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जमीन विवाद में हुए ठन्ना मर्डर केस में 11 मे से 7 आरोपी दोषमुक्त

मंदसौर। दलौदा में रिलायंस पेट्रोल पम्प के पास स्थित विवादित प्लॉट को लेकर हुई मंदसौर के इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी वीरेंद्र ठन्ना की हत्या के मामले में एक बार तो मुख्य गवाह होस्टाइल हो गए थे। इसके बाद मामले के एक और आरोपित जमील की गिरफ्तारी के बाद जब दोबारा बयान हुए तो मुख्य गवाह ने सही गवाही दी। इसी आधार पर इस मामले में हत्याकांड के मास्टर माइंड आजम पिता कयूम खान लाला और तीन अन्य को आजन्म कारावास सुनाया गया।

चिन्हित जद्यन्य सनसनीखेज प्रकरण में माननीय चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री जयंत शर्मा सा. मदंसौर के द्वारा जमीन विवाद के संबंध में सनसनीखेज हत्याकांड मामले में दिनांक 12-03-2019 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए 11 आरोपीयों मे से 7 आरोपी राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह, दिलीपसिंह, रफीक, बाबु फकीर, व जमील को दोष मुक्त किया व शेष आरोपी  आरोपीगण 1-सरफराज उर्फ शानु पेचकस पिता मुन्नाखां उर्फ मुनव्वर 24साल नि0 कच्चीबस्ती प्रतापगढ, 2-अरमान उर्फ समीर उर्फ विक्की पिता सलीम खान 23साल नि0 37/11 गोदं शाह उज्जैन हालमु0 इंद्रा कॉलोनी झुग्गी मदंसौर, धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास व 10000 रूपये जुर्माना एवं धारा 25,27 ऑर्म्स एक्ट में 2 साल कारावास व 2000 रूपये जुर्माने से दण्डित किया गया  व 3-रफीक पिता नत्थूखां मुसलमान 33साल नि0 मिर्चीवाडा गोद दरवाजा मदंसौर, 4-आजमलाल पिता कय्यूम लाला 36साल नि0 अखेपूर जिला प्रतापगढ राजस्थान को धारा 302, 120-बी भादवि में आजीवन कारावास व 10000 रूपये जुर्माने से दण्डित किया गया।

घटना इस प्रकार है दिंनाक-30.12.2015 को रात्री 8 बजे के लगभग कालाखेत के इलेक्ट्रानिक्स व्यवसायी वीरेंद्र ठन्ना नि0 शुक्ला कॉलोनी घटना दिंनाक को अपने चचेरे भाई सुरेंद्र ठन्ना के साथ अपनी दुकान बंद करके अपनी मोटर सायकिल से घर शुक्ला कॉलोनी जा रहे थे। वीरेंद्र ठन्ना के पीछे उनका चचेरा भाई सुरेंद्र अपनी मोटर सायकिल से आ रहा था। जब वीरेंद्र ठन्ना सुचित्रा टॉकिज तक पहूंचा था कि तभी अचानक सामने से मोटर सायकिल पर तीन लडके आकर रूके ओर नीचे उतर कर दो लडको ने पिस्टल निकाल कर वीरेद्र ठन्ना पर पिस्टल से फायर कर दिए गोली लगने से वीरेद्र ठन्ना निचे गिर गए। हमलावर फायर कर अपनी मोटर सायकिल से भाग गए।  पीछे से आ रहे चचेरे भाई सुरेंद्र ने मौके पर एकत्रित लोगो की मदद से वीरेंद्र ठन्ना को शासकीय हॉस्टिल ले गए जहां डॉक्टरों ने परीक्षण उपरांत वीरेंद्र ठन्ना को मृत घोषित कर दिया। प्रकरण में मृतक के चचेरे भाई सुरेंद्र ठन्ना की रिपोर्ट पर से पुलिस थाना शहर कोतवाली के द्वारा अपराध क्र. 733/2015, धारा 302,34 भादवि व 25,27 ऑर्म्स एक्ट का प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना पूर्ण कर धारा 120-बी, 302, 473 भादवि व धारा 25,27 ऑर्म्स एक्ट के अंतर्गत विवेचक निरीक्षक-एमपीसिंह परिहार के द्वारा अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रकरण चिन्हित जद्यन्य सनसनीखेज प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था।

विवेचना में तथ्य पाया गया की वीरेंद्र ठन्ना की दलौदा स्थित जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है जिस बात को लेकर कुछ कुख्यात लोगो के द्वारा न्यायालय के बाहर राजीनामा करने की बात को लेकर वीरेंद्र ठन्ना को डराया जा रहा था। अनुसंधान में तथ्य सामने आया कि वीरेंद्र ठन्ना की पत्नि के द्वारा बताया गया की हत्या के पूर्व मोटर सायकिल पर लडकें हमारे घर के आसपास कई बार चक्कर लगा रहे थे संभवतः इन लोगो ने ही मेरे पति की हत्या की है। अनुसंधान के दौरान गिरतार आरोपीगण की पहचान मृतक की पत्नि से करवाने पर उसके द्वारा घर का चक्कर लगाने वाले लडको की पहचान कर ली गई। अनुसंधान के अनुसार पुलिस के द्वारा 1-सरफराज 2-अरमान 3-राजेंद्रसिंह 4-स्वरूप्सिंह 5-श्यामसिंह, 6-दिलीपसिहं 7-रफीक 8-आजमलाल 9-बाबू फकीर 10-रफीक 11-जमील को प्रकरण में आरोपी बनाया गया । संपूर्ण अनुसंधान उपरांत माननीय न्यायालय में आरोपीगण के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की गयी। जहां पर आरोपीगण के विरूद्ध आरोप विरचीत कर प्रकरण का विचारण प्रारंभ किया गया। प्रकरण के विचारण के दौरान अभियोजन के द्वारा कुल-31 साक्षीयों के कथन न्यायालय में कराते हूए प्रकरण में संलग्न दस्तावेजों को ऑर्टिकल 1 लगायत 27 तक प्रदर्शित करवाया गया तथा जप्तशुदा ऑर्टिकल को ए लगायत जे तक प्रदर्शित करवाया गया । बचाव पक्ष के द्वारा अपने बचाव में 3 साक्षी प्रस्तुत किए गए

अभियुक्त राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह व दिलीपसिंह के अधिवक्ता के.के.सिंह भाटी ने माननीय न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किये कि कथित घटना का कारण जमीन विवाद हो सकता है परंतु मेरे पक्षकारों का कथित घटना में आपराधिक षडयंत्र में शामिल होने के सम्बंध में अभियोजन की और से प्रस्तुत की गई साक्ष्य विश्वसनीय नही है केवल हेतु के आधार पर अपराध का दोषी नही ठहराया जा सकता है जिससे सहमत होकर माननीय न्यायालय ने राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह व दिलीपसिंह को धारा 302/120 बी भा.द.वि. दोष मुक्त किया गया है।

 

दलौदा में प्लॉट को लेकर चल रहा था विवाद

जांच में पता चला था कि दलौदा में महू-नीमच राजमार्ग पर स्थित ठन्ना परिवार के रिलायंस पेट्रोल पम्प के पास ही स्थित खाली पड़े प्लॉट को लेकर वीरेंद्र ठन्ना के पिता और राजेंद्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह, दिलीपसिंह के बीच न्यायालय में विवाद चल रहा था। और राजेंद्रसिंह व उसके भाइयों ने इस प्लॉट को आजम लाला को एग्रीमेंट करा दिया था। तबसे आजम लाला व उसके गुर्गे ठन्ना परिवार से न्यायालय से केस उठाने पर दबाव बना रहे थे। परिवार के न्यायालय से संबंधित कार्य वीरेंद्र ठन्ना ही देखते थे इसलिए इन पर ज्यादा दबाव बनाया जा रहा था।

वीरेंद्र ठन्नाा की पत्नी ने भी बताया कि हत्या के पूर्व मोटरसाइकिल पर अनजाने लड़के घर के आसपास कई बार चक्कर लगा रहे थे। संभवतः इन लोगों ने ही मेरे पति की हत्या की है।

पत्नी ने भी पहचान लिए थे हत्यारों को

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान स्व. वीरेंद्र ठन्ना की की पत्नी से कराने पर घर की रेकी करने वाले लड़कों की पहचान कर ली गई थी। न्यायालय में प्रकरण के विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा कुल 31 साक्षियों के कथन न्यायालय में कराए। साथ ही दस्तावेजों को भी प्रदर्शित किया।

मंगलवार को न्यायाधीश जयंत शर्मा ने भादसं की धारा 302 के तहत सरफराज उर्फ शानू पेचकस, अरमान उर्फ समीर उर्फ विकी को आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपए जुर्माना एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25,27 के तहत दो-दो साल का कारावास व दो-दो रुपए जुर्माने से दंडित किया गया। व हत्याकांड के षड़यंत्रकारी आजम लाला व रफीक पिता नत्थूखां को भी भादसं की धारा 302, 120 बी के तहत आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। बाक्स

रफीक ने ली थी चार लाख की सुपारी

विवेचना के दौरान कोतवाली पुलिस ने दोनों शूटर सरफराज और अरमान को गिरफ्तार किया था। दोनों ने कबूला था कि रफीक ने वीरेंद्र ठन्ना की हत्या के लिए चार लाख रुपए की सुपारी आजम लाला व कुख्यात शूटर बाबू फकीर से ली थी। प्रतापगढ़ जेल में बंद होने के दौरान ही रफीक की पहचान बाबू फकीर से हुई थी। इसके अलावा सरफराज भी उस दौरान प्रतापगढ़ जेल में बंद था। शूटर अरमान भी रफीक का मौसेरा भाई है।

इन प्रमुख साक्ष्यों ने दिलाई सजा

  • – हत्यारे सरगम स्टेशनरी पर मास्क खरीदने भी गए थे। वहीं उनकी सीसीटीवी में पहचान हुई थी।
  • – हत्यारों की मोटरसाइकिल मास्टर माइंड आजम लाला के घर से जब्त हुई थी।
  • – शूटर अरमान व सरफराज से जब्त पिस्टल से चले हुई कारतूस व वीरेंद्र ठन्ना के शरीर से मिले कारतूस में समानता मिली थी।

 

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