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जमा कराने बुलवाया मन्दसौर SBI बैंक मे, हो गई मौत

शहर की भारतीय स्टेट बैंक में बुधवार को जमा रूपये जमा करने पहुंचे वृद्ध खानपुरा निवासी शांतिलाल जैन के 40 हजार रूपये 5 दिन बाद भी जमा तो नहीं हुए पर लकवा ग्रस्त इस व्रद्ध की रविवार सुबह मौत हो गई। 22 दिसंबर को ये वृद्ध अपने पुत्र के साथ बैंक गया था, जहां लकवा होने की वजह से वृद्ध को अंत समय तक बैंक मैनेजर ने रुपए नहीं दिए थे व खाली हाथ वृद्ध को वापस आना पड़ा था।
पाँच दिन पहले अपने खून पसीने की कमाई में से बचाई 40 हजार की राशि को व्रद्ध शांतिलाल मुखर्जी चोक शाखा में बेटे को लेकर जमा कराने गया था। मन्दसौर स्टेट बैंक के प्रबंधक ने यह कह कर राशि जमा करने से इंकार कर दिया था कि व्रद्ध जब तक बोलेगा नही राशि जमा नहीं करूँगा। जबकि मुह पर लकवा होने से व्रद्ध बोलने की अवस्था में ही नहीं था। उसके बेटे ने तीन घंटे मेनेजर से मिन्नतें भी की थी पर मैनेजर का दिल नही पसीजा । एडीएम और लीड बैंक को शिकायत भी की। मीडिया ने भी हस्तक्षेप किया। इसके बाद भी मेंनजर का दिल नही पसीजा। मैनेजर के खिलाप भी 4 दिन में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई वही दूसरी और वृद्ध शांतिलाल जैन का रविवार को सुबह निधन हो गया।
नहीं पसीजा जरा भी
हैरत की बात तो यह रही कि इस मामले में स्वयं मन्दसौर लीड बैंक के मैनेजर सुधीर कुमार ने भी पहले ही दिन न्याय दिलाने और रूपये जमा हो जाने की बात कही थी, लेकिन उसके बावजूद मुखर्जी चौक शाखा के प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और इसी बीच बैंक की छुट्टियां लग गयी।
ये है उस दिन का घटनाक्रम
लकवा रोग के कारण नि:शक्त हुआ व्यापारी अपने बेटे के साथ बैंक तो गया, पर बैंक प्रथम तल पर थी, लिहाजा खाते में रुपए जमा करवाने के लिए बेटे को भेजा। बेटे ने पिता को प्रथम तल पर आने में असहाय बताकर मिन्नते की, पर मैनेजर का दिल नहीं पसीजा। हांलाकि कार्रवाई से बचने के लिए मैनेजर उतरकर व्यापारी के पास आया। मुंह पर लकवा होने के कारण व्यापारी बोल नहीं पा रहा है। उसके बेटे से व्यापारी से 40 हजार रुपए जमा करवाने की बात बुलाने की कही। असहाय व्यापारी बोल नहीं पाया। तो मैनेजर ने भी नियमों का हवाला देकर रुपए जमा नहीं किए। तीन घंटे की मिन्नतों के बाद भी जब मैनेजर का दिल नहीं पसीजा तो किसी ने मीडिया को खबर की। मीडिया ने सारे वाकिया एडीएम अर्जुन सिंह डाबर को बताया। इस पर डाबर ने लीड बैंक के मैनेजर सुधीर कुमार से बात कर समस्या सुलझाने को कहा। पिता की बीमारी का हवालालीड बैंक मैनेजर ने गुरुवार को व्याापारी के रुपए खाते में जमा करने की बात कही है।

असमर्थ होने के कारण नीचे रुके
सनराइज स्टेशनरी के संचालक लकवा बीमारी से पीडि़़त शांतिलाल जैन बेटे राजेश के साथ मुखर्जी चौक स्थित स्टेट बैंक पहुंचे। यहां पर शांतिलाल बैंक में जाने में असमर्थ होने के कारण नीचे रुके। बेटा राजेश पांच-पांच सौ रुपए के 40 हजार रुपए बैंक में उनके खाते में जमा करवाने गया। यहां पर मैनेजर दिलीपजैन ने शांतिलाल से रुपए जमा करवाने की बात एकबार बोलने की कही। इस दौरान राजेश ने कई बार बैंक मैनेजर को पिता की बीमारी का हवाला देकर निवेदन किया।बात करने से मना कर दिया काफी देर निवेदन के बाद मैनेजर बेटे के साथ बैंक के नीचे शांतिलाल के पास पहुंचा। यहां मैनेजर ने उनसे बुलवाने की बात कही, लेकिन बीमारी के कारण शंातिलाल नहीं बोल पाए। उसके बाद मैनेजर ने नियमों को हवाला देकर रुपए जमा करने से मना कर दिया। करीब तीन घंटे तक यह सब चलता रहा। जब बैंक मैनेजर दिलीप जैन से पूछा तो उन्होंने इस संदर्भ में बात करने से मना कर दिया।

हमे दुख है
हमने शुक्रवार को ही बैंक मैनेजर को कहा था कि मेरे कार्यालय से एक गवाह भेज दूंगा। तब आप रुपए जमा कर लेना। इस पर सहमति भी बन गई थी। और तय हुआ था कि सोमवार को सुबह बैंक में रुपए जमा कर लेंगे, पर उनकी मृत्यु हो गई। इसका हमें भी काफी दुख है।

– सुधीर कुमार, लीड बैंक अधिकारी

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