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जन अभियान परिषद् ने सिद्ध कर दिया कि हर सरकारी काम में भारी भ्रष्टाचार होता है!

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प्रसंग शिवना शुद्धीकरण का : भूतभावन के घाट चमके, शिवना हुई निर्मल

नदी का ऐसा स्वरूप आज तक नहीं देखा था

मंदसौर जन अभियान परिषद ने नगर की जलप्रदायनी शिवना नदी जिसको शहरवासी मॉ का दर्जा देते है उस की दशा सुधारकर यह सिद्ध कर दिया कि हर सरकारी काम में भारी भ्रष्टाचार होता है। जन अभियान परिषद् ने नगर की जनता की मदद से शिवना को जो स्वरूप दिया है उसे नगर की नई पीढ़ी ने तो कभी नहीं देखा था। लम्बे समय से शिवना नदी जनप्रतिनिधियों की उदासिनता का शिकार हो रही थी कोई नदी की सूध लेने को तैयार नहीं था। नदी नाले में तब्दील हो गई थी। लेकिन जन अभियान परिषद् ने आज शिवना नदी का सौन्दर्यकरण कर निखार दिया। शासन करता तो हाल कुछ और ही होते शिवना का सौन्दर्यकरण का काम जन अभियान परिषद् ने अपने हाथो में लिया और अब इसे अंजाम तक पहुंचाने का कार्य जारी है। यदि यह काम कोई सरकारी एजेन्सी या विभाग करता तो निश्चित रूप से यह कार्य भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता और काम में भी गुणवत्ता भी नजर नहीं आती और करोड़ो रूपये खर्च हो जाते सो अलग।

इस पर भी विचार हो सकता है
शासन करोड़ो रूपये खर्च कर अनेकों निर्माण कार्य करवाती है। सरकारी प्रक्रिया के अनुसार टेण्डर निकाले जाते है ठेकेदार को नियुक्त किया जाता है। जन अभियान परिषद् ने जिस तरह सामाजिक संगठनों और सामाजिक लोगों को साथ में लेकर शिवना का सौन्दर्यकरण किया है। उससे एक नई बात भी सामने आई है कि सरकारी हर काम चाहे भवन निर्माण हो, पुल निर्माण हो, सड़क निर्माण हो या अन्य कोई कार्य इन्हें भी शासन द्वारा सामाजिक संगठनों को बीच में डालकर करवाना चाहिए जिससे निर्माण भी अच्छा होगा और पैसों का दुर्पयोग भी बचेगा। इस पर भी विचार जिम्मेदारों द्वारा किया जा सकता है। क्योंकि इस फॉर्मूले को जन अभियान परिषद् ने प्रेक्टिकली सिद्ध कर दिया है।

60 फीट के घाट अब 140 के
नदी के घाट जो 60 फीट तक सीमित हो गए थे वह अब बढ़कर 140 फीट चौड़े हो गए। पूरे अभियान के दौरान 150 सामाजिक संगठन एवं संस्थाओं के तकरीबन 12 हजार व्यक्तियोंने श्रमदान किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों से 14 लाख रुपए की घोषणाएं अब तक हो चुकी है। एक माह में अब गहरीकरण दिखने लगा है। श्रमदानी प्रातः 7 से 8 बजे तक श्रमदान करते हैं। छोटी पुलिया से मुक्तिधाम के बीच गहरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक शिवना नदी से 5500 ट्रॉली एवं 1200 डंपर गाद निकाली जा चुकी है। वर्षा नहीं आती है तो अभियान 15 जून तक चलेगा।

शिवना घाट बना अब सेल्फी जोन- श्री पशुपतिनाथ मंदिर स्थित शिवना घाट अब सेल्फी जोन बनता जा रहा है। पहले लोग तैलिया तालाब पर ही जाते थे लेकिन अब जब से शिवना का पानी साफ हुआ है और घाट पर मालवी एवं राजस्थानी संस्कृतिकी मांडना कारीगरी उकेरी गई तब से घाट की सुंदरता को चार चांद लग गए है । बाहर से आने वाले पर्यटक अब भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव के दर्शनोंके बाद घाट पर पहुंचकर सेल्फी लेते हैं और अपना समय घाट पर बिताते हैं। कोर कमेटी के सदस्य डॉ. क्षितीज पुरोहित, प्रकाश सिसौदिया, मनीष भावसार, विनय दुबेला एवं जितेन्द्र गेहलोत बताते हैं कि यह अभियान अब महाअभियान बन गया है। नगरपालिका एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आगामी दिनों में घाट और सुंदर होगा। श्रमदानियों की मेहनत रंग लाएगी।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
शिवना घाट का सौन्दर्य बढ़ाने में बैंक के अध्यक्ष मदनलाल राठौर, विनोद कुमार मेहता, अजीज उल्लाह खां खालीद, बंशीलाल टांक, कपिल मावर, मदन माली, किरण मावर, सत्येन्द्र सिंह सोम, कवि मुन्ना बेटरी, राजाराम तंवर, प्रदीप गुप्ता, सुरेश देवड़ा, श्रवण रजवानिया, बाबा पंचोली, महेश दुबे, राम बघेल, राजेश चौहान, सुनील पोरवाल, रवि ग्वाला, गोविंद नागदा, घनश्याम भावसार, मनीष खत्र्ाी, दीक्षा नागौरे, चेतना वातरा, वर्दीचन्द्र श्रीमाल, मंगेश नवले, शोकिन नलवाया, हरीश साल्वी, पवन हिरीया की भूमिका महत्वपूर्ण रही। यह लोग प्रतिदिन घाट पर श्रमदान करते पहंुचते है। वहीं कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने भी निजी रूप से रूचि लेकर अभियान में सहभागिता की और उसे आगे बढ़ाया।

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