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चाइना का आर्थिक पोषण पाकिस्तान से दशहतगर्दी के रूप में भारत में आता है – श्री झाला

मन्दसौर निप्र। पं. दीनदयाल उपाध्याय वृद्धजन सेवा केन्द्र (डे केअर सेण्टर) मन्दसौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ विभाग कार्यवाह दशरथसिंह झाला के मुख्य आतिथ्य, शिक्षाविद् रमेशचन्द्र चन्द्रे की अध्यक्षता, सेवानिवृत्त एवं पेंशनर नागरिक महासंघ अध्यक्ष श्रवण कुमार त्रिपाठी, डे केअर सेंटर व्यवस्थापक प्रमोद अरवन्देकर एवं समन्वयक डॉ. देवेन्द्र पुराणिक के सानिध्य में राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ।  इस अवसर पर बोलते हुए प्रमुख वक्ता श्री झाला ने कहा कि देश में श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं स्वतंत्रता का पर्व एक साथ मनाया गया। लोगों ने आाजादी का मतलब कुछ नहीं करना से लगा लिया, सब सरकार करेगी कि मानसिकता ने कर्तव्य बोध का लोप करके सरकारों से अपेक्षा बोध को बढ़ाया जिसके परिणाम प्रदर्शन एवं आंदोलन के रूप में सामने आ रहे है। श्री कृष्ण ने कर्म के साथ कर्तव्य बोध को महत्व दिया ‘‘अकर्मण्ये वाधिकारस्तु मा फलेषु कदाचन’’ गीता का सार श्लोकांश है। इसे हमें जीवन में उतारना होगा। श्री कृष्ण ने गोकुल का दूध दही मथुरा नहीं जाने दिया यह स्वदेशी भावना का ही बीजारोपण है जो हमें वर्तमान में हमें चीन के उदाहरण से समझना होगा कि चीन से हम 69 मिलियन डालर की सामग्री आयात करते हैं जबकि निर्यात लगभग 10 मिलियन डालर का करते है जिसका घाटा 41 प्रतिशत का रहता है। चीनी वस्तुएं सस्ती, हानिकारक रसायन युक्त खिलौने, फटाखे होने से हमारे कुटीर उद्योग बन्द हुए एवं स्वास्थ्य की हानि होती है सो अलग, इसके दुष्परिणाम कालान्तर में बच्चों मंे बिमारियों एवं युवाओं में नपुसंकता के रूप में देखने को मिलते है।

श्री चन्द्रे ने कहा कि लंका जीतने के बाद श्री राम स्वदेश प्रेम के कारण अयोध्या लौटे। श्री कृष्ण ने स्वदेशी दूध दही को मथुरा जाने से रोका। मुगलों की संस्कृति का भारत में मेल नहीं हुआ, अंग्रेजों के शासन में विदेशी कपड़ों की होली जलाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण तथा  मोहनलाल गुप्ता के गीत ‘‘न हो साथ कोई अकेले चलो’’ से हुआ। अतिथियों का स्वागत श्री रामकृष्ण नवाल, अजीजउल्ला खान, ओमप्रकाश मिश्रा, राजेन्द्र पोरवाल ने पुष्पहारों से किया। कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव नन्दकिशोर राठौर ने तािा आभार प्रमोद अरवन्देकर, ने माना। चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने की शपथ पश्चात कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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