चिदंबरम के बाद लालू के 22 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी

Hello MDS Android App

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय वित्त व गृहमंत्री रहे पी. चिदंबरम के चेन्नई स्थित आवास पर सीबीआई की छापेमारी के बाद बिहार में सत्ताधारी दल राजद सुप्रीमो लालू यादव के 22 ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। यह छापेमारी दिल्ली व एनसीआर के 22 ठिकानों पर हो रही है। दिल्ली के बाहरी इलाकों के कई ठिकानों के अलावा गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा में छापेमारी चल रही है। लालू यादव के खास व सांसद प्रेमचंद गुप्ता के बेटों के ठिकाने पर भी छापेमारी चल रही है। यह छापेमारी लालू यादव व उनके परिजनों से संबंधित 1000 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति मामले में है। गुरुग्राम में लालू के दामाद का आवास है और यहां कई मुखौटा कंपनियों के जरिए करोड़ों की संपत्ति ठिकाने लगाए गए।

कुछ दिनों पहले ही बिहार में बीजेपी के नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू के बेटे-बेटियों के साथ फर्जी कंपनी बनाकर फर्जी तरीके से परिसंपत्तियां ट्रांसफर की गई। ज्यादातर मामले तब के हैं जब सोनिया गांधी के साथ लालू यादव कांग्रेस सरकार में रेलमंत्री थे।

आरोप है कि लालू के रेलमंत्री रहते कई लोगों व उनकी कंपनियों को लाभ पहुंचाए गए। बदले में फर्जी कंपनी बनाकर उसमें लालू के बेटे-बेटियों को निदेशक बनाया गया और फिर इस कंपनियों को शेयर, जमीन व पैसे ट्रांसफर कर दिए गए। माना जा रहा है कि पटना से लेकर दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर लालू यादव व उनके बेटे-बेटियों-दामाद जुड़े बेनामी परिसंपत्तियां खरीदीं गई जो करीब 1000 करोड़ रुपए से अधिक के हैं।

उल्लेखनीय है कि बोफोर्स घोटाले के बाद लालू यादव ने देश में घोटालों की नई इबारत लिख दी थी। उनके दौर में हुए चारा घोटाला 900 करोड़ रुपए से अधिक का था। संयुक्त बिहार के विभिन्न जिलों के खजानों से फर्जी तरीकों से अरबो रुपए निकाले गए।

1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति मामले में लालू के यहां छापे

आयकर विभाग ने दिल्ली और इर्दगिर्द के इलाकों में कम से कम 22 स्थानों पर छापेमारी की और सर्वे किया। ये कार्रवाई राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव तथा अन्य से संबंधित 1,000 करोड़ रूपये के कथित बेनामी सौदों के मामले में की गई। अधिकारियों ने बताया कि आज तड़के विभाग ने दिल्ली, गुड़गांव, रेवाड़ी में कुछ जानेमाने कारोबारियों तथा रियल एस्टेट एजेंटों तथा अन्य के परिसरों पर छापेमारी शुरू की।
राजद के सांसद प्रेमचंद गुप्ता और कुछ अन्य कारोबारियों के परिसरों पर भी तलाशी ली गई। उन्होंने बताया कि छापेमारी एक दर्जन स्थानों पर की गई जबकि आयकर विभाग ने 10 अन्य आधिकारिक परिसरों का सर्वे भी किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘लालू प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े एक भूमि सौदे में शामिल लोगों और कारोबारियों के यहां तलाशी ली गई। लगभग 1,000 करोड़ रूपये के बेनामी सौदों और उसके बाद कर चोरी के मामले हैं।’’ उन्होंने बताया कि कर विभाग और पुलिस विभाग के लगभग 100 अधिकारी छापेमारी कर रहे हैं। पिछले हफ्ते भाजपा ने लालू प्रसाद, उनकी सांसद बेटी मीसा भारती और उनके दोनों बेटों पर लगभग 1,000 करोड़ रूपये के भ्रष्ट भूमि सौदों में शामिल होने का आरोप लगाया था और केंद्र सरकार से दिल्ली में हुए ऐसे ही एक सौदे की जांच की मांग की थी। गौरतलब है कि लालू के दोनों बेटे बिहार सरकार में मंत्री हैं।
केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि ये लेनदेन फायदा पहुंचाने के एवज में किए गए हैं और यह उस समय के हैं जब लालू प्रसाद यादव रेलवे मंत्री थे। प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लालू के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती दी। लालू का राजद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन का घटक दल है और उनके बेटे तेजस्वी यादव तथा तेज प्रताप यादव राज्य सरकार में मंत्री हैं। रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि कंपनी के मालिकों का पता वही है जो लालू के आधिकारिक आवास का पता है। यह कंपनी कथित तौर पर लालू के परिवार के सदस्यों ने शुरू की है। उन्होंने कहा कि बिहार में कई संदिग्ध भूमि सौदे हुए। उन्होंने पूछा कि क्या नीतीश अपनी सरकार के उस विशेष कानून का इस मामले में इस्तेमाल करेंगे जिसमें गैरकानूनी धन से प्राप्त संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, ‘‘लालू प्रसाद की राजनीति लूट की राजनीति बन गई है। करोड़ों रूपये की भूमि कौड़ी के मोल ले ली गई।’’
उनके मुताबिक लालू प्रसाद और उनके परिजनों से संबंधित ऐसा ही एक भूमि सौदा दिल्ली के बिजवासन में किया गया। रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘हम केंद्र सरकार से उचित कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।’’ प्रसाद ने दावा किया कि इन सौदों को अंजाम देने के लिए लालू प्रसाद के परिजनों द्वारा गठित और उनके मालिकाना हक वाली इन कंपनियों में कोई कर्मचारी नहीं है, इन कंपनियों की कोई कारोबारी गतिविधियां नहीं हैं और इनका कोई टर्नओवर भी नहीं है। यहां एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे ही संदिग्ध लेनदेन के हिस्से के रूप में बिहार के पटना में राज्य का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल शुरू होने जा रहा है जो लगभग 7.5 लाख वर्गफुट इलाके में फैला है।

चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति के घर पर सीबीआई के छापे

चेन्नई। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईपीबी की मंजूरी दिलाने के लिए कथित तौर पर एक कंपनी की तरफदारी करने के मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम से जुड़े अनेक परिसरों पर आज छापे मारे। दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ये छापे मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और और गुरूग्राम में मारे गए। चेन्नई में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि चेन्नई में पी चिदंबरम के नुंगमबक्कम आवास पर भी छापे मारे जा रहे हैं।
अपुष्ट रिपोर्ट के अनुसार चिदंबरम के पैतृक शहर कराईकुड़ी में भी छापे मारे जा रहे हैं। सीबीआई ने एक कंपनी को एफआईपीबी की मंजूरी दिलाने के मामले में हाल ही में मामला दर्ज कराया है। आरोप हैं कि कंपनी को लाभ तब पहुंचाया गया जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे।
छापों के बारे में पूछे जाने पर पी चिदंबरम ने कहा, ‘‘आपको अपने सीबीआई मित्रों से बात करनी चाहिए थी..क्या मैं (सरकार के खिलाफ) लिखना बंद कर दूं?’’ चिदंबरम ने कहा कि वह चेन्नई में नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मतलब है.. यह पूरी तरह बकवास है।’’ केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के धुर विरोधी पी. चिंदबरम पहले कह चुके हैं कि उनके अथवा उनके पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज करा कर केन्द्र के खिलाफ उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
चिंदबरम ने कहा कि प्रत्येक मामले में कानून के हिसाब से कार्रवाई की गई और भारत सरकार सरकार के पांच मंत्रालयों से मिल कर बने एफआईबीपी की अनुशंसा के अनुरूप ही मंजूरी दी गई अथवा मामले को नामंजूर किया गया।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कार्ति चिदंबरम ने वित्त मंत्रालय में अपनी पहुंच का इस्तेमाल किया। आईएनएक्स मीडिया ने तीन प्रवासी उपक्रमों- डेनअर्न, एनएसआर पीई और न्यू वेरोन प्राइवेट इक्विटी लिमिटेड को कम से कम 14.98 प्रतिशत इक्विटी शेयरों के तरजीही आवंटन जारी करने की अनुमति के लिए 13 मार्च 2007 को एफआईबीपी मंजूरी की मांग की थी। कंपनी ने यह मंजूरी टीवी चैनलों के समूह का व्यापार शुरू करने, संचालन प्रबंधन तथा प्रसारण के लिए मांगी थी।
एफआईपीबी इकाई ने बोर्ड को 18 मई 2007 को होने वाली बैठक में पेश किये जाने वाले संक्षिप्त प्रस्ताव में स्पष्ट किया था कि 4.62 करोड़ रूपए के प्रस्तावित इशुओं में अंकित मूल्य पर एफडीआई को मंजूर किया जा सकता है और आईएनएक्स न्यूज में निवेश के लिए एफआईपीबी की अलग से मंजूरी लेनी होगी। बोर्ड ने आईएनएक्स मीडिया के प्रस्ताव की अनुशंसा करते हुए उसे वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया था लेकिन आईएनएक्स न्यूज के लिए कोई अनुशंसा नहीं की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने अनुशंसाओं को मंजूर कर लिया था।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *