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” जी हां यह जीवाजी गंज था अब यह जीवा गंज है”……. “और आने वाले दिनों में एक ओपन एयर गौशाला बन जाएगा”

अशोक संचेती की कलम से कभी इस जीवा गंज को जीवाजी राव सिंधिया ने , श्रेष्ठि वर्ग के रहने के लिए बनाया था, यहां की भव्य हवेलियां आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी, यहां की चौड़ी सड़कें आज भी किसी कॉलोनी से कम नहीं है, यह एक धार्मिक कल्चरल बस्ती है जिसका अतीत वैभवशाली था, यहां की हवेलियों के गोखल े(bolconey) ऐसी बनी हुई होती थी की बालकनी से सीधे हाथी पर बैठा जा सके… समय गुजरा, दिन बीते ,बरस बीते, अब यहां केवल अतीत की स्मृतियां है, भव्य हवेलियों के स्थान पर अब छोटे छोटे मकान बन गए हैं कई हवेलिया , जीर्ण-शीर्ण अवस्था में विद्यमान है ,जो सुनहरे अतीत का बखान करती हुई प्रतीत होती है
. …. धार्मिक श्रद्धालुओं का यह एक आध्यात्मिक केंद्र भी है यहां पुष्टिमार्ग संप्रदाय के आराध्य “भगवान श्री गोवर्धन नाथ का मंदिर”भी विद्यमान hai ,यहां जैन संप्रदाय का भव्य स्थान तक अभी निर्माणाधीन है ,यही कुछ दूरी पर राजेंद्र विलास” दादावाड़ी” स्थित है जहां आए दिन धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं, इसके अलावा यहीं पर” जगदीश मंदिर” ऋषि आनंद कुटिया और भूरिया महादेव के मंदिर भी स्थित है ,जहां दर्शनार्थी आते-जाते रहते हैं, यह सब कुछ जीवा गंज की विशेषताओं को रेखांकित करता है!
यही नहीं यहां से नई आबादी खानपुरा मदारपुरा एवं नरसिंहपुरा जाने का एक लिंक रोड भी विद्यमान है जहां सतत आवागमन रहता है! यही दो अखबार भी प्रकाशित होते हैं !
लेकिन विडंबना यह है कि अपने आप में इतनी विशेषताएं समेटे हुए इस दीवानगंज को एक “ओपन एयर गौशाला “के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है, यही जीवा गंज के कारणों पर कुश घास विक्रेता जमघट लगाए बैठे हुए हैं, और घास की चाह में वहां मवेशियों का जमघट भी लगा रहता है, जो आए दिन दुर्घटनाओं का सबब बन जाता है कई नागरिक अब तक घायल हो चुके हैं और दो कि तो मृत्यु भी हो चुकी है लेकिन शासन प्रशासन अब तक उसे हटा पाने मैं असमर्थ रहा है यहां के नागरिक नारकीय जीवन जी रहे हैं घास और कचरे से जो गंदगी फैलती है उसकी वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और वह महामारी का सबब बनते हैं!
यहां सब्जी मंडी भी लगती है कई दुकानदार हाथ ठेला लगा कर भी व्यवसाय करते हैं यह एक रिहाइशी बस्ती है और आवागमन का एक केंद्र भी फिर वहां से आवारा मवेशियों को क्यों नहीं हटाया जाता यह यक्ष प्रश्न है जो इस बस्ती के नागरिक अध्यक्ष जी और क्षेत्रीय पार्षद सजाना चाहते हैं
.. …….. नगरपालिका प्रशासन अपनी निद्रा को त्यागे ….. यहां की पार्षद और पार्षद प्रतिनिधि अपना कर्तव्यसमझे और यहां के नागरिको को रहते अगर इसके बाद भी नगर पालिका प्रशासन नहीं कुछ करता है तो इसके लिए यहां के नागरिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे

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