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जावरा-पिपलौदा-मंदसौर से राजस्थान को जोड़ने वाली सड़क को एमडीआर रोड़ घोषित करे

मन्दसौर। पूर्व मंत्री एवं मुंगावली विधायक श्री महेन्द्रसिंह कालूखेड़ा ने विधानसभा में जनहित के मुद्दों को उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। विधानसभा में श्री कालूखेड़ा ने कहा कि सेंट्रल रोड फण्ड से काफी फण्ड सड़कों के लिये केन्द्र सरकार से प्राप्त किया जा सकता है लेकिन इसके लिये जरूरी है कि जिला योजना मण्डल से एमडीआर रोड़ घोषित करे। जिले में कम से कम 3 सड़कें आप एमडीआर में ले और उनको सेंट्रल फण्ड के पास भेजे जैसे कि मुंगावली-चंदेरी से उ.प्र. और जावरा-पिपलौदा-मंदसौर से राजस्थान से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता से लेना चाहिए ताकि दोनों राज्यों में सड़के बन जाए व आपस में लोग आने जाने में लग जाए जैसी रानीगांव, धंधोड़ा, भावगढ़ को जोड़ने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आपने प्रदेश में बनी गुणवत्ताविहिन सड़कों पर प्रश्नचिन्ह खड़े करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश रोड़ डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लि., पीपीपी बाॅण्ड, बीओटी, एनयूटी के अंतर्गत बनने वाले सड़कों की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी की जाए क्योंकि अभी कई सड़कों की गुणवत्ता पर शिकायते मिलती है, सड़के बनते ही उखड़ना शुरू हो जाती है, इसलिये नाम्र्स बदले, भले ही कम सड़के बनाये लेकिन ऐसी सड़के बनाये जो लम्बे समय तक चले। गुणवत्ता पर समझौता नहीं किया जाये। गुणवत्ताविहिन सड़के बनाने वाले दोषियों को पहचान कर, जांचके बाद उन्हें तत्काल दण्डित किया जाए क्योंकि एग्जेम्पलरी पनिशमेंट देना बहुत जरूर है ताकि वे गुणवत्ता में काम्प्रोमाइज न करे। आपने कहा कि कम्पनियों से एग्रीमेंट हुआ है उसकी शर्तों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है। नियमों के विरूद्ध कई प्रोजेक्ट्स पर बिना निर्माण कार्य पूरा किए टोल की वसूली भी शुरू हो जाती है। नयागांव-जावरा-लेबड़ फोरलेन के संबंध में कहा कि कम्पनी ने पेड़ नहीं लगाए है, पेड़ लगे है उनका सर्वाइवल नहीं है, मांडनखेड़ा व कई स्थानों पर यात्री प्रतिक्षालय तोड़ दिए लेकिन बनाए नहीं है। सड़क का रखरखाव समय पर नहीं होता है। जावरा-पिपलौदा रोड़ पर रेडलाइट नहीं है और अण्डरब्रिज भी नहीं है। तत्कालिन लोक निर्माण मंत्री श्री नागेन्द्रसिंह क्षेत्र के 4-5 विधायकों को लेकर दौरेपर भी गए जहां विधायकों ने कई समस्याएं रखी थी लेकिन विधायकों द्वारा दी गई रिपोर्ट पर काई कार्यवाही नहीं हुई। श्री कालूखेड़ा ने कहा कि मेरे प्रश्न 28 जुलाई 2016 और 5 दिसम्बर 2016 में मे. वेस्टर्न एमपी इन्फ्रास्ट्रक्चर रोडवेज लि. ने 605.44 करोड़ तथा नयागांव टोलकंपनी लि. द्वारा 450 रू. खर्च किए लेकिन उसमें 907-907 करोड़ दोनों पर खर्चा हुए। टोल से दिसम्बर 2016 तक 700 करोड़ प्राप्त हो गए और 720 करोड़ रूपये भी वसूल हो गए। अब 200 करोड़ रूपये और वसूल होना है। आप उसके बाद कब तक उनको टोल लेने देंगे ये बताये और यह देखे कि वे ज्यादा वसूली न कर सके। टोल का उनका जो खर्चा हो जाए और उसको बाद में आप कम से कम वह टोल न लें और पब्लिक को सुविधा दे। आपने कहा कि पब्लिक प्रायवेट पाटर्नरशीप में में नयागांव से लेकर लेबड़ तक सड़कांे का एग्रीमेंट दो कंपनियों को दयिा उसमें आपको लोगों को बताना चाहिए था कि नेगेटिव एक्सटर्नलिटी का क्या मतलब है। धूल ट्रेफिक जाम अगर धूल से फसल खराब होती है सीवर लाईन, बिजली लाइन, पानी की लाइन अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान टूटता है तो नपा, पंचायत या प्रायवेट हो तो उस नुकसान का पैसा देना पड़ता है। इस बात की पब्लिसिटी बिल्कुल नहीं की गई। इसी तरह किसानों को अधिकारों की जानकारी नहींहोने से उनसे भूमि अधिग्रहण में भी बहुत सस्ती भूमि ले ली गई। किसानों का शोषण हुआ है उनके हितों को ध्यान में नहीं रखा गया है। किसानों को नहीं बताया गया कि कार्पोरेट सोश्यल रिस्पोसिबिलिटी का भी एग्रीमेंट में प्रावधान होता है कम से कम वह 4 प्रतिशत होना चाहिए। आपने कहा कि स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे की दोनों सड़कों पर जो पटरी भराई होती है व मरम्मत के नाम पर करोड़ों रूपये की राशि निकाली जाती है और उसमें आप लोग माॅनिटर नहीं कर सकते है कि अधिकारी कितनी हेराफेरी करते है जितना काम नहीं होता है उससे अधिक राशि निकालते है। इसका दोष आप भारी वाहनों को दे रहे है। यह आपकी जिम्मेदारी है कि भारी वाहन अगर आपकी सड़कों पर चलते है, जिनकी क्षमता इतनी अधिक नही है तो उन भारी वाहनो को रोके और उन सड़कों की मरम्मत भी उन्हीं से करवाये।

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