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जिला अस्पताल में नियम विरूद्व नियुक्तियों का मामला न्यायालय में पहुॅचा

मंदसौर निप्र । जिले के जिस स्वास्थ्य विभाग के कर्ताधताओं का काम जिले भर में सरकार की मंशा और योजना के अनुसार जिले भर में स्वास्थ्य विभाग की बेहतरी के काम करना और हितग्राहियों तक स्वास्थ्य योजनाओं को पहुॅचाने का था लेकिन मंदसौर में पदस्थ होने वाले सीएमएचओं और उनके कुछ मातहत स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं से हितग्राहियों को लाभांवित करने के बजाय खुद लाभ लेने की जूगत में जूट गये जिसमें न केवलअवैध रूप से धडल्ले से नियुक्तियां कर दी गई बल्कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद जमकर अटैचमेंट का खेल खेला गया और जिन कर्मचारियों ने इनके खेल में साथ नहीं दिया उन्हें कोई न कोई नियम बताकर नौकरी से ही चलता कर दिया गया। यह पूरा खेल केवल एक सीएचएचओं के कार्यकाल में नहीं हुआ बल्कि तीन सीएचएचओं इसमें शामिल हो गये लेकिन तीनों सीएमएचओं को खेल में शामिल करने वाले मातहत केवल दो बाबु ही रहें। जबकी दोनो को यह अधिकार हीं नहीं थे क्योकि खेल खिलाने वाला एक बाबु खुद मंदसौर में अटैंच होकर नौकरी कर रहा है तो दूसरा संविदा कर्मचारी है जिसे किसी भी तरह के अधिकार हीं नहीं है लेकिन दोनो बाबु सरकार के नियमित कर्मचारियों की तरह सीएमएचओं कार्यालय में काम कर रहे है और जमकर खेल,खेल रहे है। इस मामलें को मीडि़या ने भी कई बार उठाया लेकिन किसी भी जिम्मेदार के कानों पर जूं तक नहीं रैगी केवलजांच -जांच का खेल शुरू कर दिया ऐसे में अध्यक्ष दिलीप सेठिया ने माननीय न्यायालय की शरण लेते हुए माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई जिसें न्यायालय ने स्वीकार कर लिया जिसके बाद अब वह दिन दूर नहीं जब दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
यह जानकारी देते हुए जिला पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिलीप सेठिया ने बताया कि जिला अस्पताल में अवैध नियुक्तियों, अटैचमेंट और नियमों को ताक पर रखकर नौकरियों से निकाले जाने का खेल बिते चार-पांच सालों से चल रहा है। इस दौरान जो भी सीएमएचओं आ रहा है वह भी इस खेल का हिस्सा बन रहा है। लेकिन खेल के एम्पायर केवल सीएमएचओं कार्यालय में कार्य करने वाले अदने से दो बाबु है जिसमें से एक विपिन गुप्ता जो खुद मूल रूप से धुंधड़का के स्वास्थ्य केन्द्र पर पदस्थ है लेकिन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लंबे समय से जिला अस्पताल में अटैच होकर बैठा है और दूसरा बाबु यशपाल राठौर जो खुद संविदा कर्मचारी है लेकिन काम नियमित कर्मचारियों की तरह कर रहा है। सीएमएचओं कार्यालय का प�ाा भी इन दोनो शातिर बाबुओं के बिना नहीं हिल रहा है जिसके चलतें एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों युवाओं को अवैध रूप से पदस्थापना कर दी गई, कईयों को अटैचमेंट दे दिया गया और कई लोगों को नौकरी के लिये आश्वासन दिया गया। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिन युवाओं को खेल का हिस्सा बनाकर उन्हें नौकरियां दी गई उन्हें नौकरी देने के बाद भी परेशान किया गया लेकिन जब मांग पूरी नहीं हुई तो बेजा नियम कायदे लगाकर किसी न किसी तरह से उन्हें नौकरी से ही चलता कर दिया गया।

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