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चाइना का माल बेचने वाले व्यापारियों का विरोध करे या चाइना के सामान का ?

आज की तारीख में हर एक हिन्दुस्तानी के मन में पाकिस्तान एवं चाइना के प्रति आक्रोश है और यही कारण है कि पुरे देश में चाइना के सामान का बहिष्कार किया जा रहा है
सही भी है… हेल्लो मंदसौर डॉट कॉम खुद यह चाहता है कि हमे चाइना का सामान खरीदकर आर्थिक रूप से चाइना को मदद नही करनी चाहिए मगर एक सवाल फिर भी मन में है… सवाल ये कि अगर हम चाइना के सामान का बहिष्कार आज कर भी दे तो भी नुकसान झेलने वाले ये व्यापारी तो हमारे अपने मंदसौर के ही है ना !!!
कही हम अपने ही किसी मंदसौर वासी की दिवाली तो ख़राब नही कर देंगे ?
हेल्लो मंदसौर डॉट कॉम इस पुरे मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए यह सुझाव भी देना चाहता है की हम जिस चीज़ को दिमाग में रखकर चाइना के सामान का बहिष्कार करने में लगे है वो चीज़ हकीकत में तब सफल होगी जब भारत सरकार चाइना के सामानों को भारत में लाने पर ही प्रतिबंध लगा दे…हो सकता है कि सरकार की भी कुछ मजबुरिया हो मगर हमारा तो यह कहना है कि जब चाइना का सामान बाज़ार में होगा ही नही तो व्यापारी बेचेगा भी नही और हम खरीदेंगे भी नही !!!
जिन बड़े व्यापारियों को चाइना का सामान भारत में बेच कर माल कमाना था वो तो माल कमा कर कब के रवाना हो चुके मगर अब उस बेचारे छोटे व्यापारी का क्या जो अपनी इस सीजन की रोज़ी रोटी की उम्मीद में बाज़ार में चाइना का माल लिए बैठा है

चाइना के सामान का बहिष्कार करना हमारी नज़र में भी सही है मगर साथ ही इन व्यापारियों की इस सीजन की रोजी रोटी के लिए चिंतन करना भी आवश्यक है वही दूसरी और इन व्यापारियों को भी अपनी अंतरात्मा से यह सवाल पूछना चाहिए कि चाइना जैसे धूर्त देश का सामान बेचकर अपने परिवार का पेट पालना हमारे देश के सम्मान से बढ़कर है क्या ???

आतंकवादके मामले में पाकिस्तान का अप्रत्यक्ष रूप से साथ देने एवं ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोकने के चीन के कदम का लोगों में विरोध होने लगा है। लोग पाकिस्तान की तर्ज पर चीन को सबक सिखाने के लिए उसकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके माल का बहिष्कार करने का संकल्प लेने लगे है। भारतीय बाजार में चाइना ने काफी कब्जा कर रखा है। लोगों का कहना है कि चीन हमारे से कमा कर हमारे खिलाफ ही उस धन का उपयोग कर रहा है। इसलिए चाइना सामान की ब्रिक्री एवं उपयोग का बहिष्कार करना चाहिए। इससे एक तो हमारे देश का धन हमारे यहां रहेगा। साथ ही हमारे उद्योग धंधे पनप सकेंगे।

बीते एक पखवाड़े मे चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते मे आयी खटास के बाद देशवासियों को मेड इन चाइना शब्द खटकने लगा है। पिछले कुछ वर्षों में ये शब्द भारतीयों की जरूरत बन गया कि लगभग हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड पर मेड इन चाइना लिखा हुआ दिखता है। चीनी उत्पाद के लिए भारत बड़ा बाजार है। चीन के सस्ते इलेक्ट्रॉनिक आइटम भारत में तेजी से बिक रहे हैं।जिसके चलते भारत और चीन के बीच व्यापार के मामले में अब तक चीन का पलड़ा लगातार भारी रहा है।दूसरी ओर पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा मिलने के बाद वहां से भारत का व्यापार लगातार बढ़ा है।18 सितंबर को उरी में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत सरकार पर पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापिस लेने का दबाव है।लेकिन सरकारी तौर पर अब तक इस बारे मे चीनी पटाखों को अवैघ करार देने के अलावा कोई खास पहल नही कि गयी है।लेकिन सरकारी खामोशी और सरहद पार से सामानों की आवाजाही के बीच पाकिस्तानी आतंकवाद का समर्थन करने की चीनी चुनौती को व्यापारी संगठनों और जनता ने स्वीकार किया है।विदेशी सामानों के बहिष्कार की प्रधानमंत्री की अपील के बाद तो देश के कई शहरों मे प्रर्दशन हुये हैं।जनता और विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर त्यौहारों के सीजन में चीन का सामान खरीदने और न बेचने का निर्णय लिया है।रेवाड़ी जैसे शहरों मे तो चाइनीज सामान की होली तक जलाई गयी।बिजली की चाइनीज लड़ियों और अन्य सामान को प्रतीकात्मक रूप से आग के हवाले किया।
चीन निरंतर हमारी सीमा में दखल देता है। हमारा रक्षा मंत्रालय लाचारी जताकर कह देता है कि सीमा निर्धारण न होने की वजह से ऐसा होता है। हम छिपाने की कोशिश करते हैं, चीन सिक्किम, लद्दाख में भारत पर दबाव बनाने की लगातार कोशिश करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को तिरस्कृत करने की कोशिश करता है।लेकिन हमारी सरकारें अपनी विदेश नीति की कूटनीति के चलते बराबर इसे दूसरे तरीके से पेश काती रही।दाअसल देखा जाये तो देश के बुनियादी राष्ट्रीय हितों का टकराव चीन के साथ है, जो शायद कभी खत्म ही ना हो सके। जब चीनी राष्ट्रपति भारत आते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें साबरमती के किनारे झूला झुलाते हैं तो हमें ऐसा लगता है कि चीन का भारत के प्रति नजरिया बदल गया। चीन ने ऐसा दिखाया कि मोदी सशक्त नेता हैं और वह उनके साथ दोस्ताना रिश्ते रखेंगे।लेकिन हमसे भारी मुनाफा कमाने वाला चीन हमें झांसा देने में नहीं चूकता और हर मौके पर हमारे खिलाफ पाकिस्तान की ढ़ाल बन जाता हे।
दुनिया में नकली माल के कारोबार के आंकड़े सामने आए हैं। इनके मुताबिक भारत पूरे विश्व में नकली माल कारोबार करने में पांचवें नंबर पर है, जबकि चीन का स्थान पहला है। पूरी दुनिया में पाइरेटिड और नकली माल का कारोबार हर साल करीब 5 खरब डॉलर का है। इसमें चीन की सबसे अधिक 63 पर्सेंट हिस्सेदारी है। चीन के बाद तुर्की, सिंगापुर, थाईलैंड और भारत का नंबर आता है।

ऐसे व्यापारियों को आगे से चाइना का सामान बेचना बंद कर देना चाहिए अगर व्यापारी एसा ना करे तो फिर व्यापारी का भी बहिष्कार कर देना चाहिए
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