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जाने क्या है? ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ Good Touch Bad Touch

मासूम बच्चियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं से पता चलता है कि उनका यौन शोषण करने वाला कोई नजदीकी आदमी ही होता है। जिसके झांसे में बच्चे/बच्चियां आसानी से आ जाते हैं। अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि कोई पड़ोसी या फिर रिश्तेदार यहां तक कि कई बार बुजुर्ग भी बैड टच कर बच्चे/बच्चियों का यौन उत्पीड़न करते हैं।

जिस तरह हम अपने बच्चे को खाना खाना, कपड़े पहनना, ब्रश करना समेत बाकी सभी चीजों की अ‍हमियत सिखाते हैं, उसी तरह उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में बताना भी आवश्यक है।  बच्चों के साथ बढ़ रहे छेड़खानी के मामलों से उनको बचाने के लिए यह बेहद जरूरी है। छोटी उम्र में ही बच्चों के साथ विश्वास का रिश्ता कायम करना बेहद जरूरी है। उनमें ये विश्वास पैदा करें कि आप हमेशा उनके साथ रहेंगे। इसके अलावा आप बच्चों से कहें कि आप उनमें पूरा विश्वास करते हैं और यह कि वो अपनी सारी बातें आपके साथ शेयर कर सकते हैं। उनमें विश्वास जगाएं कि आप उनकी बातों को सीक्रेट रखेंगे ताकि वे अपनी बातें शेयर करने से न हिचकिचाएं।

बच्चे बहुत ज्यादा भोले और मासूम होते हैं। उनको अच्छे और बुरे की कोई समझ नहीं होती। जो भी उनको प्यार से बुलाता है वह उसको अपना समझने लगते हैं। उस व्यक्ति के साथ प्यार से बात करने लगते हैं। कई बार तो बच्चे अनजान इंसान के साथ चले भी जाते हैं। क्योंकि बच्चे मन के साफ होते हैं वह समझ नहीं पाते कि किसी के दिमाग में क्या है। एेसे में मां-बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में जरूर बताएं। ताकि वह किसी यौन शोषण का शिकार ना हो पाएं।

‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ का मतलब छूने वाली की नीयत से है। कोई शख्स आपको किस नीयत से छू रहा है, या वह किस जगह, किस तरीके से छू रहा है- इसी से पता चलता है कि वह गुड टच है या बैड टच। हालांकि इसके बारे में बताने से पहले बच्चे को उसके शरीर के अंगों के बारे में सही जानकारी देना भी जरूरी अहम है।

बच्चों को उनके शरीर के बारे में पूरी जानकारी दें। बच्चों को बताएं कि उनके निजी अंग कौन से हैं। बच्चों को बताएं कि शरीर के इन हिस्सों को किसी को न छूने दे। यहां तक कि बच्चों को जानकारी देने के बाद आप भी बच्चों के शरीर के उन हिस्सों को न छुएं। इससे उन्होंने एहसास होगा कि वाकई इन्हें किसी को भी छूने नहीं देना चाहिए।

बच्चों को अपने शरीर का मालिक बनने दें
बच्चों को बताएं कि उनके शरीर पर सिर्फ उनका अधिकार है। अगर बच्चे किसी रिश्तेदार या किसी को भी अलिंगन करने या छूने में सहज महसूस नहीं करते तो उनके साथ जबर्दस्ती ऐसा न करें और न होने दें।

सही भाषा का प्रयोग करें
जब बच्चों को उनकी शारीरिक संरचना के बारे में बताएं तब सही भाषा का प्रयोग करें। ध्यान रखें कोई खराब बात न बोलें। उन्हें बताएं कि उनके शरीर में कुछ भी गंदा या खराब नहीं है। साथ ही उन्हें महिलाओं और पुरुषों की शरीर के फर्क के बारे में भी शालीनता से समझाएं।

अपने बच्चे को गुड टच और बैड टच के बारे में बताने के लिए स्विम सूट नियम का पालन करें। उन्हें बताएं कि स्विमिंग के दौरान पहनें जाने वाला कस्टूयम से शरीर के जो हिस्से ढके होते हैं वे निजी अंग होते हैं और उन्हें कोई नहीं छू सकता। उन्हें यह भी कहें कि अगर कोई भी बड़ा आदमी उन्हें इन जगहों पर छुए या छूने की कोशिश करे तो तुरंत अपने अभिभावकों या स्कूल में शिक्षकों को जानकारी दें।

बच्चों को सेफ टच के बारे में बताएं
बच्चों को सेफ टच के बारे में भी बताएं। जैसे जब बच्चों की मां या फिर उनके डॉक्टर उनकी शरीर को छूते हैं तो वो ये चेक करते हैं कि शरीर में कहीं कोई मेडिकल समस्या तो नहीं है। इस तरह का टच सेफ होता है। इनके अलावा कोई भी बच्चों को अपने कपड़े उतारने के लिए नहीं कह सकता।

बच्चों को ना कहना सिखाएं
बच्चों के मन से डर दूर करें और उन्हें ना कहना सिखाएं। अगर उन्हें कोई गलत तरीके से छूने की कोशिश करे तो वे प्रताड़ित करने वाले से डरे नहीं और उन्हें ऐसा न करने के लिए बोलें। प्रताड़ित करने वाले से बचने के लिए हल्ला मचाएं ताकि आसपास के लोग उसकी चीख सुनकर उसे बचा सकें।

अपने बच्चों को बताएं कि ऐसी असुरक्षित जगहों से जितनी जल्दी हो सकें निकल जाएं। साथ ही ऐसी असुरक्षित जगहों पर जाने से बचें।  किसी भी आदमी पर अगर उन्हें शक तो उनके साथ कभी अकेले कहीं न जाएं। हमेशा दोस्तों के ग्रुप में चलें ताकि अपराध करने वाले को ऐसा करने का मौका न मिले।

बच्चों को सही और गलत की समझ दें
ये जरूरी है कि बच्चों को पता हो कि सही और गलत क्या है ताकि वे किसी दूसरे की गलत हरकतों के कारण खुद को गलत न समझें। उन्हें समझाएं कि उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश करने वाले गलत है वे नहीं। उनमें किसी भी हादसे को लेकर अपराधबोध का भाव न आने दें।

बैड टच- जब कोई आपको इस तरह से टच करे कि आपको उससे बुरा लगे या आप सहज महसूस कर रहे हैं तो ये बैड टच हो सकता है. साथ ही अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके प्राइवेट पार्ट्स या कई अन्य जगह आपको गलत तरीके से छूने की कोशिश करे तो यह बैड टच होता है. वहीं अगर कोई आपके साथ गलत हरकत करे और बोले कि किसी को बताना मत, तो ये बैड टच होता है.

गुड टच- अगर कोई आपको टच करे और उससे आपको अच्छा लगे तो ये गुड टच होता है. कोई आपको प्यार करने के लिए मदद करने के लिए आपको टच करता है तो आप इसे गुड टच कहेंगे.

प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं

जब भी आप बच्चों को बैड टच के बारे में बताएं तो खुलकर उन्हें प्राइवेट पार्ट्स के बारे में भी बताएं. उन्हें बताएं कि शरीर की कौन-कौन सी जगह पर सिर्फ मां-बाप ही टच कर सकते हैं. अगर कोई दूसरा ये करता है तो यह गलत होता है. इसमें उन्हें ये भी बताएं कि कोई जबरदस्ती आपको किस करता है तो ये भी गलत है.

कपड़ों से छेड़छाड़ करना गलत

बच्चों को बताएं कि अगर घर के अलावा कहीं भी आपके कोई कपड़े से छेड़छाड़ करता है तो यह गलत होता है. घर पर भी कोई क्लिनिंग के लिए ही आपके कपड़े खोले तो मा कर दें.

जानवरों का दें उदाहरण

बच्चों को बताएं जिस तरह आप किसी जानवर को टच करते हैं और उसे बुरा लगता है तो वो आपको काटता है या चिल्लाता है तो आपको भी वैसे ही उसके विरोध करना चाहिए.

तुरंत करें शिकायत

बच्चों को बताएं कि अगर कोई बैड टच करता है या कोई गलत हरकत करता है तो तुरंत आप अपने मम्मी-पापा को जरूर बताएं. साथ ही उस वक्त वहां चिल्लाना शुरू कर दें.

बच्चे को कैसे समझाएं टच के बारे में :-
1. बच्चा जब चार साल का हो जाए तो उससे इस पर बात करना शुरू कर दीजिए. उसे यह समझाने की जरूरत है कि उसे किस पर भरोसा करना चाहिए. उसे समझाएं कि उसे किसी के भी साथ नहीं चले जाना चाहिए. कोई अनजान उसे कुछ खाने को दे तो उसे वह चीज तुरंत मुंह में नहीं डालनी चाहिए.

2. बच्चे से खुलकर बातें करें. उसके अंदर आपसे अपनी बातें कहने में किसी तरह की हिचक नहीं होनी चाहिए. उसे ऐसा नहीं लगना चाहिए कि अगर वो आपको कुछ कहेगा तो उसे डांट पड़ सकती है या आप उसकी बात अनसुना कर देंगे.

3. बच्चे को गुड टच और बैड टच बताने के दौरान आपको संयम से काम लेना होगा. हो सकता है कि वह चीजों को समझने में वक्त ले. उसे प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं. उसे ये समझाएं कि उसे इस जगह पर उसके अलावा कोई नहीं छू सकता है.

4. बच्चे को बताएं कि उसे किसी के भी क्लोज जाने की जरूरत नहीं है. अगर उसे कोई गोद में बिठाने की बात कहे या चूमना चाहे तो वह इनकार कर दे.

5. बच्चे को ये समझाएं कि अगर उसे कुछ भी गंदा लग रहा हो तो वो अपने माता-पिता को तुरंत बता दे. बच्चे को इस तरह तैयार करें कि वह आप पर पूरा भरोसा करे और अपने साथ होने वाली हर छोटी-बड़ी बात को आपके साथ शेयर करे.

6. पैरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों को सिखाएं कि अगर स्कूल में या बस में ऐसा होता है तो प्रिंसिपल और घर पर पैरेंट्स को बताएं। सार्वजनिक स्थल में ऐसा हो तो विरोध कर शोर मचाएं।

7. पैरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों को विरोध करना सिखाएं। अगर कोई व्यक्ति चाहे वह रिश्तेदार हो या फिर स्कूल टीचर या पड़ोसी अगर ऐसा करता है तो बच्चों को इसका विरोध करना चाहिए। चिल्लाने पर सामने वाला डर जाएगा और कुछ लोग आ जाएंगे कि कोई गड़बड़ है।

8. बच्चों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत सही गलत में फर्क करने की होती है। उनको यह भी समझाना चाहिए कि सही क्या है और गलत क्या है? जिससे कि किसी दूसरे आदमी की हरकत पर वो खुद को दोषी ना मानें। इसके बारे में घर या स्कूल में शिकायत करें।

9. कपड़ों से छेड़छाड़ के बारे में बच्चों को बताएं। अगर कोई कहता है कि आपका ये ड्रेस बड़ा अच्छा है या यहां पर खराब है। ऐसा कहते हुए वह कपड़े को छूता है जिससे आपको बुरा लगता है या शर्मिंदगी महसूस होती है तो यह बैड टच हो सकता है।

1098 पर कॉल करें तुरंत पहुंचेगी टीम

भोपाल लाइल्ट हेल्प लाइन की डायरेक्टर अर्चना सहाय बताती हैं कि अगर कही कोई बच्चा या बच्ची मुसीबत में है तो वह 1098 पर कॉल कर सकता है। ऐसा करने पर आधे घंटे के अंदर चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम मौके पर पहुंची है। आप चाहे जिस जिले में हो 1098 पर कॉल करे आपका कॉल आपके जिला मुख्यालय में ट्रांसफर किया जाएगा। यदि पैरेंट्स शिकायत करना चाहे तो इसमें कॉल कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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