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चम्‍बल नदी हादसौ की नदी – दुर्धटना से प्रशासन नहीं ले रहा कोई सबक

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मंदसौर। ग्राम बकाना में चंबल नदी के पार स्थित टापू पर खरबूजे की खेती करके घर पहुंचने के लिए चप्पू वाली नाव से आ रही थी। इसी दौरान नाव पलटने से महिलाएं नदी में जा गिरी। चार महिलाओं बगदीबाई पति लालसिंह मीणा, हुडीबाई पति कंवरलाल, शांतिबाई व कमलाबाई को एक अन्य नाविक ने बचा लिया था। ग्राम बकाना में गुरुवार शाम को चंबल नदी में डूबी दो महिलाओं के शव निकाल लिए गए। शुक्रवार को गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम में सुबह से ही मातम छाया हुआ था। दो घरों से निकली अंतिम यात्राओं ने कई लोगों की आंखों में आंसू ला दिए। गौरतलब है कि गांधीसागर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लबालब चंबल नदी में गुरुवार को हुआ हादसा पहली बार नहीं हुआ है। नदी में अवैध रूप से चल रहे स्टीमर व नावों से दुर्घटना का सिलसिला 1980 से बदस्तूर जारी है। दुर्घटनाओं में अब तक 110 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। ये वे लोग हैं, जिनकी जानकारी प्रशासन के पास है। अवैध परिवहन के कारण डूबे लोगों की जानकारी किसी के पास नहीं है।

पुलिस के अनुसार नाव से घर लौटने के दौरान चंबल में डूबी बकाना की स्याणीबाई पति बगदीराम मीणा (65) काशव तो रात्रि में ही निकाल लिया गया था। दूसरी लापता महिला प्रेमबाई पति रायसिंह मीणा (30) का शव शुक्रवार सुबह 6 बजे मिला। सुबह शामगढ़ से बकाना पहुंचे डॉ.राकेश पाटीदार ने शवों का पोस्टमार्टम किया। विधायक हरदीपसिंह डंग के साथ जिपं सदस्य प्रतिनिधि ललित विश्वकर्मा ने अंतिम यात्रा में मुक्तिधाम पहुंचकर शोक प्रकट किया। मृतका प्रेमबाई का 9 वर्षीय पुत्र निखिल है। निखिल बचपन से अपने मामा जगदीश मीणा के पास नारिया मानपुरा (गरोठ) में रहकर पढ़ाई कर रहा है। मां की मौत पर बालक निखिल का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतका प्रेमबाई प्रगतिशील किसान परिवार की बहु थी। एक और मृतका स्याणीबाई (65) के चार पुत्र है, जिसका मायका शामगढ़ के पास बरखेड़ा उदा बताया जा रहा है। 4 महिलाएं बची थी हादसे में

बिना परमिट के बरसों से चल रही चंबल नदी में नावें, फिर भी मंदसौर प्रशासन मौन
चंबल नदी में बरसों से बिना परमिट के नावों से यात्री परिवहन हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन लापरवाह है। वहीं क्षेत्र के जवाबदार अधिकारी एसडीएम अर्पित वर्मा खुद स्वीकार कर रहे है कि चंबल नदी में नावो से अवैध परिवहन हो रहा है। उल्लेखनीय है कि नौ साल में कई नाव दुर्घटनाएं हो चुकी है। करीब 9 साल में हुए 6 बड़े नाव हादसों में 34 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन ने नदी में चल रहे अवैध परिवहन को रोकने के कभी कोई प्रयास नहीं किए।
ओवरलोडिंग व बिना परमिट के चल रही कई नावें
चंबल नदी में बरसों से ओवरलोडिंग कर बिना परमिट के नावों व स्टीमरों से यात्री परिवहन हो रहा है, इसके बाद भी प्रशासन लापरवाह है। जब हादसा होता है तो प्रशासन जाग जाता है। वर्तमान में भी एक स्टीमर में 10 से अधिक सवारियां व 6 से अधिक बाइक लोड की जा रही है। वहीं चप्पू वाली नावों में अवैध तरीके से सवारियां व वाहन लोड किए जा रहे है। उल्लेखनीय है कि जिले में पिछले सालों में हुए कई बड़े नाव हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी इन्हें देखने या रोकने वाला कोई नहीं है। शायद प्रशासन एक बार फिर किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहा है।
हो रहा मानव परिवहन
गांधीसागर बांध के निर्माण के बाद जिले के सैकड़ों गांवों में परिवहन का साधन जलमार्ग ही बचा है। सड़क मार्ग पर लंबी दूरी तय करने के बजाय ग्रामीण स्टीमर में बैठकर ही गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। स्टीमर व नावों में ग्रामीण अपने दोपहिया वाहन और जानवर एक गांव से दूसरे गांव ले जाते हैं। कलेक्टर कार्यालय से पूरे गांधीसागर जलाशय में 16 जलमार्ग तय किए हुए हैं। इन पर स्टीमर चलाने की अनुमति लोक निर्माण विभाग के मैकेनिकल विभाग की अनुशंसा के बाद जल संसाधन विभाग व प्रशासन देता है। नीमच व मंदसौर जिले में गांधीसागर बांध के लगभग 60 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले जलाशय में लगभग 50-55 स्टीमर व नाव मानव परिवहन में लगे हैं। इसमें से आधे ही लाइसेंसशुदा है और जो लाइसेंसशुदा हैं, उनके फिटनेस की जांच करने व लाइसेंस की अवधि की जांच करने की तरफ भी कोई नहीं देखता है। यही कारण है कि चंबल नदी में एक के बाद हादसे हो रहे हैं और अभी तक 110 लोगों की मौत डूबने से हो चुकी है।
समय-समय पर होती रहती हैं शिकायते
मंदसौर जिले की मल्हारगढ़, मंदसौर, सीतामऊ, शामगढ़, गरोठ व भानपुरा तहसील के सैकड़ों गांव गांधीसागर जलाशय के किनारे बसे हुए हैं। नीमच जिले की मनासा तहसील के गांव जलाशय के डूब क्षेत्र में हैं। मंदसौर-नीमच जिले के जलमार्गों का निर्धारण मंदसौर एडीएम कार्यालय से ही होता है। हालांकि निर्धारित जल मार्गों के अलावा ग्रामीणों ने भी अपनी सुविधा से कुछ जल मार्गों का निर्धारण कर लिया है। अवैध नौकायन व अप्रशिक्षित नाविकों के कारण भी जलाशय में दुर्घटनाएं हुई है।
नौसिखिए करा रहे नौका विहार
कम कीमत व समय की बचत के चलते यात्रा के लिए लोग जल मार्ग का सहारा ले रहे हैं। बिना किसी झिझक नौसिखिए नाव चालक बेपरवाह होकर नौका विहार करा रहे है। जिले के गरोठ, शामगढ़ व गांधीसागर क्षेत्र में भी यही स्थिति है, यहांभी लोग बिना किसी झिझक के नाव चला रहे है। गांधीसागर बांध के डूब क्षेत्र संजीत के पास हिंगोरिया बड़ा गांव से खड़ावदा, रामपुरा व आसपास के इलाकों मे अपने गंतव्य तक जाने का सीधा मार्ग होने से लोग अपनी जिंदगी को दांव पर लगा कई किलोमीटर दूर तक का सफर तय कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन नाव चालकों के पास न तो लाइसेंस है और नहीं ये प्रशिक्षित है और नहीं इनके पास कोई परमिट। यहीं नहीं इनके पास सुरक्षा के भी कोई संसाधन मौजूद नहीं है।
सवारियों के साथ ढो रहे वाहन
यहीं नहीं सवारियों के साथ ही ये नौसिखिया नाव चालक दर्जनों वाहनों को भी अपनी नावों में लोड कर नदी के इस पार से उस पार पहुंचा रहे हैं। इन्हें सिर्फ कमाई से मतलब है। इस क्षेत्र से 10 से 25 प्रति सवारी तथा वाहनों के 30 से 50 रुपए लेकर चालक कोसो दूर का सफर लोगों को तय करा रहे है।  इस बात की पड़ताल कि तो पाया कि प्रतिदिन ये नाव चालक सुबह 6 से शाम 6 बजे तक हर आधे घंटे के अंतराल में करीब 25 से अधिक बार इस किनारे से उस किनारे पर जाते है। इनमें 10 से अधिक सवारियों के साथ ही 6 से अधिक मोटरसाइकिलें भी लोड की जा रही है। यह बात अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी सभी चुप्पी साधे बैठे है।
कब-कब कहां हुए हादसे
  • जनवरी-2015 में गांधीसागर जलाशय में कंवला गांव में तीन युवको की मौत हो गई थी। यह युवक जलाशय में चप्पू वाली नाव से मछली पकडऩे गए थे।
  • मई-2014 को नाहरगढ़ क्षेत्र के ग्राम निरधारी से बगैर परमिट की चप्पू वाली जर्जर नाव से नाविक सहित 8 यात्रियों का अवैध परिवहन कर शामगढ़ क्षेत्र के ग्राम आवरा ले जाया जा रहा था। यही कारण है कि नाव में हुए छेद से उसमें पानी भराया ओर नाव डूब गई।इसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें दंपती के साथ एक बालिका भी थी। इस दुर्घटना को भी हर बार की तरह सामान्य लिया गया।
  • अप्रेल-2014 में चंदवासा (शामगढ़) के ग्राम आवरा के समीप हुईनाव दुर्घटना में 3 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी थी। यहां बिना परमिट की चप्पू वाली नाव में ओवरलोडिंग कर नदी से यात्री परिवहन किया जा रहा था।
  • नवंबर-2012 में बापच्या से बोरखेड़ी जागीर के बीच चंबल नदी में नाव पलटने से 13 लोगों की मौत होने की घटना हो चुकी है।
  • फरवरी-2006 में भी चंबल नदी में नाव पलटने का हादसा हो चुका है। उस वक्त भी संजीत से बालोदा जा रही नाव पलटने से 13 लोगों की मौत हुई थी। उस समय भी नाव में 19 लोग ही सवार थे।
  • 90 के दशक में भी यहां नाव पलटने का बड़ा हादसा हुआ था। इसमें 6 लोगों की जानें गई थी।
यह है नियमित जल मार्ग
  • संजीत से कुंडला व्हाया खानखेड़ी
  • संजीत से अरनियामाली
  • संजीत मगरा से बडी आंत्री व्हाया छोटी आंत्री
  • आक्या मेड़ी से मोलाखेड़ी
  • खेजड़ी से मोलाखेड़ी
  • रामपुरा से रायपुरिया व्हाया रामनगर
  • गांधीसागर मोड़ी पतनम जेटी से मावासेरी टेकरी
  • गांधीसागर मोड़ी पतनम छोटी से लोडिंग पाइंट व्हाया करनपुर
  • रामपुरा से खडावदा
  • चचोर से बालोदा
  • रामपुरा से सोनड़ी, जोड़मी बाकी
  • उमरिया बालोदा से बोरखड़ी, हिंगोरिया
  • कुंडवासा से उमरिया व्हाया लोटवास मगरा
  • चचोर से संजीत
  • छोटी आंत्री से बड़ी आंत्री
  • एलवी महादेव से आवरा घाटा वर्जन
चंबल नदी में परिवहन के लिए कुछ स्टीमर संचालको को अनुमति दी गई है। जलाशय में बगैर परमिट के चलने वाली नावों व स्टीमर की जांच कराई जाएगी। अवैध पाए जाने पर संबंधितो पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।– अर्जुनसिंह डाबर, प्रभारी कलेक्टर

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