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जनआंदोलन की परिणीति के अपना सेहरा ना बनाएं जनप्रतिनिधि- नाहटा

छह वर्षों के सतत संघर्ष का परिणाम है मिड इंडिया फाटक अंडरब्रिज

मंदसौर। तेलिया तालाब पर चुप्पी साधे जनप्रतिनिधियों का मिड इंडिया ब्रिज अंडरब्रिज स्वीकृत होने पर सेहरा बंधवाने पहुंचना किसी हास्यास्प्द स्थिति से कम नहीं है। जो सौगात जनता के सतत आंदोलन और जनआंदोलन के संघर्ष से प्राप्त हुई हो, उसे कैसे कोई खुद की मेहनत बताकर वाहवाही लूट सकता है। लेकिन, जुमलेबाज केन्द्र और घोषणवीर राज्य सरकारों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसमें महारत हासिल है। यह बात युवा कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष सोमिल नाहटा ने अपने एक बयान में कही।

श्री नाहटा ने कहा कि मिड इंडिया फाटक पर अंडरब्रिज के लिए जनता लगातार संघर्ष करती रही। इसके लिए धरना, आंदोलन, ज्ञापन, प्रदर्षन सभी किए गए। तब जाकर जनता के सतत दबाव से रेलवे ने मिड इंडिया फाटक पर अंडरब्रिज स्वीकृत किया। इस ब्रिज की स्वीकृति के लिए किसी की तारीफ की जानी चाहिए तो वह है उस क्षैत्र की जनता की जो समस्त तारीफों और श्रेय की हकदार है। जो सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करते रहे। किन्तु भाजपा के जनप्रतिनिधि विधायक और नपाध्यक्ष जनता की जीत का श्रेय लेने स्वयं पहुंच गए और इसे अपनी उपलब्धि बताकर कसीदे पढ़वा लिए। जबकि जनप्रतिनिधियों ने ठीक ढंग से प्रयास किए होते तो पटरी पार की जनता को अंडरब्रिज के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। सच तो यह है कि जनप्रतिनिधियों ने रेलवे के आगे हाथ टेक दिए थे। ये तो जनता का संघर्ष है जो रंग लाया और रेलवे को ब्रिज निर्माण की अनुमति देना पड़ी। संघर्ष में एडव्होकेट महेश मोदी, कंातिलाल राठौर, गोपाल गुप्ता, अनिल शर्मा जैसे रहवासियों को बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होने लगातार ब्रीज की मांग को उठायें रखा और सफलता प्राप्त की।

श्री नाहटा ने कहा कि अंडरब्रिज की स्वीकृति के लिए वे संघर्षरत रहे पटरी पार की कॉलोनियों के निवासियों को बधाई देते हैं, जिनकी पहल और प्रयास के आगे रेलवे को भी झुकना पड़ा। जनप्रतिनिधियों को स्वयं श्रेय लेने की बजाय सच्चाई स्वीकारते हुए जनता का सम्मान करना चाहिए, जिनके प्रयासों से ब्रिज निर्माण का मार्ग प्रषस्त हुआ है। श्री नाहटा ने कहा कि यदि भाजपा सरकार सच में जनहितेषी है तो राषि स्वीकृति की औपचारिकताओं को तत्काल पूर्ण किया जाकर इसका निर्माण प्रारंभ करना चाहिए।

जनता ने बता दिया सब कुछ संभव
श्री नाहटा ने कहा कि अंडरब्रिज की स्वीकृति यह बताती है कि जनता चाहे तो सब संभव है। सतत आंदोलन और प्रयासों ने अकर्मण्य जनप्रतिनिधियों और हठी अधिकारियों को झुकने पर मजबूर किया है।

श्रेय की होड़ नहीं क्रियान्वयन पर दें ध्यान
श्री नाहटा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को श्रेय की होड़ में दौड़ने की अपेक्षा अंडरब्रिज निर्माण के क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। वैसे भी यह सरकार घोषणावीर और लेतलाली वाली सरकार है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को ब्रिज निर्माण के क्रियान्वयन की समय सीमा और उसका पालन अभी से स्पष्ट करना चाहिए।

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