Breaking News

चिन्तनः भक्त प्रहलाद की जय……. डॉ. घनश्याम बटवाल

मंदसौर में 17 जनवरी, गुरुवार की शाम सूर्य अस्त होने के साथ ही अंचल के बहुसंख्य वर्ग का चहेता मौत के घाट उतार दिया गया। आप – हम, जिसने सुना सभी स्तब्ध, अवाक् रह गये। कोई यकीन करने को तैयार नहीं हुआ और अन्ततः यही सच निकला नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रहलाद बंधवार की गोली मारकर सरेराह हत्या कर दी गई। घटना हदय विदारक हुई। सदमें और शोक में डुब गये हर कोई। अंतिम संस्कार हुआ, छोटे से बड़े तक, हर वर्ग और हर धर्म से जुड़े लोग, महिलाओं सहित भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित करने शामिल हुए। दुःख बांटने के लिये परस्पर कातर भाव से व्यक्त होते रहे -रोते रहे।

समय ही एसे समय सबसे बड़ा मरहम बनता है। अब यथार्थ से सामना करना होगा? घटना को अंजाम देने वाला बताया गया, पकड़ा गया ? राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस ने मिलकर पकड़ा? जैसा कि बताया गया, फिर मंदसौर पुलिस कंट्रोल रुम पर मीडिया समक्ष ‘‘मेडल जीतने वाले तीर -दाज‘‘ की तरह प्रस्तुत किया गया। आरोपी की कहानी जो ‘‘रची हुई‘‘ प्रतीत होती है पुलिस ने सुर में सुर मिलाते हुए न्यायालय से पुछताछ के नाम रिमान्ड पर ले लिया। अब हकीकत में क्या ‘‘सच‘‘ निकलकर आता है इस पर सबकी निगाह है। क्यों कि ‘‘रची हुई कहानी ‘‘ कोई स्वीकार नहीं कर पा रहा है ?

जो भी हो मंदसौर के इतिहास में एक कलंक और जुड़ गया। किसी जनप्रतिनिधि, निर्वाचित अध्यक्ष राजनीतिक दल के नेता, पद पर आसीन व्यक्ति की यह पहली हत्या है। हर वर्ग -हर धर्म – हर समाज से जुड़े और सर्व सुलभ -सहज व्यक्तित्व के धनी श्री प्रहलाद बंधवार की हत्या अपने आप में अप्रत्याशित है।

किन्तु -परन्तु की कडि़यां जोड़कर कयास लगाने का सिलसिला जारी है। पर सच यही है कि मंदसौर में अनहोनी हो गई यह हत्या सबको खबरदार करते हुए चेतावनी भी दे गई। अब सामान्यजन की सुरक्षा भी शक के घेरे में है? लेन देन एक सामान्य गतिविधि है जो सामान्यतया प्रचलित है और विश्वास आधार पर चल रही है इतना खतरनाक अंजाम होगा ? इतनी मामूली राशि के लिये कल्पना भी नहीं की जा सकती। और वह भी एसे व्यक्ति के साथ, नजदीक रुप से जुड़े व्यक्ति द्वारा ? भयानक है, क्या परिस्थितियां इतनी बिगड़ गई थी ? सच, सामने आना ही चाहिये।

यह जानकारी सामने आई हैं कि आरोपी और उससे जुड़े सत्ताधारी दल के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों सहित अन्य के सम्पर्क में रहे हैं आरोपी, अपराधों में संलिप्त भी पाये गये हैं पूर्व मे अपराध दर्ज भी हैं तब ही निरंकुश बन एसी वारदात को अंजाम दे दिया जिसके बारे में सोचने से ही सिहरन दौड़ जाती है। यहां पर पुलिस का दावा सच नहीं लगता कि हाल ही में विधानसभा चुनावों के दरम्यान आचार संहिता के चलते जिले में 10 हजार से अधिक लोगों पर प्रतिबंधात्मक धारा लागु की गई, जाप्ता फौजदारी धारा 110 के अन्तर्गत डेढ़ हजार से अधिक पर कार्रवाही हुई। शांति भंग धारा 151 में साढे़ तीन सौ लोगों को बाउन्ड ओवर किया गया। जिला बदर के अन्तर्गत 16 के विरुद्ध आदेश पारित किये गये। रासुका, एन डी पी एस, सफेमा, में कार्रवाही की। 100 से अधिक हथियार, तीन दर्जन आग्नेयशस्त्र , तीन दर्जन जिन्दा कारतूस पकड़े गये, ढाई सौ प्ररकणों में लगभग? 7 हजार लीटर अवैध शराब पकड़ी गई फिर भी आरोपी व अन्य के पास अवैध हथियार मिले एन डी पी एस मादक द्रव्य पकड़े जा रहे अर्थात आंकड़े तो बड़े बने अपराध भी पलते रहे।

स्याह पहलु हरेक के होते है, कोई अछुता नहीं। समर्थन और समर्थक अपने ‘‘आका‘‘ से संरक्षण से उत्साहित होते रहे हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता पिछले एक दशक मे सत्तारुढ़ दल के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों ने बखुबी एसे तत्वों को पोशित किया है इसमें तत्कालीन विपक्ष के नाम विलोपित नहीं किये जा सकते। अधिकारियों -पुलिस -पक्ष -विपक्ष का सिन्डीकेट भी बनता बिगड़ता रहा। छोटे -बड़े अपराधों को नजर अंदाज करता रहा। हर बात पर पुलिस -शासकीय विभाग -अधिकारी -हर स्तर पर समर्थन के लिये, समर्थकों के लिये अवांछित हस्तक्षेप किये जाते रहे। आज यह नासूर बनकर व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा।

संदिग्ध गतिविधियों से संलग्न व्यक्ति, चाहे कोई भी हो उसमें ‘‘अपना‘‘ हित साधना, प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रुप से समर्थन करना, चाहे- अनचाहे, सहयोग करना, गुटों में बंटे दलों, -माफियाओं -नेताओं द्वारा उनका ‘‘उपयोग ‘‘ करना एसे कारणों की यह एक अत्यंत बुरी परिणिती है। चेतावनी दे गई है श्री प्रहलाद बंधवार की हत्या।

गलतियां प्रहलाद जी ने भी की है, मौके ब मौके उन्हैं अहसास भी हुआ, समय -समय पर उन्है बताई भी जाती रही है परन्तु ‘‘सबक‘‘ नही लिया। आज अपराध केवल मादक द्रव्य परिवहन, मारपीट, हत्या, बलवा या बलात्कार ही नहीं हैं इससे भी बड़े आर्थिक अपराध घटित हो रहे है। शंका व्यक्त की जा रही है कि अवश्य श्री बंधवार की हत्या के पीछे भी यही है। यह कौन है? कैसे हैं ? क्यों हैं ? सच सामने आना चाहिये।

रिश्तों को निभाना, सहजता -सरलता से उपलब्ध रहना, विन्रमता से पेश आना उनके गुण रहे तो क्या इन्हीं गुणों ने उनकी बलि चढ़ाई ? यह आज हर काई जानना चाहता हैै।

हमसे चाहे दिन में दो बार या हफते में चार बार चाहे जब भी मिलना होता हम सदैव ‘‘भक्त प्रहलाद की जय‘‘ कर स्वागत करते, और वे मुस्कुराते हुए झुककर अभिवादन करते और हम झुकने के पूर्व उन्हें सस्नेह गले से लगाते। वर्शों से यह क्रम रहा। आज महसूस हो रहा है जैसे कोई अपना छोटा भाई सदा के लिये अलविदा हो गया।

यह भी पहली बार हुआ है कि प्रदेश की सबसे बड़ी और लगभग सबसे पुरानी सन् 1895 से स्थापित नगर पालिका के अध्यक्ष की हत्या हुई जो वहीं यह भी तकरीबन पहली बार है कि नगर पालिका अध्यक्षीय कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया है।

अपूरणीय रिक्तता छोड़ गये हैं श्री प्रहलाद जी नगर और अंचल के वाशिन्दों केा चिन्ता करना चाहिये कि एसे हालातों में अब कौन सुरक्षित है ,कैसे महफूज है। बेशक हत्यारा कहीं न कहीं उनसे जुड़ा हुआ हो पर समर्थन करने वाला या समर्थक ही जानलेवा हो तब क्या होगा ? यह समझना हर वर्ग के लिये, राज नेताओं, के लिये प्रशासन और पुलिस के लिये अत्यन्त जरुरी हो गया है कि आपके आसपास कौन है ? कैसे लोग समर्थक है ? उनकी गतिविधियां क्या हैं ? तभी कुछ उम्मीद बचती है। वरना तो ‘‘मिस्डकॉॅल‘‘ की सदस्यता हत्यारों की जमात ही बढ़ायेगी। पूरे अर्न्तमन से प्रिय भक्त प्रहलाद की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना करते है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts