसंचालक मनोज इंगले गोशाला पहुंचे थे। वहां इस शिकायत का निराकरण कर दिया गया।

मंत्रालय से गोपालकृष्ण गोशाला की समिति भंग करने का आदेश प्राप्त हुआ था। इसके बाद मंगलवार को तहसीलदार को वहां का प्रशासक बनाकर चार्ज दिला दिया है। शासन ने नए सिरे से चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं। अब हाईकोर्ट में क्या मामला चल रहा है, उसकी जानकारी अब लेंगे।

-ओमप्रकाश श्रीवास्तव, कलेक्टर मंदसौर मंगलवार को भंग करने की सूचना देकर तहसीलदार ने चार्ज ले लिया है। शासन से बस चार्ज लेने के आदेश दिए हैं। 2 नवंबर का आदेश था, जो 17 नवंबर को मिल गया था। इसी मामले को लेकर याचिका लगी हुई है। इसमें हाईकोर्ट में प्रकरण चल रहा है। -अनिल संचेती, पूर्व अध्यक्ष, श्री गोपालकृष्ण गोशाला, मंदसौर।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts