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जानिए क्या फर्क है विश्वास प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव में : संसद में 26 बार पेश हो चुका है

संसद में मानसून सत्र के पहले ही दिन बुधवार को विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्ताव पर 20 जुलाई को चर्चा होगी। इसके बाद मत विभाजन कराया जाएगा।

 

विश्वास प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव में अंतर

विश्वास प्रस्ताव सरकार की ओर से अपना बहुमत और मंत्रिमंडल में सदन का विश्वास स्थापित करने के लिए लाया जाता है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ लाया जाता है। सदन में अब तक 26 बार अविश्वास प्रस्ताव और 12 बार विश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है।

 

नब्बे के दशक में विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच डी देवेगौड़ा, आई के गुजराल और अटल बिहारी की सरकारें विश्वास प्रस्ताव हार गईं थी। 1979 में ऐसे ही एक प्रस्ताव के पक्ष में ज़रूरी समर्थन न जुटा पाने के कारण तत्काली प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। आखिरी बार 2008 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह अमेरिका से हुए न्यूक्लियर डील के बाद सदन में विश्वास मत हासिल किया था।

 

अविश्वास प्रस्ताव का क्या है नियम

अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित नियम 198 के तहत व्यवस्था है कि कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है। शर्त यह है कि नोटिस को अध्यक्ष जिस दिन की कार्यवाही का हिस्सा बनाएं और वह सदन के समक्ष आए तो उसके समर्थन में 50 सदस्यों को अपना समर्थन जताना होगा। सदन में हंगामा और संभ्रम (यानी अध्यक्ष का 50 सदस्यों की स्पष्ट गिनती करने में असमर्थ होना) की स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के लिए नहीं लिया जा सकता।

 

इस बार विपक्ष की कड़ी परीक्षा
बुधवार को संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले दलों की ताकत एनडीए के संख्या बल से आधी भी नहीं है। ऐसे में यह विपक्षी एकजुटता बनाम एनडीए के बीच मुकाबला है। सदन में मतदान की नौबत आने पर यह भी साफ हो जाएगा कि कौन किधर खड़ा है और कौन दोनों पक्षों से समान दूरी पर है। एनडीए को भी अपने सहयोगी दलों को समझने का मौका मिलेगा।

 

क्या है अंकगणित?
सदन में मौजूदा सांसद   534
बहुमत का आंकड़ा       268
एनडीए                     315
इनका रुख साफ नहीं    72
यूपीए और अन्य        147

 

कमजोर विपक्ष, सरकार को खतरा नहीं
अन्नाद्रमुक-37, बीजद-20, टीआरएस-11, इनेलो-02, पीडीपी-01, पप्पू यादव-01 समेत 72 सांसद ऐसे हैं जो दोनों पक्षों से बराबर दूरी बनाए हुए हैं। यह अगर विपक्ष के साथ नहीं जाते हैं तो अविश्वास प्रस्ताव के साथ खड़े कांग्रेस, तेलुगुदेशम, माकपा, भाकपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा, आप, राजद समेत एक दर्जन से ज्यादा दलों के पास 147 सांसदों का ही समर्थन रह जाता है, जो एनडीए से बहुत पीछे है। ऐसे में सरकार को कोई खतरा नहीं दिखता है।

 

संसद में 26 बार पेश हो चुका है अविश्वास प्रस्ताव, सबसे ज्यादा इंदिरा गांधी के खिलाफ

मोदी सरकार पहली बार शुक्रवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने जा रही है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बुधवार को सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। विपक्षी पार्टी कांग्रेस, टीडीपी, एनसीपी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। अब तक सदन में 26 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश हो चुका है। अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के प्रतीकात्मक विरोध का एक साधन माना जाता थे, जिनका उद्देश्य सरकार की जवाबदेही करना होता था।

अविश्वास प्रस्ताव के जुड़ें दिलचस्प फैक्ट्स
-सबसे ज्यादा 15 बार इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ पेश हुआ है
– पीएम रहते वाजपेयी (1996) और मोरारजी देसाई (1978) अविश्वास प्रस्ताव पेश होने से पहले दे चुके हैं इस्तीफा
-अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड सीपीएम पार्टी के सांसद रहे और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योतिर्मय बसु के नाम है। उन्होंने चार बार इंदिरा सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया है
-वाजपेयी के पीएम रहते तीन बार 1996, 1999 और 2003 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया
-अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष में रहते हुए दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए हैं

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