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छोटी सी शुरुआत से पूरे होंगे आपके बच्‍चों के सपने

हम भारतीयों के लिए बच्चों के भविष्य की प्लानिंग करना हमेशा से एक अत्यधिक भावनात्मक पहलू रहा है। अपने बच्चे का भविष्य अच्छे से अच्छा बनाने के लिए हमारे यहां मां-बाप अपनी हर खुशियों से समझौता करने को तैयार रहते हैं। पर, अब हमें बदलती जरूरतों और जीवनशैली के साथ अपने बच्चे के भविष्य की योजना बनाते समय भावनात्मक होने की बजाय अधिक व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए। अमूमन, बच्चों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग में हम लंबी अवधि की जरूरतों, मसलन बच्चे के शिक्षा, शादी आदि पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन हमें लघु अवधि में और बार-बार होने वाले खर्चों के बारे में भी जरूर ध्यान देना चाहिए.

एक सबसे उपयोगी सलाह है कि हमें शादी के साथ ही अपने बच्चे के संभावित खर्चों के लिए प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए। इसकी शुरुआत sip या लिक्विड म्यूचुअल फंड में निवेश के साथ की जा सकती है। इससे प्रत्येक माह बच्चे के टीकाकरण, दवाइयां, बेबी फूड आदि पर होने वाले खर्चों का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है। यदि आप तत्काल फैमिली बढ़ाना नहीं चाहते हैं, तो भी sip या लिक्विड फंड में जमा की गई छोटी राशि भविष्य में जब भी आप इस पहलू पर विचार करेंगें, आपकी नकदी की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।

खोलें बच्चों के बैंक व पीपीएफ अकाउंट
बच्चे के नाम पर एक बैंक अकाउंट जरूर खोलें और संबंधियों, दादा-दादी या अन्य किसी परिचित से ‘शगुन’ के तौर पर मिलने वाले नकदी उपहार को उसमें जमा करें। इस पैसे का इस्तेमाल कभी भी अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए न करें। यदि आप अपने बजट से अधिक खर्च करते हैं, तो बेहतर यही होगा कि अपने बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाएं और उसे कम करें। अपने बच्चे के नाम पर एक पीपीएफ अकाउंट जरूर खोलें और उसमें बच्चे के बैंक डिपाजिट का एक बड़ा हिस्सा नियमित तौर पर निवेश करें। यह पीपीएफ अकाउंट लंबी अवधि में आपके बच्चे की जरूरत के समय मददगार होगा। पीपीएफ अकाउंट की मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि करमुक्त होती है।

कर्ज से लेकर बचत खाते तक के विकल्प
परिवार के बदलते खर्चों, लघु अवधि की जरूरतों और बच्चे की लंबी अवधि की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आप अपने जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की समीक्षा करें और जीवन बीमा कवर की सम एश्योर्ड राशि में बढ़ोतरी कराएं। इस बारे में अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा करें और अपने लिए उचित जीवन बीमा कवर की राशि जान लें। यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त बीमा है और वह नियमित तौर पर अनुशासित रूप से निवेश करता है, तो वह कम से कम खर्चे पर अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। जीवन बीमा पॉलिसी की समीक्षा करने के साथ-साथ बच्चे का नाम भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में शामिल और उसका कवर भी निश्चित रूप से बढ़वा लेना चाहिए। वेतनभोगी कर्मचारी को केवल नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई पॉलिसी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, उन्हें अलग से अपना पर्याप्त मेडीक्लेम कवर जरूर लेना चाहिए।

जोखिम और निवेश अवधि का रखें ध्यान
चाइल्ड फ्यूचर प्लानिंग के लिए भी कमोबेश उन्हीं निवेश विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका उपयोग अन्य दूसरे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए होता है। इसलिए, आपको निवेश पर मिलने वाले रिटर्न, उन पर करदेयता, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करके ही उचित निवेश प्रोडक्ट का चयन करना चाहिए। तमाम अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि लंबी अवधि की बचत के लिए इक्विटी में निवेश सबसे बेहतर विकल्प है लेकिन यदि आप उसमें निवेश करने के बाद अपनी मानसिक शांति गंवा देते हैं, तो यह आपके लिए उपयुक्त नहीं है। अपने वित्तीय सलाहकार से जोखिम उठाने की क्षमता का उचित आकलन कर उसकी सलाह से वाजिब एसेट क्लास में निवेश शुरू कर सकते हैं।

महंगाई के दौर में जब स्कूल फीस भी जेब पर भारी पड़ रही है, ऐसे में आप एक बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकते हैं।

बैंकों में बचत खाता खुलवाने की सुविधा-
निजी क्षेत्र का बैंक एचडीएफसी ‘किड्स एडवांटेज अकाउंट ’ के तहत सात साल से 18 साल तक के बच्चों को खाता खोलता है। खाते पर बच्चे को एटीएम कम डेबिट कार्ड की सुविधा मिलती है। बैंक खाते पर बच्चे को एक लाख रुपये तक का एजुकेशन बीमा मुफ्त में देता है। खाते में 5000 रुपये का औसत मासिक बैलेंस रखना अनिवार्य है। इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक एक दिन से लेकर 18 साल के बच्चों का बचत खाता खोलता है। इसमें न्यूनतम औसत राशि 2,500 रुपये होना अनिवार्य है।

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