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जानिए क्या करें रवि पुष्य योग पर 23 जुलाई 2017 को

प्रिय पाठकों/मित्रों,नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है पुष्य। पुष्य का अर्थ है पोषण करने वाला ऊर्जा और शक्ति देने वाला। नक्षत्रों का राजा पुष्य सभी नक्षत्रों में सर्वोत्तम है। इस नक्षत्र में किया गया प्रत्येक काम अपने साथ सफलता लेकर आता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की इस शुभ काल में खरीद-फरोख्‍त बहुत शुभ मानी जाती है। इस दौरान की गई पूजा सीधे आपके आराध्‍य तक पहुंच जाती है। इस योग के कई अशुभ फल भी हैं इसलिए इस योग में कोई भी मंगल कार्य करने से पहले किसी विशिष्ट विद्वान से परामर्श ले लें।  पुष्य नक्षत्र के दिन अपने आराध्य देव और कुलदेवता का पूजन करना चाहिए.
मान्यता है की पुष्य नक्षत्र में शुक्र का आगमन बहुत ही श्रेष्ठ फल प्रदान करता है। शुक्र की मौजूदगी में किए जाने वाली खरीदारी, उपाय, पूजन आदि जीवन में श्री और वैभव का संचार करते हैं और हमारे मार्ग में आने वाले सभी कंटकों का नाश करते हैं।पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है । माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किये गये कार्य सर्वथा सफल होते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं। पुष्य शनि में शनि के प्रभाव के कारण खरीदी हुई वस्तु स्थाई रूप बनी रहती है और बृहस्पति देव के कारण वह समृद्धिदायी होती है। गुरुवार व रविवार को होने वाले पुष्य नक्षत्र विशेष रूप से फलदायक होता है उसदिन पुष्यामृत योग बनता है। ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगल कर्ता, वृद्धि कर्ता और सुख समृद्धि दाता कहा गया है।
लेकिन यह भी ध्यान दें कि पुष्य नक्षत्र भी अशुभ योगों से ग्रसित तथा अभिशापित होता है। शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र में किया गया कार्य सर्वथा असफल ही नहीं, उत्पातकारी भी होता है। अतः पुष्य नक्षत्र में शुक्रवार के दिन को तो सर्वथा त्याग ही दें। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की बुधवार को भी पुष्य नक्षत्र नपुंसक होता है। अतः इसमें किया गया कार्य भी असफलता देता है।लेकिन पुष्य नक्षत्र शुक्र तथा बुध के अतिरिक्त सामान्यतया श्रेष्ठ होता है। रवि तथा गुरु पुष्य योग सर्वार्थ सिद्धिकारक माना गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की इस रविवार 23 जुलाई 2017 को रविपुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में खरीददारी का उत्तम योग बन रहा है। भूमि,मकान, वाहन वस्तुओं का क्रय-विक्रय इस दिन शुभ माना गया है। साथ ही अपने इष्ट देवों को याद करने के लिए यह उत्तम मुहूर्त रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की विक्रम सम्वत 2074 के श्रावण मास की कृष्ण पक्षीय अमावस्या 23 जुलाई 2017 को पुष्य नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग और ध्वज योग बनने से खरीदारी के लिए यह उत्तम समय रहेगा। इस दिन चन्द्रमा और सूर्य दोनों कर्क राशि में स्थित रहेंगें |
इस दिन प्रातः 09  बजकर 54  मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा (उज्जैन के पञ्चाङ्गानुसार) तत्पश्चात रवि पुष्य नक्षत्र का प्रथम चरण आरम्भ होगा जो दोपहर 15  बजकर 19  मिनट तक रहेगा |
रवि पुष्य नक्षत्र का दूसरा चरण रात्रि 20  बजकर 46  मिनट एक रहेगा |
रवि पुष्य नक्षत्र का तीसरा चरण रात्रि 26  बजकर 14  मिनट तक प्रभावी रहेगा |
श्रावण मास में पुष्य नक्षत्र महालक्ष्मी का नक्षत्र माना जाता है। साथ ही इस दिन देवता यज्ञ रूप में भोजन ग्रहण करने स्वयं आते हैं। इसलिए अपने इष्ट देवों को याद करना, उनको भोग लगाना पुण्यदायी रहेगा। इस तरह का उत्तम योग काफी समय बाद आया है। पुष्य नक्षत्र सुबह 9:53 से शुरू होगा। यह योग 24 जुलाई को सुबह 5:39 पर समाप्त होगा ।लेकिन इस दिन दोपहर 15:19 के बाद खरीददारी का शुभ मुहूर्त रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि इस पुष्य नक्षत्र में खरीददारी स्थायित्व और लाभकारी मानी जाती है।
पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास की अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र होने से गृह-प्रवेश,जमीन का क्रय-विक्रय,सोने और बर्तन की खरीदारी उत्तम और लाभकारी रहेगी। इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व माना गया है। रक्षाबंधन से पहले आने वाला यह योग बाजार में समृद्धि की बाहर लेकर आएगा। रवि पुष्य अपने आप में श्रेष्ठ नक्षत्र माना जाता है।
सोना, चांदी, बर्तन, कपड़ा इलेक्ट्रॉनिक के सामान, बही खाता खरीदी व लक्ष्मी पूजन सामग्री खरीदने का महामुहूर्त है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इसलिए इसमें की गई खरीदी समृद्धि कारक होती है। पुष्य नक्षत्र की धातु सोना है जिसे खरीदने से वस्तु भविष्य में दोगुनी व तिगुनी हो जाती है। इसके विपरित इस योग के रहते कोई वस्तु बेचनी नहीं चाहिए क्योंकि भविष्य में वस्तु दोगुनी या तीन गुनी बेचनी पड़ सकती है।
जानिए रवि पुष्य नक्षत्र योग में क्या किया जा सकता हैं—
—–इस शुभ मुहूर्त में नयी वस्तुएं जैसी गाड़ी, घर, गहने इत्यादि लेना बहुत शुभ होता है।
—-गृह प्रवेश भी इस मुहूर्त में किया जा सकता है ।
—-रत्न, रुद्राक्ष और यंत्रों को भी इस मुहूर्त में अभिमंत्रित किया जा सकता है और पहना जा सकता है ।
—–इस मुहूर्त में किया गया मन्त्र जप ख़ास महत्त्व रखता है एवं विशेष फायदा देता है ।
—-किसी भी तरीके का नया व्यापार या काम इस दिन से शुरू किया जा सकता है।
—-साधना, ज्योतिषीय उपाय, दरिद्रतानाशक उपाय आदि के लिए यह अत्यंत श्रेष्ठ योग है |
—-पुष्य नक्षत्र में “शंख पुष्पी की जड़ को “चांदी की डिब्बी में भरकर उसे घर के धन स्थान / तिजोरी में रख देने से उस घर में धन की कभी कोई भी कमी नहीं रहती है ।
—–इसके अलावा बरगद के पत्ते को भी पुष्य नक्षत्र में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर उसे चांदी की डिब्बी में घर में रखें तो भी बहुत ही शुभ रहेगा ।
—–पुष्य नक्षत्र के योग मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करते हुए उन्हें गुलाब के फूल और पानी वाला नारियल अर्पित करके मां लक्ष्मी के चरणों में सात लक्ष्मीकारक कौड़ियां भी रखें। आधी रात के बाद इन कौड़ियों को घर के किसी कोने में चुपचाप गाड़ दें और माँ से अपने यहाँ स्थाई रूप से निवास करने की प्रार्थना करें । इस उपाय से धन लाभ होने के योग बनते हैं।
—–पुष्य नक्षत्र के दिन पूजा घर में संध्या के समय माँ लक्ष्मी के सामने दीपक में लाल कलावे की बत्ती डालकर घी का दीपक जलाएं । इससे घर में लक्ष्मी का नियमित रूप से आगमन होने लगता है। इसके बाद नियम पूर्वक माँ के सामने रुई की जगह कलावे की बत्ती डालकर ही घी का दीपक जलाया करें ।
—-पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को लाल पुष्प अर्पित करें । इस दिन सांयकाल किसी भी लक्ष्मी मंदिर / मंदिर में माँ को सुगन्धित धूप अगरबत्ती, मिठाई चढ़ाने से माँ अपने भक्त से अति प्रसन्न होती है, सुख सौभाग्य आता है ।
—-पुष्प नक्षत्र के दिन दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिला दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इससे धन लाभ मिलेगा। माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से भी मां की कृपा आप पर बनी रहती है ।
—–पुष्य नक्षत्र के दिन लक्ष्मी की पूजा करते समय चांदी का सिक्का रखें। बाद में इस सिक्के को अपनी तिजोरी में रख दें। इससे आपकी तिजोरी हमेशा पैसों से भरी रहेगी ।
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इस रवि पुष्य पर एकाक्षी नारियल का पूजन बनाएगा धनवान—-
 ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की रवि पुष्य नक्षत्र पर एकाक्षी नारियल का पूजन करने से घर में धन और वैभव बना रहता है. इस नारियल में ऊपर की ओर एक आंख का के जैसे निशान होता है इसलिए इसे एकाक्षी नारियल कहा जाता है. इसे साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है.
रवि पुष्य के दिन यदि इसे विधि-विधान से घर में स्थापित कर लिया जाए तो उस व्यक्ति के घर में कभी पैसों की कमी नहीं रहती है.
आइए जानें कैसे करें इसका पूजन और स्थापना…
– सबसे पहले नहाकर साफ कपड़े पहने. इसके बाद रविपुष्य नक्षत्र के दिन शुभ मुर्हूत में अपने सामने थाली में चंदन या कुंकुम से अष्ट दल बनाकर उस पर इस नारियल को रख दें और अगरबत्ती व दीपक लगा दें.
– अब नारियल को जल से शुद्ध करके फूल, चावल, फल और प्रसाद चढ़ाएं. नारियल को लाल रंग की चुन्नी भी चढ़ाएं.
– इसके बाद आधा मीटर रेशमी कपड़े को बिछाएं और उस पर केसर से यह मंत्र लिखें-
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं महालक्ष्मीं स्वरूपाय एकाक्षिनालिकेराय नम: सर्वसिद्धि कुरु कुरु स्वाहा।
– इस रेशमी वस्त्र पर नारियल को रख दें और यह मंत्र पढ़ते हुए उस पर 108 गुलाब की पंखुडियां चढ़ाएं. हर पखुंड़ी चढ़ाते समय इस मंत्र का उच्चारण करते रहें-
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं एकाक्षिनालिकेराय नम:।
– इसके बाद गुलाब की पंखुडियां हटाकर उस रेशमी वस्त्र में नारियल को लपेटकर थाली में चावलों की ढेरी पर रख दें और इस मंत्र की 1 माला जपें-
ॐ  ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं एकाक्षाय श्रीफलाय भगवते विश्वरूपाय सर्वयोगेश्वराय त्रैलोक्यनाथाय सर्वकार्य प्रदाय नम:।
– अगले दिन से दीपावली तक रोज 21 गुलाब से पूजा करें और उस रेशमी वस्त्र में लिपटे हुए नारियल को पूजा स्थान पर रख दें. इस प्रकार एकाक्षी नारियल को स्थापित करने से घर में धन-वैभव बना रहता है |
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इस रवि पुष्य नक्षत्र पर करें मोती शंख के यह 4 उपाय और जीवन में समृद्धि लाए —
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की मोती शंख एक बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का शंख माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार यह शंख बहुत ही चमत्कारी होता है। दिखने में बहुत ही सुंदर होता है। इसकी चमक सफेद मोती के समान होती है।
—-यदि व्यापार में घाटा हो रहा है तो एक मोती शंख  रवि पुष्य योग पर धन स्थान पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है।
—-रवि पुष्य योग पर मोती शंख को घर में स्थापित कर रोज श्री महालक्ष्मै नम: 11 बार बोलकर 1-1 चावल का दाना शंख में भरते रहें। इस प्रकार 11 दिन तक करें। यह प्रयोग करने से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है।
—-दि रवि पुष्य योग में मोती शंख को कारखाने में स्थापित किया जाए तो कारखाने में तेजी से आर्थिक उन्नति होती है।
—-रवि पुष्य योग पर मोती शंख में जल भरकर लक्ष्मी के चित्र के साथ रखा जाए तो लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
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शक्तिशाली टोटके  दान करने से धन घटता नहीं ,बल्कि जितना देते हैं उसका दस गुना ईश्वर हमें देता है। आयुर्वेद में वर्णित “त्रिफला” का एक घटक “बहेडा” सहज सुलभ फल है। इसका पेड बहुत बडा, महुआ के पेड जैसा होता है। रवि-पुष्य के दिन इसकी जड और पत्ते लाकर उनकी पूजा करें, तत्पश्चात् इन्हें लाल वस्त्र में बांधकर भंडार, तिजोरी या बक्स में रख दें। यह टोटका भी बहुत समृद्धिशाली है। पुष्य-नक्षत्र के दिन शंखपुष्पी की जड घर लाकर, इसे देव-प्रतिमाओं की भांति पूजें और तदनन्तर चांदी की डिब्बी में प्रतिष्ठित करके, उस डिब्बी को धन की पेटी, भण्डार घर अथवा बक्स-तिजोरी में रख दें। यह टोटका लक्ष्मीजी की कृपा कराने में अत्यन्त समर्थ प्रमाणित होता है। धन प्रापि्त के लिए दस नमस्कार मंत्र इनमें से किसी भी एक मंत्र का चयन करके सुबह, दोपहर और रात्रि को सोते समय पांच-पांच बार नियम से उसका स्तवत करें। मातेश्वरी लक्ष्मीजी आप पर परम कृपालु बनी रहेंगी। ओम धनाय नम:                    ओम नारायण नमो नम: ओम धनाय नमो नम:             ओम नारायण नम: ओम लक्ष्मी नम:                   ओम प्राप्ताय नम: ओम लक्ष्मी नमो नम:            ओम प्राप्ताय नमो नम: ओम लक्ष्मी नारायण नम:      ओम लक्ष्मी नारायण नमो नम: धन प्राप्ति हेतु तावीज यहां चार आसान यंत्र हैं। इनमें से किसी भी एक को कागज पर स्याही से अथवा भोजपत्र पर अष्टगंध से अंकित करके धूप-दीप से पूजा करें। चांदी के तावीज में यंत्र रखकर मातेश्वरी का ध्यान करते हुए इसे गले में धारण करें और ऊपर दिए गए किसी मंत्र का नियम से स्तवन भी करते रहें। संसार में सभी व्यक्ति भरपूर धन चाहते हैं और यही कारण है कि मातेश्वरी लक्ष्मी की कृपाएं प्राप्त करने के लिए बडे-बडे अनुष्ठान करते ही रहते हैं। बडे भाग्य से मिलती हैं लक्ष्मीजी की कृपाएं। यही कारण है कि इन सामान्य यंत्रों ओर यंत्रों के पश्चात् आगे परम शक्तिशाली मंत्र, यंत्र और तांत्रिक प्रयोग इस अध्याय में दिए जा रहे हैं। धनप्राप्ति के नौ सुगम मंत्र 1. ओं लक्ष्मी वं, श्री कमला धरं स्वाहा। इस मंत्र की सिद्धि एक लाख बीस हजार मंत्र जप से होती है। इसका शुभारम्भ वैशास मास में स्वाति नक्षत्र में करें तो उत्तम रहेगा। जप के बाद हवन भी करें। 2. ओं सचि्चदा एकी ब्रrा ह्नीं सचि्चदीक्रीं ब्रrा। इस मंत्र के एक लाख जप से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। 3. ओं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं क्रीं क्री क्रीं स्थिरां स्थिरां ओं। इसकी सिद्धि 110 मंत्र नित्य जपन से 41 दिनों में संपन्न होती है। माला मोती की और आसन काले मृग का होना चाहिए। साधना कांचनी वृक्ष के नीचे करनी चाहिए। 4. ओम नमो ह्नीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी ममगृहे धनं चिंता दूरं करोति स्वाहा। प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर एक माला (108 मंत्र) का नित्य जप करें तो लक्ष्मी की सिद्धि होती है। 5. ओम नमो पद्मावती पद्यनतने लक्ष्मीदायिनी वांछ भूत प्रेत विन्ध्यवासिनी सर्व शत्रुसंहारिणीदुर्जन मोहिनी ऋद्धि सिद्धि वृद्धि कुरू-कुरू स्वाहा। ओम नम: क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम:।  इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए साधना के समय लाल वस्त्रों को प्रयोग करना चाहिए और पूजा में प्रयुक्त होने वाली सभी पूजन-सामग्री को रक्त वर्ण का बनाना होता है। इसकी साधना अर्द्धरात्रि के समय करनी पडती है। इसका शुभारम्भ शनिवार या रविवार से उपयुक्त रहता है। 108 बार नित्यप्रति जप करें। छारछबीला, गोरोचन, कपूर, गुग्गुल और कचरी को मिलाकर मटर के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। जप के बाद नित्यप्रति इन गोलियों से 108 आहुतियां देकर हवन करना चाहिए। इस साधना को 22 दिन तक निरन्तर करना चाहिए। तभी लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होती है।  6. ओम नमो पद्मावती पद्मनेत्र बज्र बज्रांकुश प्रत्यक्ष भवति। इस मंत्र की सिद्धि के लिए लगातार 21 दिन तक साधना करनी होती है। इस साधना को आधी रात के समय करना आवश्यक है। साधना के समय मिट्टी का दीपक बनाकर जलाएं। जप के लिए मिट्टी के मनकों की माला बनाएं और नित्यप्रति एक माला अर्थात् 108 मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जाए तो लक्ष्मी देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है।  7. ओम नम: भगवते पद्मद्मात्य ओम पूर्वाय दक्षिणाय पश्चिमाय उत्तराय अन्नपूर्ण स्थ सर्व जन वश्यं करोति स्वाहा। प्रात: काल स्नानादि सभी कार्यो से निवृत्त होकर 108 मंत्र का जप करें और अपनी दुकान अथवा कारखाने में चारों कोनों में 10-10 बार मंत्र का उच्चारण करने हुए फंूक मारें। इससे व्यापार की परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी और हानि के स्थान पर लाभ की दृष्टि होने लगेगी। 8. ओम नम: काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिये व्याली चार बीर भैरों चौरासी बात तो पूजूं मानए मिठाई अब बोली कामी की दुहाई। इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद प्रात: काल स्नान, पूजन, अर्जन आदि से निवृत्त होकर पूर्व की ओर मुख करके बैठें और सुविधा अनुसार 7, 14, 21, 28, 35, 42 अथवा 49 मंत्रों का जप करें। इस प्रक्रिया से थोडे दिनों नौकरी अथवा व्यापार के शुभारम्भ की व्यवस्था हो जाएगी। 9. ओम नम: भगवती पद्मावती सर्वजन मोहिनी सर्वकार्य वरदायिनी मम विकट संकटहारिणीय मम मनोरथ पूरणी मम शोक विनाशिनी नम: पद्मावत्यै नम:। इस मंत्र की सिद्धि करने के बाद मंत्र का प्रयोग किया जाए तो नौकरी अथवा व्यापार की व्यवस्था हो जाएगी। उसमें आने वाले विघA दूर हो जाएंगे। धूप-दीप आदि से पूजन करके प्रात: दोपहर और सायंकाल तीनों संख्याओं मे एक-एक माला का मंत्र जप करें। धन प्राप्ति के लिए शाबर टोटका  दीपावली के दिन प्रात: व्यक्ति बिना स्नान किए, बिना दातुन किए, एक नारियल को पत्थर से बांधकर नदी या तालाब के जल में डुबो दे और डुबोते समय प्रार्थना करे कि शाम को मैं आपको लक्ष्मी के साथ लेने आऊंगा। सूर्यास्त के बाद उस नारियल को जल से निकालकर ले आवें और लक्ष्मीपूजन के साथ उसकी भी पूजा कर भण्डारगृह या संदूक में रख दें तो पूरे वर्ष असाधारण रूप से धन प्राप्त होता रहता है। तीन मास में ही धनप्राप्ति के लिए कुबेर मंत्र मंत्र- यक्षाम कुबेराय वैश्रवणाय, धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धि में देहि दापय स्वाहा। विधि- इस मंत्र को 108 बार जपने से तीन मास में ही लाभ होता है। अक्षय भंडार हेतु महालक्ष्मी मंत्र ओम श्रीं ह्रीं क्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:। विधि-शुभ तिथि व शुभ दिन प्रात: जप करना प्रारम्भ कर दें। कम से कम 1100 जप तो अवश्य ही करें। महालक्ष्मी सिद्ध मंत्र मंत्र- श्री शुक्ले महाशुक्ले कमल दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नम:। लक्ष्मी माई सबकी सवाई आवो चेतो करो भलाई न करो तो सात समुद्रो की दुहाई, ऋद्धि-सिद्धि न करे तो नौ नाथ चौरासी सिखों की दुहाई।000 विधि- दुकानदार दुकानें खोले तब महादेव का थडा अर्थात् दुकान की गद्दी पर बैठकर इस मंत्र को प्रथम माला जप लें। धूप-दीप के पश्चात् फिर लेन-देन करें और न्याय-नीति से कारोबार करे। दशांश दान-पुण्य में लगाएं तो सभी प्रकार के सुख-शांति की प्राप्ति हेाती है। यदि पहले इस मंत्र का 41 दिन में सवा लाख जप दीप-धूप-पुष्प-फल-नैवेद्यादि विधान से करके फिर एक माला का नित्य जप करे तो लक्षाधिपति बनकर वैभवपूर्ण जीवन का अक्षय सुख प्राप्त करता है। सिद्ध करने का तरीका रविवार के दिन एक किलो काले उडद अपने सामने रखकर सूर्योदय से सूर्यास्त तक इस मंत्र का नियमित रूप से जप करने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। जब यह मंत्र सिद्ध हो जाए तब उन काले उडदों को लेकर 21 दिन मंत्र पढकर दुकान में बिखेर देवें, इस प्रकार तीन रविवार तक करने पर दुकान की बिक्री दुगुनी-तिगुनी हो जाती है। यह निश्चित है। जैसा कि बताया गया है, शाबर मंत्र सरल भाषा में होते है और आज के अनास्था तथा वैज्ञानिक युग में विश्वास नहीं होता कि ये मंत्र इतने शक्तिशाली है और इन मंत्रों से कार्य सिद्ध किए जा सकते है। परंतु साधकों ने इन मंत्रों को सिद्ध किया है और पूरी तरह से लाभ उठाया है। आप भी चाहें तो इन सत्य को परख सकते है। धन प्राप्ति हेतु तांत्रिक मंत्र यह मंत्र महत्वपूर्ण है, इस मंत्र का जप अर्द्धरात्रि को किया जाता है। यह साधना 22 दिन की है और नित्य एक माला जप होना चाहिए। यदि शनिवार या रविवार में इस प्रयोग को प्रारम्भ किया जाए तो ज्यादा उचित रहता है। इसमें व्यक्ति को लाल वस्त्र पहनने चाहिए और पूजा में प्रयुक्त सभी समान को रंग लेना चाहिए। दीपावली के दिन भी इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है और कहते हैं कि यदि दीपावली की रात्रि को इस मंत्र को 21 माला फेरें तो उसके व्यापार में उन्नति एवं आर्थिक सफलता प्राप्त होती है। मंत्र- ओम नमो पदमावती एद्मालये लक्ष्मीदायिनी वांछाभूत प्रेत बिन्ध्यवासिनी सर्व शत्रु संहारिणी दुर्जन मोहिनी ऋद्धि-सिद्ध वृद्धि कुरू कुरू स्वाहा। ओम क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम:। जब अनुष्ठान पूरा हो जाए तो साधक को चाहिए कि वह नित्य इसकी एक माला फेरे। ऎसा करने पर उसके आगे के जीवन में निरन्तर उन्नति होती रहती है। धन प्राप्ति का शाबर मंत्र नित्य प्रात: काल दन्त धावन करने के बाद इस मंत्र का 108 बार पाठ करने से व्यापार या किसी अनुकूल तरीके से धन प्राप्ति होती है। मंत्र- ओम ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मामगृहे धन पूरय चिन्ताम्तूरय स्वाहा। चिपकाने हेतु मंत्र नीचे प्रदर्शित चार यंत्रों में से किसी भी एक मंत्र को कागज अथवा भोजपत्र पर अष्टगंध अथवा केसर के घोल से लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा करने के बाद रूपए-पैसे रखने की तिजोरी अथवा जेवरों के डिब्बे में रखें। लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। व्यापारी और उद्योगपति दीवाली पूजन के बाद दुकान या कार्यालय की दीवार पर सिन्दूर से और बही खातों के प्रथम पृष्ठ पर स्याही से कोई भी एक यंत्र बनाएं और फिर देखें इसका प्रताप। धन सम्पत्तिवर्द्धक यंत्र रवि पुष्य अथवा गुरू पुष्य के दिन भोजपत्र पर केसर की स्याही और अनार की कलम से निम्नांकित यंत्र लिखकर स्वर्ण के तावीज में रखें और गंगाजल आदि से पवित्र करके दाहिनी बाजू पर बांध लें। इसके प्रभाव से शारीरिक तथा आर्थिक क्षीणता समाप्त होकर, धन और स्वास्थ्य दोनों की वृद्धि होती है। इस तावीज को गले में धारण किया जा सकता है। धन सम्पदा प्रदायक दूसरा तावीज इस तांत्रिक यंत्र को अनार की कलम द्वारा अष्टगंध स्याही से भोजपत्र पर लिखें और चंदन, पुष्प, धूप-दीप से इसकी पूजा करें। पूजनोपरांत एक हजार बार मंत्र का जप करें। हवन-सामग्री में घी, चीनी, शहद, खीर और बेलपत्र आवश्यक हैं। यह प्रक्रिया किसी शुभ मुहूत्तü की शुक्ल द्वितीय को की जानी चाहिए। हवन आदि करने से यंत्र की शक्ति बढती है। तत्पश्चात् यंत्र को स्वर्ण या चांदी के तावीज में भरकर, लाल या काले धागे की सहायता से दाहिने बाजू या गले में धारण करें। इस तावीज का प्रभाव अचूक और चिरस्थायी होता है। धन प्रदायक लक्ष्मी बीसा तावीज  उपर्युक्त यंत्र तावीज को रवि पुष्य नक्षत्र में अनार की कलम के द्वारा भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखें। पीला वस्त्र, पीला आसान एवं पीली माला का प्रयोग करें। पूरब की ओर मुंह रखें। धूप, दीप, फल-फूल और नैवेद्य से यंत्र की नित्य पूजा करें और निम्न मंत्र की एक माला जप करें। ओम श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्मै नम:। यह क्रम सवा दो महीने तक चालू रखें। फिर तिरसठवें दिन चांदी के एक पत्र पर यंत्र को बनाकर, उन बासठ यंत्रों को चांदी के पत्र वाले यंत्र के नीचे रखकर पूजा करें। अब बासठ यंत्रों में से एक यंत्र अपने पास रखें बाकी यंत्रों को आटे की गोलियों में रखकर नदी में बहा दें। जिस यंत्र को पास में रखा था, उसे सोने या चांदी के तावीज में डालकर गले में डालें या फिर बाजू मे |

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