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जरूरतमंद व गरीबों को अब मन्दसौर में नहीं है चिन्ता रोटी, कपड़ा और मकान की 

मन्दसौर। किसी भी व्यक्ति को जीवन यापन के लिये रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है। देश में इस पर फिल्में बन गई। राजनैतिक पार्टीयां इस लुभावने मुद्दे पर चुनाव लड़ती आ रही है। अभी तक सच भी यह है कि, यह मुद्दा प्रश्न ही बना हुआ है। कोई सवा लाख की आबादी के मंदसौर शहर में उक्त तीनों मूलभूत आवश्यकताएं दानदाताओं और समाजसेवियों के भक्ति भाव और पूरी तन्मयता से पूरी हो रही है। बात यहीं तक नहीं दो स्थानों पर तो निःशुल्क चिकित्सा परामर्श व जहां तक रोजमर्रा की आवश्यक दवाईयां है वह भी उपलब्ध कराई जाती है। निःशुल्क भोजन पैकेट की स्थिति तो यहां तक पहुंच गई है कि कुछ समाजसेवियों को तो यह सेवा इसलिये बंद करना पड़ी की नगर में घुम कर जरूरतमंदों व गरीबों को भोजन पैकेट वितरण के समय उन्होंने देखा कि गरीब के पास पहले से एक-दो पैकेट पड़े है।  मन्दसौर में दानवीर समाजसेवियो द्वारा की जा रही इस सेवा के लिये इन पंक्तियों के द्वारा यह कहा जा सकता है कि, ‘‘हाथ से फेंका पत्थर सौं फीट दूर जाता है, बन्दूक से चली गोली एक हजार फीट दूर जाती है, तोप का गोला 5 मील दूर जाता है किन्तु एक गरीब को दिया हुआ रोटी का टूकड़ा तो स्वर्ग के द्वार तक जाता है।’’
देश का मंदसौर शायद ऐसा पहला शहर होगा जहां न कोई भूखा रह सकता है, न कोई नंगे बदन और ना ही किसी को छत की चिन्ता है। यह तो ठीक है, नगर में दो स्थानों पर तो निःशुल्क चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है। देश में जिस प्रकार मंदसौर जिले की अफीम उत्पादन में ख्याति है, उसी प्रकार मंदसौर की अब रोटी, कपड़ा और मकान के साथ दवाई उपलब्ध कराने में भी एक अभूतपूर्व ख्याति दर्ज हो जाती है तो कोई आश्चर्य नहीं होगा नगर के कुछ दानदाताओं और समाजसेवियों ने भूखांे को भरपेट भोजन, तन पर वस्त्र के लिये पर्याप्त निःशुल्क वस्त्र उपलब्ध कराने का जो बीड़ा उठा रखा है वह बेमिसाल है। रात्रि में विश्राम के लिये यहां 2 रेन बसेरा है। नगर में कोई दर्जन भर से अधिक कबूतर खाने है जहां पक्षियों को अनाज डाला जाता है। नगर के गली मोहल्लों में अब भिखारियों की संख्या नहीं दिखती है तो यह सब निःशुल्क भोजन शालाओं के संचालन का कमाल है। हाँ, कुछ मंदिरों के बाहर जरूर लाईन से भीखारी बैठे हुए दिख जाते है।
मन्दसौर देश का एक ऐसा खुशनुमा, शान्तिप्रिय, दानदाताओं, समाजसेवियों से भरापूरा, ओतप्रोत शहर है। जहां रोटी, कपड़ा, मकान और दवाई के साथ यदी शासन के मनरेगा योजना की चर्चा करे तो रोजगार की भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मन्दसौर के लिये तो अब इन पंक्तियों के माध्यम से कुछ यूं कहा जा सकता हैं कि, ’’ये राहें ले ही जायेगी मंजिल तक, हौंसला रख, कभी सुना है कि अंधेरे ने कभी सवेरा नहीं होने दिया। इन उपलब्धियों पर मंदसौर को दुनिया में कौनसा स्थान उपलब्ध होगा यह आंकलनकर्ताओं को देखना होगा।
हाँ धार्मिक क्षेत्र में भी मंदसौर की एक विशिष्ट पहचान बन गई है। अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव का मंदिर है। इस प्रदेश की धार्मिक नगरी का दर्जा भी इसे मिल गया है। यहां देश-विदेश से दूर-दूर से धर्मालुजनों का दर्शन के लिये आने का सिलसिला शुरू हो गया है। हाँ, कमी है तो बस धर्मशालाओं की है, नगर में कुछ धर्मशालाएं रिसोर्ट में बदल गई है। आज आवश्यकता है तो शहर में दो-चार अच्छे स्तर की सर्वसुविधायुक्त धर्मशालाओं के निमार्ण की है इसके लिये शासन को आगे आना होगा।
मंदसौर में जनकूपुरा क्षेत्र में अन्नक्षेत्र न्यास द्वारा सुबह के भोजन के लिये कोई डेढ़ सौ वर्षों से भोजनशाला का संचालन होता चला आ रहा है। इस न्यास के उपाध्यक्ष सुनिल बंसल ने बताया कि यहां निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है। करीब 30-40 व्यक्ति भोजन के लिये प्रतिदिन आते है, इसके अलावा करीब 10-12 बुजुर्ग व्यक्तियों के लिये उनके घर टिफिन भी भेजे जाते है। उन्होंने बताया कि जब नगर में निःशुल्क भोजन की कोई भी जगह व्यवस्था नहीं थी तब यहां प्रतिदिन लगभग 100 व्यक्ति भोजन करने आते थे।
नईआबादी में जैन आराधना भवन के सामने नवरत्नसागरजी म.सा. के प्रेरणा से श्री कैलाश कर्नावट द्वारा निःशुल्क सुबह के भोजनशाला का संचालन दानदाताओं के सहयोग से किया जा रहा है। वे 7 वर्षों से इसका संचालन करते चले आ रहे है। उन्हें कभी किसी चीज की कमी नहीं हुई। यहां तक की बेटे की शादी या भतीजी की मृत्यु के समय भी यह भोजन शाला निरंतर चलती रही। इस भोजन शाला के संचालन में एक दिन का भी अवकाश नहीं रहा। प्रतिदिन कोई 75 से 100 व्यक्ति यहां भोजन कर रहे है। दानदाता आटा, दाल, तेल जो भी दान में देते है वे यह सामग्र्री इस भोजनशाला के लिये लेते है।
नगर में श्री सुनिल बंजारिया द्वारा शाम के समय रोटी बैंक का संचालन किया जा रहा है। यहां करीब 100 से 150 व्यक्ति निःशुल्क भोजन ग्रहण कर रहे है। नगर के प्रमुख समाजसेवी अनिल चौरड़िया कोई 15 वर्षांे से निःशुल्क भोजन के पैकेट गरीबों व जरूरतमंदों को वितरित करते आ रहे है। करीब 60-65 पुड़ी व सब्जी के पैकेट तैयार कर वे खुद वाहन से गरीबों व जरूरतमंदों को बाटने के लिये निकलते है। 10-12 पैकेट वे अपनी दुकान पर भी रखते है जो गरीबों व जरूरतमंदों को यह पता है और वे यहां से ये भोजन के पैकेट आकर ले जाते है।
नगर में निःशुल्क भोजन के साथ सशुल्क भोजन की भोजनशालाओं का संचालन भी हो रहा है। कोई 25 वर्षों से रोटरी आहार केन्द्र से जिला चिकित्सालय में ईलाज के लिये आने वाले मरीजों के साथ उनके परिजनों के लिये 2 रूपये में पांच रोटी व सब्जी देने की व्यवस्था की गई है। गत वर्ष यह राशि बढ़ाकर 5 रू. की गई है। प्रतिदिन कोई 50-60 व्यक्ति रोटरी की इस सेवा का लाभ ले रहे है। मंदसौर की कृषि उपज मण्डी में 5 रूपये मंे भरपेट भोजन की व्यवस्था चल रही है। इस व्यवस्था मंे 10 रू. मंदसौर मण्डी और 10 रू. जनभागीदारी समिति जोे बालाजी मंदिर के लिये बनाई गई है से प्रति व्यक्ति दिये जाते हैं। यहां कोई 1000 किसान प्रतिदिन 5 रू. में भरपेट भोजन का लाभ ले रहे है। दिनदयाल रसोई केन्द्र के नाम से नगरपालिका मंदसौर द्वारा संचालित की गई भोजन शाला में 5 रू. में भरपेट भोजन दिया जा रहा है। यह भोजनशाला सुबह 11 बजे से शाम 3 बजे तक चलती है। नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार ने बताया कि इस रसोई केन्द्र में 150 से 200 व्यक्ति प्रतिदिन भोजन प्राप्त कर रहे है। ठेेकेदार को 1 रू. किलो गेहूं व 1 रू. किलो चावल प्रदाय किया जाता है। इसके अलावा ठेकेदार समाजसेवी संस्थाओं आदि से भी इस हेतु सहयोग ले सकता है। ठेकेदार मनोज व्यास ने बताया कि उसे निःशुल्क गेहूं व चावल नगरपालिका से मिलता है। वह हर रविवार हलवा भी भोजन में परोस रहा है। समाजसेवी सुनिल बंसल का कहना है कि भोजन की यह व्यवस्था उत्तम है लेकिन इसे शाम के समय भी भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू करना चाहिये।
जैन समाज के अग्रणी व समाजसेवी शांतिलाल भण्डारी द्वारा रविवार को छोड़कर वर्ष 2011 से 10 रू. में 8 पुड़ी या 5 रोटी, सब्जी, अचार के पैकेट जरूरतमंदों को उपलब्ध कराते चले आ रहे है। इस वर्ष 1 जनवरी से पैकेट का मूल्य 12 रू. किया गया है। सुबह के भोजन की इस व्यवस्था में करीब 100 व्यक्ति लाभ ले रहे है।
श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर परिसर में गत वर्ष जन्माष्टमी से श्रीनाथ भक्त मण्डल द्वारा 20 रू. में भरपेट भोजन की भोजनशाला का संचालन शुरू किया गया है। इसके प्रमुख श्री मानसिंह माच्छोपुरिया ने बताया कि 20 रूपये में भरपेट भोजन के तहत दाल, चावल, रोटी, सब्जी व हलवा परोसा जाता है। सुबह-शाम दोनों समय यहां भोजन की व्यवस्था की गई है। सकल जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष श्री नन्दकिशोर अग्रवाल हक्कू भाई का कहना है कि नगर में भोजनशाला का जो काम चल रहा है यह अच्छा है। समाज के पीड़ित वर्ग के लिये इस तरह की सेवाएं दी जाना अच्छी बात है। इस क्षेत्र में और भी सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए।
भोजन के बाद कपड़े की व्यवस्था को देखे तो लोगों में एक नया आनन्द होगा। श्री महावीर पुस्तकालय एवं निःशुल्क जीवनपयोगी सामग्री वितरण समिति के श्री अशोक नलवाया ने बताया कि वे तीन वर्षों से इस समिति का संचालन कर रहे है। इस समिति के द्वारा अभी तक वे करीब 400 परिवारों को कपड़े, बर्तन, जूते, चप्पल, बेल्ट, पर्स, चुड़िया आदि सामग्री प्रदान कर चुके है वे एक व्यक्ति को तीन ड्रेस तक देते है। उनके यहां इन चीजों के जरूरतमंद कभी भी आये और उपलब्ध सामग्रियों को प्राप्त कर सकते है। उनके यहां सभी धर्मों की धार्मिक किताबों को भी वे कोई 7000 व्यक्तियों को दे चुके है। नगरपालिका मंदसौर ने इस वर्ष पालिका के सामने ही एक स्थान बनाकर उसमें आनन्दम् लिखा और उसके अन्दर कपड़े आदि रखे है। कोई भी जरूरतमंद यहां आकर अपनी आवश्यकता अनुसार कपड़े आदि जो भी उपलब्ध है वह ले जा सकता है।
मन्दसौर में हर जरूरतमंद के आनन्दम् के पलों को आगे चलकर देखते है तो पता चलता है कि महंगी चिकित्सा व महंगे चिकित्सालय के इस दौर में निःशुल्क चिकित्सा सेवा भी दानदाताओं व समाजसेवियों के द्वारा शुरू की गई है। नेमीनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के अध्यक्ष श्री राजमल गर्ग ने बताया कि सुबह मंदिर के यहां गरीब, बीमार व्यक्तियों को निःशुल्क देखने के लिये  डॉक्टर की व्यवस्था की गई है। मरीज से कोई फीस नहीं ली जाती है। डॉक्टर आवश्यक दवाईयों की पर्ची लिखकर देते है। सोहनलाल चौरड़िया पारमार्थिक ट्रस्ट के द्वारा पद्मावती रिसोर्ट के बाहर अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। यहां पर 5 रू. की रसीद कटती है जो दो दिन तक मान्य होती है। डॉक्टर मरीज को देखकर दवाईयां लिखकर देते है। रोजमर्रा की कोई दवाई हो तो वह भी निःशुल्क दी जाती है। दोनों जगह करीब 10-10 मरीज इस योजना का लाभ उठा रहे है।
देखिये मन्दसौर बड़े-बड़े दानवीर समाजसेवियों की सेवा से है ना ओतप्रोत। रोटी, कपड़ा और मकान सब कुछ निःशुल्क यही नहीं गरीबों को चिकित्सा भी उपलब्ध है। रात्री में सोने के लिये नगरपालिका द्वारा महाराणा प्रताप बस स्टेण्ड व बालागंज में संचालित है रेन बसैरा। यहां करीब 10-20 व्यक्ति प्रतिदिन रैन बसेरा का लाभ ले रहे है। इसके अलावा भी कुछ गरीब भीखारी रेलवे स्टेशन या बस स्टेण्ड के आसपास रात्री में सोते हुए दिखते है। इस संबंध में नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार का कहना है कि रैन बसेरा में रात्री विश्राम के लिये वोटर कार्ड या परिचय का कोई भी प्रमाण आवश्यक है।
महावीर अग्रवाल
मो.नं. 9425105465

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