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जीवन में समय की महत्ता समझे, अधिक समय नींद में रहकर बर्बाद नहीं करे

मंदसौर। मनुष्य जीवन में समय की सर्वाधिक महत्ता है जो व्यक्ति समय का महत्व समझकर उसके अनुरूप कार्य करता है। समय भी उसी का साथ देता है। इसलिये जीवन में समय की महत्ता को समझना जरूरी है कई लोग समय पर नही सोते है इस के कारण देर से जागते है ।प्रातकाल का समय ऐसे लोग व्यर्थ कर देते है। यदि इस समय को धर्म आराधना प्रभु दर्शन के कार्य में लगाये तो पुरा दिन शुभ होगा। उक्त उद्गार साध्वी श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी मसा की पावन निश्रा में चौधरी कॉलोनी रूपचाद आराधना भवन में आयेाजित धर्मसभा में साध्वी श्री मृदूप्रियाश्रीजी मसा ने कहे। आपने कहा कि उगते सूर्य के दर्शन करना सनातन धर्म ही नहीं जैन धर्म में भी शुभ माना गया हे लेकिन अधिकांश लोग इसकी महत्ता नही जानते है और प्रातकाल देरी से ही जागते हे और सुबह कके समय को व्यर्थ कर देते है उगते सूर्य को देखना प्रगति का भी जागते है और सुबह के उगते सूर्य के दर्शन करते है वे प्रगति की और अग्रसर होते है। इसलिये जीवन में प्रातःकाल सूर्योदय के पहले जागे आौर स्नान आदि क्रियाये पूर्ण कर उगते सूर्य के दर्शन करो जिस प्रकार सूर्य प्रातकाल पूर्व दिशा में उगकर प्रगति की ओर अग्रसर होता है उसी प्रकार मानव भी अपने जीवन में प्रगति की ओर बढता है। जो जगता है वो पावत है जो सेवत है वो खोखत है-साध्वी श्री मृदुप्रियाश्रीजी जी मसा ने कहा कि रावण के दो भाई विभीषण व कुभकर्ण इस युक्ति को व बुरे का ज्ञान था इसी कारण उन्हे भले व बुरे का ज्ञान था। इसी कारण उन्होने रावण का साथ छोड राम का साथ पकडा तो दूसरी और कंुभकर्ण 6 माह सोता था ओर 6 माह जागाता था उसका सोना व जागना दोने अनुचित समय पर था। इसी कारण उसे भले बुरे का ज्ञान नहीं था और उसने अपने भाई के अधर्म के मार्ग पर होते हुए भी उसका साथ दिया। पेट की कोठी कभी नही भरती- साध्वीजी ने कहा कि कई जन्मों से हम आहार ले रहे है। सुबह खाते है तो शाम को भुख लगती है यह क्रम कई भवों स ेचल रहा है इसलिये कहा जाता है कि पेट की कोठी कभी नही भरती है। इसलिये चातुर्मास में धर्मधना के मार्ग पर अग्रसर होते हुए एकासना, उपवास आदि तप तपस्याये करे 5 अगस्त से भगवान पशर्वनाथ के अष्ठ की पतस्याये होगी। सभी धर्मालुजन इस तपस्या से जुडे और धर्मलाभ ले।

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