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जिला चिकित्सालय में ही बनेगी ऑक्सीजन

Story Highlights

  • योजना का खाका तैयार कर भेजेंगे भोपाल
  • उत्पादन मूल्य पर नीमच और रतलाम में भी करेंगे सप्लाई 9 एमडीएस-63
  • केप्शनः जिला चिकित्सालय में अब ऑक्सीजन प्लांट की तैयारी।

मंदसौर। जिला अस्पताल में साल दर साल ऑक्सीजन की खपत बढ़ रही है और इससे यहां का बजट भी गड़बड़ा रहा है। राज्य शासन से मिलने वाले बजट का एक बड़ा हिस्सा लगभग 25 लाख रुपए सालभर में ऑक्सीजन के सिलेंडरों पर ही खर्च हो रहा है। इसे बचाने के लिए अब अस्पताल प्रबंधन ने यहीं ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना बनाना शुरू कर दिया है। अभी कंसल्टेंट से इस पर प्रारंभिक चर्चा हुई है और प्लांट की पूरी योजना बनाकर भोपाल भेजी जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि यहां की खपत के लिए भरपूर ऑक्सीजन मिलेगी। साथ ही प्रबंधन यह भी प्रस्ताव दे रहा है कि उत्पादन मूल्य पर नीमच व रतलाम के जिला चिकित्सालयों में भी ऑक्सीजन सिलेंडर दे देंगे।

जिला अस्पताल के मेडिकल और सर्जिकल वार्डों में तो ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत हो ही रही है, पर सबसे ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर नवजात शिशु गहन चिकित्सा ईकाई (एसएनसीयू) में लग रहे हैं। यहां लगभग 15 लाख रुपए सालाना ऑक्सीजन सिलेंडर पर खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा 10 लाख रुपए की ऑक्सीजन दूसरे वार्डों में खपत हो रही है। इससे अस्पताल का सालाना बजट ही गड़बड़ा रहा है। बजट का एक बड़ा हिस्सा ऑक्सीजन पर ही खर्च हो रहा है। इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन दो उपायों पर चर्चा कर रहा है। इसमें एक तो ऑक्सीजन प्लांट लगाने का है। दूूसरा ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मशीनें लगाने का है।

कंसल्टेंट से चल रही है बात

सिविल सर्जन डॉ.एके मिश्रा ऑक्सीजन पर खर्च हो रहे अस्पताल के बड़े बजट को कम करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्त कंसल्टेंट से भी ऑक्सीजन प्लांट के लिए चर्चा शुरू की है और जिला अस्पताल परिसर में ही प्लांट लगाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 25 लाख रुपए में एक बार में यह प्लांट लग जाएगा। इसके बाद उसमें रॉ मटेरियल और केमिकल डालते रहेंगे और ऑक्सीजन बनती रहेगी। अब इसका पूरा प्रोजेक्ट बनाकर भोपाल भेजा जा रहा है। वहां से अनुमति मिलने पर ही आगे कार्रवाई होगी।

अभी इंदौर की फर्म करती है सिलेंडर सप्लाई

वर्तमान में जिला चिकित्सालय में इंदौर की एक फर्म ऑक्सीजन के सिलेंडर सप्लाई कर रही है। अस्पताल प्रबंधन उनसे बड़े सिलेंडर लेता है और फिर यहां छोटे सिलेंडरों में ऑक्सीजन ट्रांसफर की जाती है। इसमें समय भी लगता है और लागत भी ज्यादा हो रही है।

 

डॉ. मिश्रा ने बताया कि योजना का जो प्रारूप बनाया है, उसमें जिला अस्पताल में लगने वाले प्लांट का खर्च निकालने के लिए नीमच और रतलाम के जिला चिकित्सालयों में भी ऑक्सीजन सिलेंडर देने का प्रस्ताव बनाया है। दोनों जगह उत्पादन मूल्य और आवश्यक रखरखाव शुल्क लेकर ही ऑक्सीजन सिलेंडर देंगे। इससे प्लांट भी पूरी क्षमता से कार्य करेगा और हमारा भी खर्च निकल आएगा।

 

इसके दूसरे विकल्प के रूप में प्रबंधन ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मशीन खरीदने पर भी विचार कर रहा है। 50 हजार रुपए मूल्य की यह मशीन बिजली से चलेगी और ऑक्सीजन देती है। एक मशीन से दो मरीजों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। यदि प्रत्येक वार्ड में दो-दो मशीनें लगाई जाए तो चार मरीजों को ऑक्सीजन लगा सकते हैं। हालांकि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की संभावना कम है।

आक्सीजन पर खर्च हो रहे सालाना 25 लाख रुपए तक के बजट को कम करने के लिए अस्पताल में ही ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना पर चर्चा चल रही है। जल्द ही प्लान तैयार कर भोपाल भेजेंगे। लागत खर्च निकालने के लिए हमने नीमच और रतलाम जिला चिकित्सालय में भी उत्पादन खर्च पर ऑक्सीजन देने का प्रस्ताव भी इसमें रखेंगे।- डॉ. एके मिश्रा, सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय।

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