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जिले के मलेरिया प्रभावित 31 गांवों में कीटनाशक छिडकाव का दूसरा चरण 15 अक्टूबर तक चलेगा

मंदसौर. वर्षाकाल के बाद अनेक स्थानों पर जलभराव के कारण, गंदगी की समस्या सामने आती है, जिससे संक्रमण के फेलने का खतरा बना रहता है। वही मौसम मे बदलाव के कारण, साथ ही मच्छरों की संख्या, उत्पत्ति भी तेजी से बढती है, जिससे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी संक्रमण की बीमारियां बढ़ सकती है। जिसे लेकर जिले के अति प्रभावित 31 गांवों में कीटनाशक छिडकाव का दूसरा चरण विगत एक सितम्बर  से प्रारंभ कर दिया गया है, यह 15 अक्टूबर तक चलेगा। जिला मलेरिया अधिकारी मंदसौर ने बताया कि जिले के अति प्रभावित (मलेरिया) ग्रामों मे कीटनाशक का छिडकाव निर्धारित तिथियों मे होगा। उन्होंने जिले के मेलखेडा, सीतामऊ और संधारा ब्लॉक के निवासियों से अपील की है कि मलेरिया एक गंभीर बीमारी है। यह संक्रमित मच्छर के काटने से होती है। इस बीमारी से निपटने, रोकथाम के लिए कीटनाशक का छिडकाव किया जाता है। यह छिडकाव घरों के अंदर किया जाता है। जानवरों के बांधने के स्थानों पर छिडकाव नहीं किया जाता है। गृहस्वामी घर के सभी कमरों में, रसोईघर, शौचालय व अन्य कक्षों में कीटनाशक का छिडकाव अवश्य करायें। छिडकाव के दौरान खाने-पीने की चीजों, अनाज व अन्य खाद्य पदार्थो को ढंककर रखें। कीटनाशक छिडकाव का असर ढाई माह (75 दिन) तक रहता है। उन्होंने सभी गृहस्वामियों से अपील की है कि वे कीटनाशक छिडकाव के उपरान्त अगले ढाई माह अर्थात् 75 दिनों तक घर में लिपाई-पुताई न करें। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे संक्रामक रोगों से निपटने के लिये स्वास्थ्य विभाग को भरपूर सहयोग दें।

साथ ही इन रोगों के नियंत्रण के लिए दैनिक प्रचलन मे यह उपाय भी करें-

1. घरों के आसपास गंदा पानी जमा ना होने दे पानी की उचित निकासी कराये। पानी की निकासी न होने की स्थिति में गड्डों, पोखरो मे मिट्टी का तेल जला हुआ आइल डालें, ताकि मच्छरों व लार्वा की उत्पत्ति को ही रोका जा सके।

2. रात को सोते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर सोयंे एवं मच्छरदानी का उपयोेग करें।

3. शाम को घरों के बाहर नीम के पत्तों का धुआं करें।

4. पानी की हौद, टंकियों, गमलों, पक्षीपात्रों, पुराने टायर, कूलरों आदि में पानी कतई जमा न होने दें।

5. नागरिकगण सप्ताह मे एक दिन प्रति रविवार को सूखा दिवस मनायंे।

6. शासकीय कार्यालयों में प्रति शनिवार को सूखा दिवस मनायें।

नोटः- सूखा दिवस से अभिप्राय दैनिक जीवन में पानी के उपयोग के मटकों, कूलरों, पानी के हौदों को सप्ताह में एक दिन पानी खाली करके सुखाने उपरान्त पुनः उपयोग करने से है।

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