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‘जैविक अपनाओ, जीवन बचाओ’ कार्यशाला सम्पन्न

जब तक हम जैविक खेती को नहीं अपनाऐंगे तब तक हम बीमारियों से संघर्ष करते-करते एक दिन मौत के मुँह में समय आने के पूर्व ही समा जाऐंगे । आज देश के हर नागरिक/किसान को जागरूकता का परिचय देकर जैविक खेती से जुड़ना ही होगा। रासायनिकों के अंधाधुंध प्रयोग से धरती माँ की उर्वरता कम हुई है, वहीं उत्पादन भी। जैविक के प्रयोग से जीवन और धरती माँ दोनों के प्राण बचाएं जा सकते है।
उक्त उद्गार संजय गांधी उद्यान में ग्रीन प्लेनेट बायो प्रोडक्ट मंदसौर द्वारा आयोजित जैविक अपनाओ, जीवन बचाओं जागरूकता कार्यक्रम में नगरपालिका अध्यक्ष श्री प्रहलाद बंधवार ने व्यक्त किये।
कृषि महाविद्यालय के पूर्व डीन श्री के.बी. निगम द्वारा जैविक खेती के उपयोग और इसकी गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए रबी-खरीफ की फसलों में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विस्तार से बताया।
ग्रीन प्लेनेट बायो प्रोडक्ट जालन्धर के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. अतुल पाण्डेय ने ग्रीन प्ले वेट बायो प्रोडक्ट कम्पनी के खेती/मानव स्वास्थ्य/पशु स्वास्थ्य के विभिन्न उत्पादनों के बारे में इनका प्रयोग और गुणवत्ता से अवगत कराते हुए किसानों की फसलों में आने वाली कठिनाईयों का शंका समाधान किया। जैविक खेती अपनाने वाले किसान श्री कारूलाल साखतली, श्री रामकिशन हतुनिया, श्री कैलाश, श्री अनिल पाटीदार साबाखेड़ा, श्री गोपाल पाटीदार बरूजना द्वारा जैविक खेती से फसलों में हुए लाभ व फसलों की गुणवत्ता को लेकर समक्ष में अपने अनुभवों को बांटा।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री प्रहलाद बंधवार, श्री डाॅ. के.बी. निगम, डाॅ. अतुल पाण्डेय द्वारा भगवान बालाजी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया। श्री लालबहादुर श्रीवास्तव, पंकज कानूनगों द्वारा जैविक पर आधारित कविताओं का पाठ किया। श्री दिनेश शर्मा, श्री रविशराय गौड़, श्री हरिश शर्मा, श्री पंकज कानूनगों, श्री अरूण गौड़ द्वारा भी संबोधित किया।
अतिथियों का स्वागत ग्रीन प्लेनेट बायो प्रोडक्टस मंदसौर परिवार के सर्व श्री शैलेन्द्र माथुर, श्री अरूण गौड़, श्री शरद गौड़, श्री रविशराय गौड़, श्री पंकज कानूनगों श्री हरिश शर्मा, श्री धर्मेश दुबे, डाॅ. प्रीतिपालसिंह राणा, श्री राजेश मण्डवारिया, श्री ओम माली द्वारा पुष्पहारों से किया।
इस अवसर पर विभिन्न उत्पादनों के डेमों का प्रदर्शन भी स्थल पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रीतिपालसिंह राणा ने किया एवं आभार श्री शैलेन्द्र माथुर द्वारा माना गया।

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