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चंद रुपए में कर सकते हैं लाखों लीटर जल संरक्षण

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  • काफी आसान तरीके से तैयार होता है रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम-जल संरक्षण से बढ़ाया जा सकता है कुए, हैंडपंप और ट्यूबवेल का पानी

पानी की कमी से हर कोई परेशान है, सालभर तो जैसे तेसे काम चल जाता है, लेकिन जैसे ही गर्मी आती है। कुए, ट्यूबवेल सहित हैंडपंप भी जवाब देना शुरू कर देते हैं। ऐसे में अगर लोग स्वयं जागरूक होकर अपने-अपने घरों में रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं, तो निश्चित ही भू-जलस्तर बढऩे से साथ ही घरों में लगे ट्यूबवेल, हैंडपंप और कुए भी सालभर भरपूर पानी ऊगलेंगे।

बहुत असान है रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना
जल संरक्षण करने के लिए रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना बहुत आसान है। जिसे व्यक्ति मकान बनने के बाद नए व पुराने दोनों प्रकार के घरों में लगवा सकते हैं। इसके लिए भवन मालिक को बारिश के पानी के संरक्षण के लिए घर की छत में ऐसा पाईप लगाना होगा, जिससे छत का पानी नीचे जमीन में उतारा जा सके, इस पानी को जमीन में एक गहरा गड्ढ़ा खोदकर उसमें छोडऩा पड़ेगा, ताकि जमीन का भू-जलस्तर बढ़ सके। इसके लिए घर के पास जहां भी जगह हो, चार से पांच फीट गहरा गड्ढ़ा खोदकर उसमें पाईप उतराना होगा, गड्ढ़े में ईंट, पत्थर, गिट्टी आदि डालकर ऊपर से बंद कर देना होगा, इस प्रकार बारिश का पानी इधर उधर नहीं जाकर सीधा जमीन के अंदर पहुंचेगा, जिससे एक और जल स्तर बढ़ेगा, तो दूसरी और आसपास में स्थित हैंडपंप और ट्युबवेल में भी अच्छा पानी आने लगेगा।

एक मकान से संरक्षित किया जा सकता है 1 लाख लीटर पानी
जानकारी के अनसुार 1170 एमएम वर्षा होने पर 1 हजार स्क्वायर फीट की छत से करीब 1 लाख लीटर तक पानी संरक्षित किया जा सकता है। चूकि अधिकतर घर 1 हजार स्क्वायर फीट से अधिक ही होते हैं। इस कारण रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने से निश्चित ही हर व्यक्ति पानी का कम से कम 80 हजार लीटर से 1 लाख लीटर तक पानी का संरक्षण कर सकता है।

कम लागत में तैयार हो जाता है सिस्टम
रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में बहुत की कम खर्च आता है, क्योंकि इसमें केवल छत से जमीन तक का पाईप, ईंट, पत्थर, गिट्टी की ही जरूरत होती है। यह कार्य हजार, 1500 रुपए में हो जाता है। जिससे व्यक्ति हर साल हजारों लीटर पानी बचा सकता है। रूफ हार्वेस्टिंग सिस्टम के पाईप को व्यक्ति अपने घर में कुआ, ट्यूबवेल, हैंडपंप होने पर उसके समीप छोड़ सकते हैं, अन्यथा सोखता गड्ढा बनाकर उसमें बारिश का पानी छोड़ा जा सकता है।

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